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13 साल पहले शुरू हुआ था एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, तब केवल 1.5 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, आज बढ़कर 20 प्रतिशत पहुंच गया, आगे क्या?
सरकार का अब संसद में दावा- E20 से गाड़ियों के इंजन को कोई नुकसान नहीं
नई दिल्ली। देशभर में E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच एक बार फिर केंद्र सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि अब तक ऐसा कोई प्रमाण या पुख्ता रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल की वजह से वाहनों के इंजन खराब हो रहे हैं या बड़े पैमाने पर वाहन रास्ते में बंद पड़ रहे हैं। सरकार के अनुसार, 23 करोड़ से अधिक वाहनों के संचालन के अनुभव, ऑटोमोबाइल कंपनियों के सर्विस रिकॉर्ड और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि E20 ईंधन से व्यापक स्तर पर इंजन फेल होने जैसी समस्या नहीं देखी गई है। हालांकि, कुछ पुराने वाहनों में माइलेज 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि देश में 20 करोड़ से अधिक दोपहिया वाहन और 3 करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें वर्तमान में E20 ईंधन का उपयोग कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे वाहनों की भी है, जिन्हें E20 मानक लागू होने से पहले बनाया गया था। इसके बावजूद उपलब्ध डेटा में एथेनॉल मिश्रण के कारण इंजन फेल होने, फ्यूल पंप खराब होने, जंग लगने या बड़े पैमाने पर वाहन ब्रेकडाउन की पुष्टि नहीं हुई है।
E20 कोई अचानक लागू नहीं हुआ, 13 साल से चल रहा सिलसिला
सरकार ने संसद में कहा कि E20 कोई अचानक लागू किया गया ईंधन नहीं है। भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की शुरुआत पायलट स्तर पर वर्ष 2001 में हुई थी और इसके बाद वैज्ञानिक परीक्षणों, तकनीकी मूल्यांकन तथा ऑटोमोबाइल उद्योग, तेल विपणन कंपनियों और अन्य हितधारकों से लगातार चर्चा के बाद इसे आगे बढ़ाया गया। वर्ष 2013-14 में पेट्रोल में एथेनॉल की हिस्सेदारी केवल 1.53 प्रतिशत थी, जिसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर 2025-26 में 20 प्रतिशत तक पहुंचाया गया।
सरकार का दावा- सर्विस रिकॉर्ड में भी E20 से नुकसान का कोई जिक्र नहीं
सरकार के मुताबिक, एक प्रमुख चारपहिया वाहन निर्माता कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की। इनमें लगभग 1.5 करोड़ वाहन ऐसे थे, जिन्हें E20 के अनुरूप डिजाइन नहीं किया गया था। इसके बावजूद कंपनी के रिकॉर्ड में E20 पेट्रोल के कारण इंजन या फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचने की कोई पुष्टि नहीं हुई। इसी तरह, एक बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी के सर्विस डेटा का विश्लेषण करने पर भी E20 ईंधन इस्तेमाल करने वाले वाहनों में पहले की तुलना में किसी अलग तरह की खराबी या असामान्य तकनीकी समस्या दर्ज नहीं की गई। सरकार का कहना है कि यदि E20 से वास्तव में बड़े स्तर पर नुकसान हो रहा होता तो वारंटी क्लेम, सर्विस अभियान और उपभोक्ताओं की शिकायतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दिखाई देती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
लेकिन सरकार ने यह मना- माइलेज में मामूली कमी संभव
सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि जिन वाहनों को E10 (10 प्रतिशत एथेनॉल) के हिसाब से डिजाइन किया गया था, उनमें E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर माइलेज में लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। हालांकि, सरकार का कहना है कि किसी भी वाहन की वास्तविक फ्यूल एफिशिएंसी ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति, ट्रैफिक और वाहन के रखरखाव पर भी निर्भर करती है। इसलिए हर वाहन में माइलेज पर समान असर नहीं पड़ता।
E20 पर सरकार का जोर क्यों, यह भी जानना जरूरी है
सरकार के अनुसार E20 ईंधन के कई तकनीकी और पर्यावरणीय लाभ भी हैं। इसमें ऑक्टेन रेटिंग अधिक होने से इंजन बेहतर प्रदर्शन करता है। इसकी एंटी-नॉक क्षमता इंजन में अनचाही नॉकिंग को कम करने में मदद करती है। एथेनॉल मिश्रित ईंधन अपेक्षाकृत साफ तरीके से जलता है, जिससे प्रदूषक उत्सर्जन कम होता है और इंजन का संचालन अधिक स्मूद महसूस होता है।
कच्चे तेल पर निर्भरता कम होने से देश को बड़ा फायदा
सरकार का यह भी कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ईंधन बदलना नहीं, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना, किसानों के लिए एथेनॉल उत्पादन के नए अवसर तैयार करना और कार्बन उत्सर्जन कम करना भी है। हाल के वर्षों में एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के साथ-साथ मक्का, टूटे चावल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त खाद्यान्न जैसे वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग भी बढ़ाया गया है, ताकि एक ही फसल पर निर्भरता कम रहे।
20 प्रतिशत से अधिक ब्लेंडिंग पर फिलहाल कोई फैसला नहीं
राज्यसभा में यह भी पूछा गया कि क्या सरकार भविष्य में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक करने की योजना बना रही है। इस पर मंत्री सुरेश गोपी ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में इस दिशा में कोई कदम उठाया जाता है तो उससे पहले विस्तृत वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन किए जाएंगे तथा ऑटोमोबाइल कंपनियों, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और शोध संस्थानों सहित सभी संबंधित पक्षों से व्यापक परामर्श किया जाएगा। सरकार ने यह भी साफ किया कि अभी E20 से पीछे हटकर E10 या शुद्ध पेट्रोल पर लौटने की भी कोई योजना नहीं है।

