- Hindi News
- धर्म ज्योतिष
- सावन में महिलाएं क्यों पहनती हैं हरी चूड़ियां? जानिए इसका धार्मिक महत्व
सावन में महिलाएं क्यों पहनती हैं हरी चूड़ियां? जानिए इसका धार्मिक महत्व
सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह महीना विशेष रूप से सुहागन महिलाओं के लिए सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए होता है। यही कारण है कि सावन के दौरान हरे रंग के वस्त्र पहनने और हरी चूड़ियां धारण करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। चारों ओर फैली हरियाली के कारण भी इस महीने में हरे रंग को प्रकृति, नई ऊर्जा और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक परंपराओं में सावन के महीने में माता पार्वती की पूजा के साथ हरी चूड़ियां पहनने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बनी रहती है तथा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। भारतीय संस्कृति में चूड़ियां केवल श्रृंगार का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि इन्हें सुहाग, मंगल का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए सावन में हरी चूड़ियां पहनने की परंपरा महिलाओं के धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती को हरा रंग बहुत प्रिय है। सावन के महीनों में महिलाओं को हरी चूड़ियां पहनने से भगवान शिव और माता पार्वती की की कृपा प्राप्त होती है। हरे रंग को शांति, समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और मंगल का प्रतीक माना जाता है। ऐसा भी कहा जाता है कि यह रंग मानसिक तनाव और क्रोध को कम कर मन को शांति करता है।
हरी चूड़ियां पहनते समय कुछ नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना गया है। सावन की शुरुआत के बाद सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के पश्चात श्रद्धा और विश्वास के साथ हरी चूड़ियां पहननी चाहिए। चूड़ियां धारण करते समय भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए दांपत्य जीवन की खुशहाली, परिवार की सुख-समृद्धि और सभी के कल्याण की प्रार्थना करनी चाहिए। साथ ही इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी चूड़ी टूटी हुई न हो, क्योंकि इसे शुभ नहीं माना जाता।

