बंगाल: अमित शाह ने ऐसा क्यों कहा- चुनाव के बाद भी सात दिन तक रहेगी फोर्स, क्या केंद्र को परिणाम के बाद हिंसा की आशंका है?

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: आखिरी चरण का मतदान कल

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दूसरे चरण के लिए प्रचार सोमवार शाम को थम गया। अब 29 अप्रैल को 142 सीटों पर मतदान होना है, जिसे चुनाव की दिशा और सत्ता की तस्वीर तय करने वाला अहम चरण माना जा रहा है। मतदान से पहले सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी और आखिरी दिन सियासी तापमान चरम पर रहा।

प्रचार के अंतिम घंटों में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता में शक्ति प्रदर्शन करते हुए सुकांत सेतु से गोपालनगर क्रॉसिंग तक करीब 6 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। इस दौरान वे समर्थकों की भारी भीड़ के बीच पैदल चलीं और जनता से समर्थन की अपील की। दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बेहाला में जनसभा और रोड शो कर सुरक्षा को लेकर बड़ा संदेश दिया।

शाह ने कहा कि मतदाताओं को किसी भी तरह के डर में आने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चुनाव आयोग ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं और मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि चुनाव परिणाम आने के बाद संभावित हिंसा को रोकने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बल कम से कम सात दिनों तक राज्य में तैनात रहेंगे, चाहे सत्ता में कोई भी आए।

शाह की अपील- 29 अप्रैल को बिना भय के मतदान करें

उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि 29 अप्रैल को बिना भय के मतदान केंद्रों तक जाएं और लोकतंत्र को मजबूत करें। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब बंगाल में चुनाव के बाद होने वाली हिंसा एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। भाजपा इस रणनीति के जरिए खासकर उन इलाकों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जहां डर के कारण लोग वोट डालने से हिचकते हैं।

कुछ जगहों पर हिंसा की घटनाएं, केंद्र अलर्ट

चुनाव से पहले राज्य में हिंसा और सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं भी सामने आई हैं। उत्तर 24 परगना के भाटपारा में भाजपा उम्मीदवार के घर के बाहर गोलीबारी में एक सीआईएसएफ जवान घायल हो गया। इस मामले में एक पार्षद सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं हावड़ा में एक पोलिंग बूथ के परिसर से आठ क्रूड बम बरामद हुए हैं, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

अब तक 510 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध सामग्री जब्त

दूसरे चरण के मतदान को शांतिपूर्ण बनाने के लिए चुनाव आयोग के निर्देश पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। राज्यभर में 1,543 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें पूर्व बर्धमान के एक तृणमूल पार्षद भी शामिल हैं। उन पर भाजपा नेता के घर पर हमला करने और धमकाने का आरोप है। इसके अलावा अवैध गतिविधियों पर भी शिकंजा कसा गया है। अब तक 510 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध सामग्री जब्त की जा चुकी है, जो 2021 के चुनाव के मुकाबले काफी ज्यादा है। जब्ती में 30 करोड़ रुपये नकद, 126.85 करोड़ की शराब, 110.12 करोड़ के ड्रग्स और 58.28 करोड़ के सोना-चांदी शामिल हैं।

बंगाल में राजनीतिक टकराव जारी है…

राजनीतिक टकराव भी लगातार देखने को मिल रहा है। हुगली के गोघाट में तृणमूल सांसद मिताली बाग की गाड़ी पर पत्थर फेंके गए, जिससे वे घायल हो गईं। उन्होंने इस हमले के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया, जबकि भाजपा ने इसे सहानुभूति हासिल करने की कोशिश बताया।

भाजपा की सबसे बड़ी उम्मीद उत्तर 24 परगना

चुनावी समीकरणों की बात करें तो भाजपा की सबसे बड़ी उम्मीद उत्तर 24 परगना जिला है, जहां मतुआ और शरणार्थी वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। नागरिकता संशोधन कानून यहां बड़ा मुद्दा बना हुआ है और भाजपा इसे अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही है। वहीं तृणमूल इसी मुद्दे को लेकर मतुआ और अल्पसंख्यक वोटों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है। 

तृणमूल की सबसे बड़ी उम्मीद हावड़ा और 24 परगना

दक्षिण बंगाल का इलाका इस चुनाव का सबसे अहम रणक्षेत्र बना हुआ है। कोलकाता, हावड़ा और 24 परगना जिलों को तृणमूल का मजबूत गढ़ माना जाता है। भाजपा के लिए यहां सेंध लगाए बिना सत्ता तक पहुंचना मुश्किल है, जबकि तृणमूल के लिए इस इलाके को बचाए रखना चौथी बार सरकार बनाने की कुंजी है। आंकड़े भी इस अहमियत को साबित करते हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में इन 142 सीटों में से 123 पर तृणमूल ने जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को सिर्फ 18 सीटें मिली थीं। 

दरअसल, बंगाल की सत्ता का रास्ता उत्तर या जंगलमहल से नहीं, बल्कि दक्षिण बंगाल के घनी आबादी वाले इलाकों से होकर गुजरता है। उत्तर और दक्षिण 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा मिलकर 91 सीटों का ऐसा समूह बनाते हैं, जो विधानसभा की एक-तिहाई ताकत रखते हैं। यही वजह है कि इसे सत्ता का प्रवेश द्वार कहा जाता है। अब नजरें 29 अप्रैल के मतदान पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि बंगाल की सत्ता की कुर्सी की ओर बढ़त किसे मिलती है।

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