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राहुल गांधी का 'UP मास्टरप्लान' लीक: 2024 का करिश्मा दोहराने के लिए अब किस 'सीक्रेट' मिशन पर है कांग्रेस?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। एक बार फिर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन के बीच सीधी चुनावी टक्कर होने की अटकलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चुनावी मोड में आ गए हैं, ऐसा लगता है। इस बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी मौजूदगी दिखानी शुरू कर दी है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पहले से ही चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं। इन सभी राजनीतिक दांवपेंचों के बीच कांग्रेस ने सबका ध्यान खींचा है।
UP के लिए कांग्रेस का 'EBC प्लान' क्या है?
2027 की UP विधानसभा चुनाव में अब 10 महीने से भी कम समय बचा है, ऐसे में कांग्रेस पार्टी अपनी चुनावी रणनीति पर सक्रिय रूप से काम करती दिख रही है। इसी सप्ताह राहुल गांधी अमेठी और रायबरेली क्षेत्रों में सार्वजनिक रैलियों को संबोधित करते नजर आए थे। इस दौरान उन्होंने मीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण करके चुनाव से पहले कांग्रेस पार्टी का मुख्य संदेश पहुंचाने की कोशिश की।
पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस विभिन्न अन्य सामाजिक समूहों को लक्ष्य बनाकर इसी तरह के कार्यक्रम करती नजर आई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस जून के मध्य में ‘अत्यंत पिछड़ा वर्ग’ (EBC) को अपने पक्ष में करने की कोशिश करेगी।
राहुल गांधी अपनी लगभग सभी सार्वजनिक रैलियों में ‘पिछड़ा’, ‘अत्यंत पिछड़ा’ और ‘दलित’ इन तीन शब्दों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते दिखाई दिए हैं। वे बार-बार “जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी” जैसे नारे लगाते नजर आए हैं। इस संदर्भ में राहुल गांधी लगातार राष्ट्रव्यापी जातिगत जनगणना की वकालत करते रहे हैं, जिसके बाद केंद्र सरकार भी इसके लिए तैयार होती दिख रही है।
सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी के संकेत को समझते हुए UP कांग्रेस इकाई ने विभिन्न OBC जातियों और समुदायों का समर्थन जुटाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। UP में पार्टी का प्राथमिक ध्यान नाई, राजभर, निषाद, कश्यप और विश्वकर्मा जैसे समुदायों से जुड़ने पर है। गौरतलब है कि UP की राजनीति के संदर्भ में इन समुदायों को आधिकारिक रूप से ‘अत्यंत पिछड़ा वर्ग’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है। अनुमान है कि ये समुदाय सामूहिक रूप से उत्तर प्रदेश की कुल आबादी का लगभग 26 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं। माना जा रहा है कि जातिगत जनगणना की रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद इन समूहों की वास्तविक संख्या और अधिक हो सकती है। वहीं उत्तर प्रदेश में कुल OBC आबादी 50 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान है।
UP में कांग्रेस की बैठकों का दौर
पिछले कुछ महीनों में UP कांग्रेस के कार्यक्रमों की समीक्षा से पता चलता है कि पार्टी ने किसानों, वकीलों, जाटों, गुर्जरों, पासियों, निषादों, लोधियों और सवर्ण (उच्च) जातियों सहित अन्य लोगों के साथ विशेष बैठकें आयोजित की हैं। पार्टी अब अपने जनसंपर्क अभियान का दायरा बढ़ा रही है। UP कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे का संचालन करने वाले नेताओं को उम्मीद है कि ये प्रयास रंग लाएंगे और 2024 की लोकसभा चुनाव की तरह इंडिया गठबंधन को फायदा पहुंचा सकते हैं। याद रखने वाली बात यह है कि 2024 की लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था; जिसमें “संविधान खतरे में है और उसे बचाना है” थीम पर प्रचार करके गठबंधन ने सफलतापूर्वक 6 सीटें हासिल की थीं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री शाह पर निशाना साध रहे हैं राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में रायबरेली में आयोजित ‘बहुजन स्वाभिमान सभा’ के दौरान एक बार फिर यह मुद्दा उठाया था। भाजपा के विरोध के बावजूद उन्होंने पोडियम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को कड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए “गद्दार” तक कह दिया था। उन्होंने मंच से सवाल पूछा कि अगर कोई संविधान को कमजोर करता है या उसे नष्ट करता है, तो उन्हें देशद्रोही के अलावा और क्या कहा जा सकता है?
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उत्तर प्रदेश में इंडिया गठबंधन एकजुट रहेगा। हालांकि, उन्होंने सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस में यह कहकर तनाव बढ़ा दिया है कि गठबंधन के लिए एकमात्र मापदंड जीतने की क्षमता होगी... और कुछ नहीं।
‘मंडल-कमंडल’ के कारण कांग्रेस से दूर हुई जातियों को साथ लाने की कोशिश
UP कांग्रेस के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष मनीष हिंदवी ने कहा कि पार्टी जीत सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठा रही है। 1990 के दशक में ‘मंडल’ और ‘कमंडल’ राजनीति के उभार के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का प्रभाव कम हो गया था। कई जातीय समूह समाजवादी पार्टी, बसपा और भाजपा की ओर चले गए थे। अब पार्टी का मानना है कि राहुल की बढ़ती स्वीकार्यता से उसे फायदा मिल सकता है, क्योंकि वे सामाजिक न्याय और सांप्रदायिकता विरोधी मुद्दे उठा रहे हैं।
पंचायत चुनावों में भी कांग्रेस अपनी ताकत आजमाने को तैयार
अपने जमीनी संगठन को पुनर्जीवित करने की योजना के तहत कांग्रेस ने MLC चुनावों के साथ पंचायत चुनाव लड़ने का फैसला किया है। कांग्रेस के महासचिव और UP प्रभारी अविनाश पांडे ने पहले कहा था कि उनकी योजना में 57,961 पंचायतों, 826 ब्लॉक और 75 जिला पंचायतों में लगभग 3,500 सीटों पर चुनाव लड़ना शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने पहले ही लगभग 100 जीतने योग्य सीटों की पहचान कर ली है। उन्हें उम्मीद है कि उनके गठबंधन सहयोगी उन्हें 80 सीटें आवंटित करेंगे। 2017 के विधानसभा चुनाव में जब सपा और कांग्रेस ने संयुक्त रूप से चुनाव लड़ा था, तब कांग्रेस ने 114 सीटों में से 7 सीटें जीती थीं। उसे 6.25% वोट शेयर मिला था। 2022 में, जब दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़े थे, तब कांग्रेस 399 सीटों में से सिर्फ 2 सीटें ही जीत सकी थी और उसे 2.33% वोट शेयर मिला था।
2017 में असफल, लेकिन 2024 में सफल रही राहुल-अखिलेश की जोड़ी
समाजवादी पार्टी ने 2017 में 311 सीटों पर चुनाव लड़ा था और उनमें से 47 सीटें जीती थीं। उसे 21.82% वोट शेयर मिला था। इसके विपरीत, पांच साल बाद उसने 347 सीटों पर चुनाव लड़ा और 111 सीटें जीतीं, जिससे उसे 32.06% वोट शेयर मिला। हालांकि, लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस साथ आए थे। उन्होंने क्रमशः 37 और 6 सीटें जीती थीं और उन्हें क्रमशः 33.59% और 9.46% वोट शेयर मिला था। अब दोनों दलों को उम्मीद है कि वे 2024 के परिणामों को 2027 में भी दोहरा सकेंगे।

