- Hindi News
- राजनीति
- गांधीनगर: देश में एक साथ चुनाव कराने से सात लाख करोड़ रुपये की बचत संभव; जीडीपी भी सुधरेगा और गरीबी भ...
गांधीनगर: देश में एक साथ चुनाव कराने से सात लाख करोड़ रुपये की बचत संभव; जीडीपी भी सुधरेगा और गरीबी भी कम होगी, जानिए कैसे?
गांधीनगर। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ प्रस्ताव पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने बताया कि देश में एक साथ चुनाव कराने से कितना बड़ा फायदा हो सकता है। उन्होंने बताया कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ कराने से देश को करीब सात लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। इस बचत राशि का उपयोग बुनियादी ढांचा विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और गरीबों के कल्याण जैसे जनहित कार्यों में किया जा सकता है।
गुजरात के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंची जेपीसी ने मंगलवार को गांधीनगर स्थित गिफ्ट सिटी में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, मुख्य सचिव एमके दास, भाजपा पदाधिकारियों और विभिन्न विभागों के सचिवों के साथ बैठक की। बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में चौधरी ने कहा कि अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत प्रस्तुति दी, जिन पर पहले पर्याप्त विचार नहीं हुआ था। बता दें कि वन नेशन वन इलेक्शन के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता पीपी चौधरी कर रहे हैं। इसमें कुल 39 सदस्य हैं, जिनमें 27 लोकसभा सांसद और 12 राज्यसभा सांसद शामिल हैं।
इधर, पीपी चौधरी ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि सभी विभागों से प्राप्त सुझावों और प्रभावों का समग्र आकलन करते हुए एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए। चौधरी ने कहा कि यह रिपोर्ट देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल का काम कर सकती है, ताकि वे भी उसी प्रारूप में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकें। जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि रिपोर्ट में उद्योग, उत्पादन हानि, श्रम प्रवासन, रोजगार, जीएसटी संग्रह, अर्थव्यवस्था, पर्यटन और शिक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों का व्यापक अध्ययन शामिल होना चाहिए।
एक साथ चुनाव कराने से जीडीपी में भी होगा सुधार
चौधरी ने दावा किया कि एक साथ चुनाव कराए जाने से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 1.6 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि अर्थशास्त्रियों ने भी इस संभावना का समर्थन किया है। इसी तरह अगर एक साथ देश में चुनाव कराए जाते हैं तो सात लाख करोड़ रुपये की बचत होगी। बता दें कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी, जिसने चुनाव सुधारों पर विस्तृत अध्ययन किया। चौधरी के अनुसार, समिति ने करीब 18 हजार पन्नों की रिपोर्ट सरकार को सौंपी है, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की सिफारिश की गई है, जबकि पंचायत और नगर निकाय चुनाव संसदीय और विधानसभा चुनावों के 100 दिनों के भीतर संपन्न कराने का सुझाव दिया गया है।
इस व्यवस्था से देश में विकास और गरीब हटाने में मिलेगी सहायता
चौधरी ने कहा कि इस व्यवस्था से बार-बार चुनाव कराने की आवश्यकता कम होगी और सरकारों को शासन, विकास, गरीबी उन्मूलन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय के वर्तमान और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों सहित कई संवैधानिक विशेषज्ञों ने समिति को बताया है कि ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ व्यवस्था से संघीय ढांचे, संविधान की मूल संरचना या मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता। जेपीसी अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय विधि आयोग, नीति आयोग और संसद की स्थायी समिति ने भी विभिन्न स्तरों पर एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में राय दी है।
समिति गुजरात पहले महाराष्ट्र समेत कई राज्यों का दौरा कर चुकी है
उन्होंने बताया कि समिति गुजरात से पहले महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और कर्नाटक का दौरा कर चुकी है। चौधरी ने कहा कि समिति सभी पक्षों की राय सुनकर व्यापक सहमति बनाने का प्रयास कर रही है, ताकि संसद को राष्ट्रीय हित में संतुलित सिफारिशें सौंपी जा सकें।
क्या है वन नेशन वन इलेक्शन
बता दें कि अभी भारत में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं। वन नेशन वन इलेक्शन का मतलब लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने से है। यानी मतदाता लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को चुनने के लिए एक ही दिन, एक ही समय वोट डालेंगे।
क्या पहले भी साथ में हो चुके हैं लोकसभा और विधानसभा के चुनाव
हां, पहले भी एक साथ चुनाव हो चुके हैं। आजादी के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ ही हुए थे, लेकिन 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं समय से पहले ही भंग कर दी गईं। उसके बाद दिसंबर, 1970 में लोकसभा भी भंग कर दी गई। इस वजह से एक देश-एक चुनाव की परंपरा टूट गई।
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की अध्यक्षता में पैनल का गठन किया गया था
अब एक बार फिर से इस पर विचार किया जा रहा है। एक राष्ट्र-एक चुनाव पर विचार करने के लिए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में 2 सितंबर, 2023 को एक पैनल का गठन किया गया था। इस पैनल ने हितधारकों-विशेषज्ञों के साथ चर्चा और 191 दिनों के शोध के बाद 14 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

