पश्चिम बंगाल चुनाव: आखिर कैसे ढह गया ममता का अभेद्य किला? ये हैं वो 5 'बड़े फैक्टर' जो टीएमसी पर भारी पड़े

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विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में फिलहाल मतगणना चल रही है। सुबह दोपहर 12:15 बजे तक मतगणना से सामने आए 263 सीटों के शुरुआती रुझानों को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि भाजपा तेजी से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को पीछे छोड़ रही है। यदि ये रुझान जारी रहते हैं तो ममता का मजबूत किला ध्वस्त हो जाएगा। और भाजपा चुनाव जीतकर राज्य में सरकार बनाने के लिए तैयार है। ममता और उनके दल के सामने इस दुर्दशा के पीछे आखिर क्या कारण हैं?

आइए हम पाँच प्रमुख कारकों पर नजर डालते हैं, जिनके कारण बंगाल में लोकप्रिय ममता को वर्तमान विधानसभा चुनाव में 440 वोल्ट का झटका लग रहा है। जबकि एग्जिट पोल पहले ही भाजपा को बहुमत मिलने की संभावना का संकेत दे चुके थे, वर्तमान मतगणना रुझान अब उन भविष्यवाणियों को सही साबित कर रहे हैं।

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facebook.com/MamataBanerjeeOfficial

1. सत्ता विरोधी लहर

ममता बनर्जी 2011 से बंगाल में सत्ता में हैं। शासन के इतने लंबे समय के बाद बेरोजगारी, विकास का अभाव, सिंडिकेट राज और रोजमर्रा की जिंदगी की चुनौतियाँ, जिनमें राजनीतिक हिंसा शामिल है, जैसे मुद्दों ने मतदाताओं में रोष पैदा किया है। खासकर युवाओं में और शहरी तथा अर्ध-शहरी क्षेत्रों में यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। मतदाता बदलाव की इच्छा रखते हैं। विशेष रूप से, पिछले पाँच वर्षों में भाजपा ने ममता के प्रशासन से उत्पन्न समस्याओं को जोर-शोर से उजागर किया है। सबसे बड़ी बात यह है कि राज्य के लोग स्वयं ममता के शासन से काफी असंतुष्ट और मोहभंग हुए प्रतीत हो रहे थे।

2. भ्रष्टाचार के बड़े आरोप

पार्थ चटर्जी, ज्योतिप्रिया मलिक और अन्य सहित कई प्रमुख TMC नेताओं को शिक्षक भर्ती घोटाला, राशन वितरण घोटाला और कोयला तथा पशु तस्करी से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा की गई छापेमारी ने पार्टी की सार्वजनिक छवि को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। ये घटनाएँ शासन की प्रणालीगत विफलता का प्रतीक बन गई हैं।

3. मतदाता सूची संशोधन (SIR) और मतदाताओं को हटाने को लेकर विवाद

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान लगभग 63 लाख मतदाताओं को मतदाता सूची से हटा दिया गया था, जबकि 27 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया था। इसका प्रभाव विशेष रूप से मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में देखा गया, जो TMC का मुख्य वोट बैंक हैं। ममता ने इसे भाजपा और चुनाव आयोग द्वारा रचा गया षड्यंत्र बताया है, जबकि भाजपा इसे मतदाता सूची से फर्जी प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया मानती है। इससे TMC के वोट बैंक पर सीधा असर पड़ा है।

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4. महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर दबाव

TMC के समर्थन के दो प्रमुख स्तंभ—महिलाएँ और मुस्लिम मतदाता—कमजोर पड़ गए। संदेशखली घटना और आर.जी. कर अस्पताल मामले जैसी घटनाओं ने महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए और अल्पसंख्यक तुष्टिकरण के आरोपों के साथ मतदाताओं के एक हिस्से को दूर कर दिया। इसके विपरीत, भाजपा महिलाओं और हिंदू मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल रही।

5. भाजपा की आक्रामक रणनीति

2021 में भाजपा ने राज्य में 77 सीटें हासिल की थीं। पार्टी ने ‘डबल इंजन’ सरकार और औद्योगिकीकरण के वादों पर प्रचार किया था। तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक गुटबाजी, स्थानीय नेताओं के प्रति मतदाताओं का गुस्सा और विपक्ष की मजबूत चुनौती, विशेष रूप से उत्तर बंगाल में, सत्तारूढ़ पार्टी के लिए कठिन परिस्थितियाँ पैदा कर दीं।

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