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समय आ गया है कि गुजरात की राजनीति में Gen Z विधायक हों
(उत्कर्ष पटेल)
जंतर-मंतर और सोशल मीडिया के माध्यम से देश के युवाओं द्वारा किए गए धरना-प्रदर्शन आंदोलन की सफलता के बाद देशभर में युवा उत्साह में हैं और देश के Gen Z युवा देश की राजनीति में अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहे हैं।
देश की राज्य विधानसभाओं में कुल लगभग 4,131 विधायकों में से कुल 20 Gen Z विधायक हैं (यह आंकड़ा अगस्त 2026 के The Indian Express और ADR डेटा के अनुसार है)। Gen Z 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग हैं जो वर्तमान में लगभग 14 से 29 वर्ष के हैं, लेकिन MLA बनने के लिए न्यूनतम 25 वर्ष की आयु आवश्यक होने के कारण यह संख्या काफी कम है। इनमें भाजपा: 5, कांग्रेस: 4, TVK (तमिलनाडु): 3 और बाकी अन्य दलों से हैं।

भाजपा शासित राज्यों में भाजपा के कुल 5 Gen Z विधायक हैं। गुजरात में भी भाजपा सरकार है और गुजरात की जनता ने पीएम मोदी और भाजपा पर विश्वास जताने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी है। आशा करते हैं कि आने वाले समय में गुजरात में भी Gen Z विधायक हों और नवयुवकों को भी अवसर मिले।
अब प्रश्न यह उठता है कि आखिरकार गुजरात की राजनीति में Gen Z विधायकों की आवश्यकता क्यों उत्पन्न हुई है? Gen Z 'डिजिटल नेटिव्स' यानी टेक्नोलॉजी के साथ जन्मी पीढ़ी है। ये युवा केवल सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वैश्विक रुझानों (Global Trends) को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। यदि यह जनरेशन विधानसभा में पहुंचेगी, तो नीति निर्माण की प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी का उपयोग, स्टार्टअप इकोसिस्टम, ग्रीन एनर्जी, क्लाइमेट चेंज और आधुनिक शिक्षा पद्धति जैसे मुद्दों को सीधी प्राथमिकता मिलेगी। वे पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस पर अधिक जोर दे सकेंगे, जो गुजरात की डबल-इंजन सरकार के डिजिटल और विकास के सपनों को और गति दे सकता है।
गुजरात वर्तमान में GIFT City, स्मार्ट सिटीज, सेमीकंडक्टर हब और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में देश में अग्रणी है। यहाँ के युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोज़गार और उद्यमिता के क्षेत्र में नाम कमा रहे हैं। लेकिन नीति निर्माण के स्तर पर पुरानी सोच और नए युग की मांग के बीच एक पुल (सेतु) की आवश्यकता है। Gen Z विधायक यह कार्य कर सकते हैं। वे जानते हैं कि आज का युवा क्या चाहता है। चाहे वह मेंटल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य) से जुड़े नियम हों, गिग इकॉनमी (Gig Economy) और फ्रीलांसर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच हो या फिर डिजिटल प्राइवेसी के मुद्दे हों। ये सभी आधुनिक मुद्दे हैं जिन पर Gen Z विधायक सबसे पहले बोलेंगे और प्राथमिकता से काम करेंगे।

भारत और विशेष रूप से गुजरात के पास विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी (Demographic Dividend) है। राज्य की कुल जनसंख्या में बड़ा हिस्सा 25 वर्ष से कम आयु के युवाओं का है। जब जनता ही इतनी बड़ी संख्या में युवाओं की है, तो उनके प्रश्नों को समझने के लिए उनकी ही पीढ़ी के प्रतिनिधि विधानसभा में होने चाहिए। राजनीतिक दलों को अब पारंपरिक नेताओं के साथ-साथ युवा चेहरों को भी टिकट देने के पक्ष में निर्णय लेने होंगे। भाजपा ने अपने युवा मोर्चा और विद्यार्थी परिषद के माध्यम से जो युवा नेता तैयार किए हैं, उन्हें विधानसभा का टिकट देना समय की मांग है।
जंतर-मंतर या सोशल मीडिया पर आंदोलन करना लोकतंत्र का एक सुंदर और शक्तिशाली हिस्सा है, लेकिन वास्तविक परिवर्तन तभी आता है जब वही युवा सत्ता के गलियारों में प्रवेश करें और निर्णय लें। गुजरात की जनता, जिसने विकास के मॉडल को हमेशा सराहा है, वह नए विचारों वाले Gen Z विधायकों का भी सहर्ष (दिल से) स्वागत करेगी।
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

