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मोदी का Gen-Z कनेक्ट: अब सामान्य राजनीतिक सभा-रैली नहीं, कॉन्सर्ट के तर्ज पर मंच, डिजिटल तकनीक; ताकि युवाओं से सीधे जुड़ सकें
वडोदरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों जेन-जी पर ज्यादा से ज्यादा फोकस कर रहे हैं। युवाओं से उनका रूबरू होने का तरीका भी अनोखा होता है। आज के युवाओं के ही स्टाइल में सोशल मीडिया पर कभी इंस्टाग्राम तो कभी वीडियो संदेश के द्वारा उन्हें करीब लाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में वडोदरा में युवाओं के बीच एक अलग अंदाज में नजर आए। महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी के पवेलियन मैदान में आयोजित कार्यक्रम को पहली बार खास तौर पर Gen-Z को ध्यान में रखकर तैयार किया गया। कार्यक्रम में सामान्य सरकारी सभा की जगह युवाओं के अनुकूल मंच, डिजिटल रजिस्ट्रेशन और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
कार्यक्रम के लिए BookMyShow के जरिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया गया। सीटें फुल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों को वेटिंग में रखा गया। यह सरकारी कार्यक्रम में डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल का नया प्रयोग माना जा रहा है। रजिस्ट्रेशन, एंट्री और सीटिंग की व्यवस्था भी डिजिटल तरीके से की गई है।
Y आकार का रैंप, ताकि अधिक से युवाओं तक पहुंच सकें
कार्यक्रम स्थल पर प्रधानमंत्री के मुख्य मंच से जुड़ा Y आकार का खास रैंप बनाया गया है। इसके आसपास युवाओं के बैठने की व्यवस्था है। मोदी रैंप पर चलते हुए छात्रों और प्रोफेशनल्स के करीब पहुंचेंगे, उनसे संवाद करेंगे और उनका अभिवादन स्वीकार करेंगे। इस पूरे फॉर्मेट को सामान्य राजनीतिक रैली से अलग और ज्यादा संवादात्मक रखा गया है।
कार्यक्रम का प्रोडक्शन भी बड़े खेल आयोजनों और कॉन्सर्ट की तर्ज पर किया गया है। पूरे कार्यक्रम की शूटिंग और लाइव कवरेज 4K कैमरों से होगी, ताकि दर्शकों को बेहतर क्वालिटी का विजुअल अनुभव मिल सके।
क्यों जरूरी है Gen-Z से सीधा संवाद?
सरकार और राजनीतिक दलों का युवाओं पर बढ़ता फोकस केवल कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। Gen-Z सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर काफी सक्रिय है। 26 अगस्त को डेटा बीइंग्स के विश्लेषण के अनुसार, 20 जुलाई के बाद मोदी की प्रति इंस्टाग्राम पोस्ट औसत एंगेजमेंट 1.19 मिलियन से बढ़कर 4.63 मिलियन हो गई, यानी करीब 290% की वृद्धि।
युवाओं की बड़ी आबादी, रोजगार, शिक्षा, तकनीक तथा AI जैसे मुद्दों में उनकी सीधी रुचि भी इसे महत्वपूर्ण बनाती है। जुलाई 2026 के सरकारी PLFS आंकड़ों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की देश की श्रम भागीदारी दर 55.4% रही, जबकि बेरोजगारी दर 5.1% थी। ऐसे में युवा रोजगार और स्किल विकास सरकार के लिए अहम मुद्दे हैं।
राहुल गांधी का ‘छात्रों की गूंज’ के जरिए जेन-जी तक पहुंचने का प्रयास
इसी बदलते युवा संवाद के बीच कांग्रेस राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए छात्रों से सीधे जुड़ने की कोशिश कर रही है। भाजपा भी Instagram और Reels जैसे माध्यमों के जरिए युवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। आरएसएस ने भी Gen-Z तक पहुंच बनाने के लिए संवाद कार्यक्रमों का सहारा लिया है।
वडोदरा में मोदी ने फ्रेट कॉरिडोर से चिप-शिप तक गिनाईं उपलब्धियां
इधर, गुजरात के वडोदरा पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास और आत्मनिर्भरता के मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के समय विकास की रफ्तार धीमी थी, जबकि उनकी सरकार ने कई परियोजनाओं को गति दी। उन्होंने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का उदाहरण देते हुए कहा कि 2004 में इस पर विचार शुरू हुआ और 2006 में विशेष कंपनी बनाई गई, लेकिन 2014 तक फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक चलती रहीं। 2014 के बाद उनकी सरकार ने परियोजना को गति दी और करीब 2,000 किमी फ्रेट कॉरिडोर का काम पूरा हुआ। मोदी ने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियां एक ही ट्रैक पर चलती थीं, जिससे दोनों की गति प्रभावित होती थी। अब डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर रोज करीब 430 मालगाड़ियां चल रही हैं। उनके मुताबिक ट्रक से माल भेजने में करीब 30 घंटे लगते हैं, जबकि फ्रेट कॉरिडोर से यह करीब 10 घंटे में पहुंच सकता है।
मोदी ने कहा कि भारत पिछले एक दशक में मेट्रो कोच और रेल इंजन बनाने वाला बड़ा निर्माता बना है। 2014 के बाद देश में करीब 50 हजार आधुनिक रेल कोच बनाए गए। उन्होंने आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए कहा कि भारत अब ‘चिप से शिप’ तक अपनी क्षमता बढ़ा रहा है।
AI के लिए युवाओं की स्किल पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि भारत को AI का सुपरपावर बनना है तो पूरा इकोसिस्टम तैयार करना होगा। इसके लिए यूरेनियम और रेयर अर्थ मटेरियल की उपलब्धता बढ़ाने के साथ युवाओं की स्किल ट्रेनिंग और अपग्रेडेशन पर भी काम किया जा रहा है। अब केवल डिग्री नहीं, बल्कि स्किल पर भी जोर दिया जा रहा है।
बता दें कि वडोदरा का कार्यक्रम इसी बदलते राजनीतिक संवाद का एक नया रूप है, जहां सरकारी कार्यक्रम को पारंपरिक सभा की बजाय युवा-केंद्रित और तकनीक आधारित फॉर्मेट में पेश किया गया है।

