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डॉ. महेंद्रसिंह चौहान जैसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रकाश स्तंभ हैं, जो आंखों को रोशनी और दिलों को प्रेरणा देते हैं
(उत्कर्ष पटेल)
सरल और स्पष्ट स्वभाव वाले डॉ. महेंद्रसिंह देवसिंह चौहान गुजरात के प्रसिद्ध नेत्र सर्जन हैं। उनका जन्म 24 दिसंबर 1964 को हुआ था। वे केशवी आई हॉस्पिटल के संचालक हैं और लंबे समय से गरीबों की सेवा कर रहे हैं। उन्होंने वीर नर्मद दक्षिण गुजरात युनिवर्सिटी से 1987 में एमबीबीएस, 1990 में डीओएमएस, 1991 में एमएस (ऑफ्थैल्मोलॉजी) और 2014 में पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। वे कई वर्षों तक सरकारी मेडिकल कॉलेज, सूरत में असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में कार्य कर चुके हैं। वर्तमान में वे श्री भारती मैया कॉलेज ऑफ ऑप्टोमेट्री एंड फिजियोथेरेपी के प्रिंसिपल हैं।
स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वे विश्वविद्यालय के सिंडिकेट, सीनेट और मेडिसिन फैकल्टी के डीन के रूप में कार्य कर चुके हैं। राष्ट्रीय स्तर पर वे मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्वाचित सदस्य भी रहे हैं और कई उप-समितियों में सेवा दे चुके हैं। उन्होंने देश में मेडिकल सीटें बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने लगातार प्रस्तुतियां दीं, जिनका सकारात्मक परिणाम मिला। गुजरात में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

डॉ. चौहान अपनी सेवाभावना के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। वर्ष 2000 से वे सत्य साई आई हॉस्पिटल में मानद सर्जन के रूप में कार्य कर रहे हैं। अब तक वे 20,000 से अधिक गरीब मरीजों की मोतियाबिंद सर्जरी पूरी तरह निःशुल्क कर चुके हैं। इस सेवा के लिए उन्हें श्री सत्य साई धन्वंतरी सेवा पुरस्कार मिला है।
वे भरत कैंसर हॉस्पिटल के चेयरमैन भी हैं। वे आई व्यू लेजर विजन के संस्थापक हैं, जहां दक्षिण गुजरात के लगभग 40 नेत्र चिकित्सक मिलकर आधुनिक लेजर सर्जरी की सुविधा प्रदान करते हैं। वे के.पी. संघवी जनरल एंड आई हॉस्पिटल के ट्रस्टी भी हैं। सूरत पुलिस स्टाफ के लिए स्मार्ट कॉप हेल्थ कार्ड शुरू करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

समाजसेवा में वे राजपूत समाज से भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। वे राजपूत समाज साउथ गुजरात क्षत्रिय संघ के एग्जीक्यूटिव सदस्य और राजपूत समाज डॉक्टर एसोसिएशन के संस्थापक सचिव हैं।
वे अपने विनम्र स्वभाव, कार्यकुशलता और स्पष्ट निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। वे विवादों से दूर रहकर सर्वसम्मति से कार्य करना पसंद करते हैं। छात्र जगत और सामाजिक क्षेत्रों में वे हमेशा चर्चा में रहते हैं। उन्होंने कई शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और उनके मार्गदर्शन में चार विद्यार्थियों ने पीएचडी पूरी की है। उन्हें डॉ. के.जे. गणात्रा रोटेटिंग ट्रॉफी (2011-12) जैसे पुरस्कार भी मिल चुके हैं। उनकी पत्नी डॉ. बिनोदिनी चौहान ने भी चिकित्सा क्षेत्र में ही अपनी पहचान बनाई है और उनकी बेटी केशवी भी डॉक्टर हैं।

डॉ. चौहान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से विशेष रूप से प्रेरित हैं। वे अक्सर कहते हैं, “नरेंद्र भाई हमारे देश का गौरव हैं और हमें जितना संभव हो उनका साथ देना चाहिए। उनके अनुसार देश सेवा ही सच्ची सेवा है।”
एक व्यस्त डॉक्टर होने के बावजूद छात्र जगत और चिकित्सा संस्थागत सेवाओं के बीच समय का संतुलन बनाना डॉ. चौहान की विशेषता है। समाज से किसी प्रतिफल की अपेक्षा किए बिना सेवा में लगे रहने वाले ऐसे लोग ही समाजसेवा की ज्योति को सदैव प्रज्ज्वलित रखते हैं।
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवक और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

