अमरनाथ यात्रा: हिम शिवलिंग हुआ प्रकट, लेकिन कभी 12-15 फीट तक बनने वाला शिवलिंग अब 6-7 फीट तक क्यों सिमट गया?

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श्रीनगर। पवित्र अमरनाथ गुफा से बाबा बर्फानी की पहली तस्वीरें सामने आने के बाद देशभर के श्रद्धालुओं में उत्साह की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में पवित्र गुफा के भीतर लगभग 6 से 7 फीट ऊंचा प्राकृतिक हिम शिवलिंग आकार लेता दिखाई दे रहा है। यात्रा शुरू होने से पहले ही सुरक्षाबलों के जवानों और वहां मौजूद अधिकारियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। बता दें कि श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अनुसार इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई 2026 से शुरू होकर 28 अगस्त 2026 को रक्षा बंधन और सावन पूर्णिमा के दिन संपन्न होगी। करीब 57 दिनों तक चलने वाली इस यात्रा में इस बार रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
अमरनाथ यात्रा से जुड़े जानकारों का कहना है कि वर्ष 1996 से 2003 के बीच यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम होती थी। उस समय बाबा बर्फानी का हिम शिवलिंग 12-15 फीट तक विशाल आकार में दिखाई देता था और लंबे समय तक बना रहता था। उस दौर में हेलीकॉप्टर सेवाएं भी सीमित थीं और यात्रा की अवधि अधिक हुआ करती थी। लेकिन अब जैसे-जैसे भक्तों की संख्या में वृद्धि हो रही है वैसे-वैसे शिवलिंग का आकार भी घटते जा रहा है। अब अमरनाथ की पवित्र गुफा में शिवलिंग का आकार घटकर 6-7 फीट रह गया है जोकि एक चिंता का विषय है। विशेषज्ञ मानते हैं कि समय के साथ यात्रियों की संख्या बढ़ने, मौसम में बदलाव और तापमान वृद्धि के कारण हिम शिवलिंग का आकार धीरे-धीरे कम होने लगा है। बावजूद इसके बाबा बर्फानी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह आज भी पहले की तरह अटूट बना हुआ है।

अमरनाथ यात्रा मार्ग में अभी भारी मात्रा में बर्फ जमी हुई है

अमरनाथ यात्रा मार्ग पर इस समय भी भारी मात्रा में बर्फ जमी हुई है। सामान्य इलाकों में 6 से 8 फीट तक बर्फ मौजूद है, जबकि हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में इसकी ऊंचाई 10 से 12 फीट तक पहुंच रही है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) लगातार दोनों प्रमुख मार्गों बालटाल और पारंपरिक नुनवान पहलगाम ट्रैक को बहाल करने में जुटा हुआ है। 

अधिकारियों के मुताबिक बालटाल मार्ग पर करीब 9 किलोमीटर और नुनवान-पहलगाम मार्ग पर लगभग 8 किलोमीटर हिस्से से बर्फ हटाई जा चुकी है। इसके साथ ही ट्रैक को 12 फीट चौड़ा करने, सतह को मजबूत बनाने, रिटेनिंग वॉल और कल्वर्ट निर्माण का कार्य भी तेजी से चल रहा है। प्रशासन का दावा है कि 15 जून तक दोनों मार्ग पूरी तरह यात्रियों के लिए तैयार कर दिए जाएंगे।

इस बार यात्रियों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

अमरनाथ यात्रा 2026 में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस बार बेस कैंपों में बड़े बदलाव किए गए हैं। पारंपरिक टेंटों की जगह अब प्री-फैब्रिकेटेड और आधुनिक फाइबर स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं। इन संरचनाओं को अत्यधिक ठंड, बारिश और अचानक तापमान गिरने जैसी परिस्थितियों को देखते हुए डिजाइन किया गया है।

हर भवन में करीब 48 कमरे बनाए गए हैं, जिनमें अटैच्ड वॉशरूम की सुविधा होगी। यात्रियों को गर्म और ठंडे पानी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक भवन में पैंट्री की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं को भोजन और जरूरी सुविधाएं आसानी से मिल सकें। बताया जा रहा है कि इन परियोजनाओं पर पिछले तीन वर्षों से काम चल रहा था, जो अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है।

संवेदनशील इलाकों को बनाया गया ‘नो-एंट्री जोन’

प्रशासन ने इस बार यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए विशेष रणनीति तैयार की है। बादल फटने और अचानक बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील इलाकों को ‘नो-एंट्री जोन’ घोषित किया गया है। ऐसे स्थानों पर किसी भी प्रकार के कैंप लगाने की अनुमति नहीं होगी। बालटाल और नुनवान दोनों मार्गों पर पुलों को मजबूत किया जा रहा है और रास्तों को पहले की तुलना में ज्यादा चौड़ा बनाया गया है। सुरक्षा एजेंसियां, सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस संयुक्त रूप से यात्रा की सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगी।

अब तक 3.6 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने कराया रजिस्ट्रेशन

इस वर्ष अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। अब तक 3.6 लाख से अधिक श्रद्धालु यात्रा के लिए पंजीकरण करा चुके हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 15 अप्रैल से शुरू हुई थी और यह ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जारी है। देशभर में पंजाब नेशनल बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यस बैंक की निर्धारित शाखाओं के माध्यम से रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार यदि यही रफ्तार बनी रही तो इस वर्ष यात्रियों की संख्या 5 लाख के आंकड़े को पार कर सकती है। हालांकि 5 से 30 लोगों के समूह में यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए रजिस्ट्रेशन फिलहाल बंद कर दिए गए हैं, लेकिन व्यक्तिगत और छोटे समूहों के लिए स्लॉट उपलब्ध रहने तक प्रक्रिया जारी रहेगी।

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