- Hindi News
- राष्ट्रीय
- मिडिल ईस्ट संकट के बिच सरकार ने '3Fs' फार्मूला पर ध्यान केंद्रित किया
मिडिल ईस्ट संकट के बिच सरकार ने '3Fs' फार्मूला पर ध्यान केंद्रित किया
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए रणनीतिक तैयारी पर जोर दिया है। मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने तीन ‘Fs’— Fuel (ईंधन), Fertiliser (उर्वरक) और Forex (विदेशी मुद्रा) के बेहतर प्रबंधन को बेहद जरूरी बताया।
वित्त मंत्री ने नरेंद्र मोदी की उस हालिया अपील का भी समर्थन किया, जिसमें विदेशी मुद्रा बचाने और सोने जैसे गैर-जरूरी आयात कम करने की बात कही गई थी।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारत पर असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक और उपभोक्ता देशों में शामिल है। खाड़ी क्षेत्र और खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ा है, जिससे आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर दबाव बढ़ रहा है। तेल कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए मई में कई बार ईंधन दरों में बदलाव कर चुकी हैं।
इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि वैश्विक संकट का असर देश के घरेलू राजस्व पर भी पड़ रहा है। बढ़ती ईंधन कीमतों के बीच सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में कटौती किए जाने से वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। यह स्थिति देश के राजकोषीय संतुलन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।
MSME सेक्टर की लिक्विडिटी पर बढ़ी चिंता
वित्त मंत्री ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) की वित्तीय स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने सभी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) को निर्देश दिया कि MSME का बकाया भुगतान 45 दिनों के भीतर किया जाए। फिलहाल करीब 8.1 लाख करोड़ रुपये की रकम भुगतान में देरी के कारण अटकी हुई है, जिससे छोटे कारोबारों में वर्किंग कैपिटल की कमी और लिक्विडिटी संकट बढ़ रहा है।
इसके साथ ही निर्मला सीतारमण ने डर और घबराहट फैलाने वाली बयानबाजी से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत और लचीली बनी हुई है। उनके मुताबिक, भारत को घबराने के बजाय बाहरी आर्थिक दबावों का समझदारी से सामना करते हुए अपनी आर्थिक स्थिरता पर भरोसा बनाए रखना चाहिए।

