37% बच्चे अब ओटीटी का इस्तेमाल कर रहे, पैरेंट्स तुरंत ऑन करें ये सेफ्टी सेटिंग्स ताकि एडल्ट कंटेंट से दूर रहें, जानिए कैसे?

एक ही अकाउंट से पूरा परिवार देख रहा कंटेंट, बच्चों तक पहुंच रही एडल्ट वेब सीरीज

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नई दिल्ली। मोबाइल, टैबलेट और स्मार्ट टीवी अब बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं। बच्चे अब केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि अपने मनोरंजन के लिए भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लंबा समय बिता रहे हैं। यही वजह है कि अब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की मौजूदगी भी लगातार बढ़ रही है। लेकिन चिंता की बात यह है कि कई घरों में पूरा परिवार एक ही ओटीटी अकाउंट इस्तेमाल करता है, जिससे बच्चों के सामने कई बार एडल्ट या उम्र के लिहाज से अनुपयुक्त कंटेंट भी आ जाता है।

लोकल सर्कल के एक सर्वे के मुताबिक, 37% पैरेंट्स ने माना कि उनके बच्चे सबसे ज्यादा समय वीडियो और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स जैसे नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो और हॉटस्टार पर बिताते हैं। वहीं 54% अभिभावकों ने कहा कि उनके बच्चे किसी न किसी रूप में अनुपयुक्त या एडल्ट कंटेंट के संपर्क में आ चुके हैं। 

बच्चों को अब डिजिटल दुनिया से दूर रखना संभव नहीं

विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों को पूरी तरह डिजिटल दुनिया से दूर रखना संभव नहीं है, लेकिन सही पैरेंटल कंट्रोल और सुरक्षा सेटिंग्स के जरिए जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है। ऐसे में जानिए अलग-अलग ओटीटी और वीडियो प्लेटफॉर्म्स पर कौन-सी जरूरी सेटिंग्स तुरंत ऑन करनी चाहिए।

नेटफ्लिक्स: बच्चों के लिए अलग प्रोफाइल जरूरी

नेटफ्लिक्स पर सबसे पहले बच्चों के लिए अलग प्रोफाइल बनाना चाहिए। इसके लिए ‘मैनेज प्रोफाइल’ विकल्प में जाकर Kids Profile तैयार किया जा सकता है। इससे बच्चों को उम्र के अनुसार कंटेंट दिखता है। इसके अलावा हर प्रोफाइल पर पिन लॉक जरूर लगाएं। इससे बच्चे पैरेंट्स की प्रोफाइल में जाकर एडल्ट कंटेंट एक्सेस नहीं कर पाएंगे। नेटफ्लिक्स में ‘पैरेंटल कंट्रोल्स’ फीचर भी मिलता है, जहां अभिभावक बच्चों की उम्र के हिसाब से ‘मैच्योरिटी रेटिंग’ तय कर सकते हैं। इससे केवल वही फिल्में और शो दिखाई देंगे जो तय आयु वर्ग के लिए उपयुक्त हों।

अमेजन प्राइम वीडियो: खरीदारी और कंटेंट दोनों सुरक्षित करें

प्राइम वीडियो इस्तेमाल करने वाले परिवारों के लिए ‘पैरेंटल कंट्रोल्स’ सबसे जरूरी फीचर है। इसे अकाउंट सेटिंग्स में जाकर एक्टिव किया जा सकता है। इसके साथ ‘परचेज रेस्ट्रिक्शन’ जरूर ऑन करें। कई बार बच्चे गलती से किराये वाली फिल्में या पेड कंटेंट खरीद लेते हैं। पिन आधारित सुरक्षा इस जोखिम को रोकती है। यहां कंटेंट फिल्टरिंग के लिए U, U/A 13+, U/A 16+ और A जैसी कैटेगरी मिलती हैं। बच्चे की उम्र के अनुसार सही विकल्प चुनना जरूरी है।

जियो हॉटस्टार: किड्स मोड और पैरेंटल लॉक जरूरी

जियो हॉटस्टार का इस्तेमाल अक्सर बच्चों को कार्टून या क्रिकेट दिखाने के लिए किया जाता है, लेकिन उसी अकाउंट पर एडल्ट वेब सीरीज के सुझाव भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में ‘माय स्पेस’ सेक्शन में जाकर ऐप को Kids Mode में खोलना बेहतर विकल्प है। इससे बच्चों के सामने सीमित और सुरक्षित कंटेंट ही आएगा। इसके अलावा ‘पैरेंटल लॉक’ फीचर ऑन करने से बच्चे बिना अनुमति पैरेंट्स की प्रोफाइल एक्सेस नहीं कर पाएंगे।

यूट्यूब: स्क्रीन टाइम कंट्रोल करना भी जरूरी

यूट्यूब पर केवल कंटेंट फिल्टर करना ही नहीं, बल्कि स्क्रीन टाइम कंट्रोल करना भी जरूरी है। इसके लिए ‘फैमिली सेंटर’ फीचर का इस्तेमाल किया जा सकता है। यहां बच्चों के लिए अलग अकाउंट बनाकर उनकी उम्र के अनुसार वीडियो दिखाए जाते हैं। यूट्यूब में ‘रिमाइंडर’ फीचर भी उपलब्ध है, जो हर आधे घंटे या एक घंटे बाद ब्रेक लेने का अलर्ट देता है। साथ ही ‘डेली लिमिट’ फीचर के जरिए यूट्यूब शॉर्ट्स देखने की समय सीमा भी तय की जा सकती है।

क्यों जरूरी हो गए डिजिटल पैरेंटल कंट्रोल?

हाल के वर्षों में बच्चों की डिजिटल निर्भरता तेजी से बढ़ी है। लोकल सर्कल्स के सर्वे के अनुसार, 59% लोगों का मानना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म एडल्ट कंटेंट को बच्चों से अलग तरीके से प्रभावी ढंग से नहीं दिखा पा रहे हैं। ऐसे में केवल मोबाइल देना ही काफी नहीं है, बल्कि उस पर सुरक्षा सेटिंग्स एक्टिव करना भी उतना ही जरूरी हो गया है। थोड़ी सावधानी बच्चों को अनुपयुक्त कंटेंट और डिजिटल लत दोनों से बचा सकती है।

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