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मेरे भारत के युवाओं, आपके भीतर अपार ऊर्जा है, उसे विघटन के लिए नहीं, विकास के लिए उपयोग करें
(उत्कर्ष पटेल)
आज के भारत में राजनीतिक मंच पर आरोप-प्रत्यारोप की लहर इतनी प्रभावशाली हो गई है कि वह देश के युवाओं को उनके लक्ष्य से दूर धकेल रही है। सोशल मीडिया के युग में युवा आंदोलन और राजनीतिक दलों की रोज़ नई रणनीतियाँ एक-दूसरे के साथ संघर्ष की स्थिति में हैं। सरकारों को बचाने या गिराने के नाम पर रोज़ नए दाँव-पेंच रचे जाते हैं और उनमें युवाओं तथा सोशल मीडिया को आगे करके एक तरह का खेल खेला जाता है। इस खेल को समझने और इससे बाहर निकलने की तत्काल आवश्यकता है, क्योंकि देश का भविष्य इन्हीं युवाओं के हाथों में है।
राजनीतिक दल आरोप-प्रत्यारोप को अपना मुख्य हथियार बनाते आए हैं। एक दल दूसरे पर भ्रष्टाचार, अन्याय या विफलता के आरोप लगाता है, तो दूसरा दल तुरंत प्रत्यारोप के साथ जवाब देता है। यह चक्र इतना जटिल हो गया है कि वास्तविक समस्याएँ—शिक्षा की गुणवत्ता, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएँ, पर्यावरण और समग्र विकास—पिछड़ जाती हैं। युवा, जिनकी ऊर्जा और उत्साह असीमित है, इस राजनीतिक स्वार्थ के चक्र में खिंच जाते हैं। सोशल मीडिया पर ट्रेंडिंग हैशटैग, वायरल वीडियो और बिना सत्यापन की जानकारी उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित करती है। परिणामस्वरूप वे सोचने के बजाय प्रतिक्रिया देने लगते हैं। युवा आंदोलन कभी-कभी उचित माँगों के साथ शुरू होते हैं, लेकिन जल्द ही वे राजनीतिक दलों के हितों का माध्यम बन जाते हैं। यह स्थिति युवाओं को उनकी पढ़ाई, कौशल विकास और रचनात्मक गतिविधियों से विमुख कर देती है।

इस खेल की सही तार्किक समझ ही आज के युवाओं को जागरूक कर सकती है। सोशल मीडिया एक शक्तिशाली माध्यम है, लेकिन वह जानकारी का फ़िल्टर नहीं है। अधूरी सच्चाइयाँ, भावनात्मक अपीलें और पक्षपातपूर्ण बातें युवाओं को गुमराह कर सकती हैं। जब राजनीतिक दल युवाओं को आगे करके अपने एजेंडे को आगे बढ़ाते हैं, तब युवाओं का वास्तविक हित—बेहतर शिक्षा, रोजगार, कौशल और समाज की प्रगति—पीछे छूट जाता है। देश की सरकारें टिकें या गिरें, यह राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन युवाओं की भूमिका केवल नारे लगाने, रील बनाने या ट्वीट करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनकी भूमिका अधिक मूल्यवान और सार्थक होनी चाहिए, जिसमें हमारे देश और समाज की अस्मिता का मूल्य और मर्यादाएँ भी बनी रहें।

भारत का भविष्य आज के युवाओं के हाथों में है और वह सकारात्मक हो सकता है, यदि वे आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से मुक्त होकर विकास की दिशा में आगे बढ़ें। आज देश में प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप संस्कृति, डिजिटल अवसंरचना और वैज्ञानिक अनुसंधान के अपार अवसर हैं। यदि युवा इन अवसरों का लाभ उठाएँ, तो वे केवल अपना ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र का भविष्य उज्ज्वल बना सकते हैं। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, कौशल विकसित करना, नए विचारों को वास्तविक रूप देना और समाज के कमजोर वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ना—यही युवाशक्ति की सच्ची ताकत है। राजनीतिक विवादों में समय नष्ट करने के बजाय वे नीतिनिर्माण में रचनात्मक सुझाव दे सकते हैं, स्थानीय समस्याओं के समाधान खोज सकते हैं और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बना सकते हैं।
तटस्थ दृष्टिकोण से देखें तो आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति किसी एक दल की नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक व्यवस्था की प्रकृति रही है। इसे बदलने की जिम्मेदारी केवल नेताओं की नहीं, बल्कि युवाओं की भी है। युवाओं को विवेकपूर्ण विचार करना चाहिए, जानकारी की जाँच करनी चाहिए और भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय तार्किक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। सोशल मीडिया का उपयोग जानकारी फैलाने के लिए हो, लेकिन उसका उपयोग रचनात्मक चर्चा और समाधान के लिए भी होना चाहिए। यदि युवा आंदोलन वास्तविक मुद्दों पर केंद्रित रहें और राजनीतिक लाभ से मुक्त रहें, तो वे समाज को सही दिशा दिखा सकते हैं।
यदि भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, तो युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में लगनी चाहिए। युवाओं में राष्ट्रभक्ति, सेवा, सामाजिक उत्तरदायित्व और सकारात्मक नेतृत्व के संस्कार विकसित करना आवश्यक है। आंदोलनों को केवल राजनीतिक चश्मे से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय, सामाजिक और संवैधानिक दृष्टि से भी समझने की आवश्यकता है। इसका उत्तर केवल आलोचना नहीं है। युवाओं के बीच सकारात्मक संवाद, राष्ट्रभावना, सेवा और समाज-निर्माण के कार्यों का व्यापक विस्तार करना ही सबसे प्रभावी मार्ग है।

मेरे भारत के युवाओं, आपके भीतर अपार ऊर्जा है। उसे विघटन के लिए नहीं, विकास के लिए उपयोग करें। आपके भीतर सृजनशक्ति है। उसे विनाश के लिए नहीं, निर्माण के लिए उपयोग करें। आपके भीतर प्रश्न पूछने की शक्ति है। उसका उपयोग केवल विरोध के लिए नहीं, बल्कि समाधान और सुधार के लिए करें।
राष्ट्र आपकी प्रतीक्षा कर रहा है। यदि आप सही दिशा में आगे बढ़ेंगे, तो भारत विश्व का मार्गदर्शक बन सकता है। यदि आप गुमराह हो गए, तो इतिहास आपको माफ़ नहीं करेगा।
आज निर्णय आपका है: अपनी ऊर्जा किस दिशा में लगानी है?
किस मार्ग पर चलना है? कैसा भारत बनाना है?
सही उत्तर आपके हृदय में है।
राष्ट्रभक्ति, सेवा और सकारात्मक निर्माण का मार्ग ही सही मार्ग है। आइए, इस मार्ग पर चलें और भारत को विकसित, समृद्ध और महान राष्ट्र बनाएँ।
जय हिंद!
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

