- Hindi News
- राष्ट्रीय
- पोरबंदर की पुरानी कोर्ट में लावारिस हालत में मिले हजारों चुनाव कार्ड और आधार कार्ड, अधिकारी ने बताया...
पोरबंदर की पुरानी कोर्ट में लावारिस हालत में मिले हजारों चुनाव कार्ड और आधार कार्ड, अधिकारी ने बताया कारण
पोरबंदर में मार्ग एवं भवन विभाग की भारी लापरवाही का मामला सामने आया है। मार्ग एवं भवन विभाग के अधीन आने वाली पुरानी कोर्ट की इमारत में हजारों की संख्या में नागरिकों के चुनाव कार्ड और आधार कार्ड लावारिस हालत में मिलने से इलाके में हड़कंप मच गया है। इसके साथ ही प्रशासन की घोर लापरवाही उजागर हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, शहर के बीचों-बीच स्थित इस ऐतिहासिक इमारत में चुनाव कार्ड और आधार कार्ड के अलावा कई महत्वपूर्ण सरकारी फाइलें और रिकॉर्ड भी बिखरे हुए मिले हैं। जिन दस्तावेजों को सुरक्षित स्थान पर रखा जाना चाहिए था, वे यहां धूल फांक रहे हैं। इन संवेदनशील दस्तावेजों के खुले में होने से उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इमारत के अंदर ये चुनाव कार्ड किसने और किस उद्देश्य से डाले? क्या यह केवल लापरवाही है या किसी गंभीर अनियमितता का हिस्सा है? इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। वर्षों से अनुपयोगी पड़ी इस इमारत में संवेदनशील दस्तावेज मिलने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
यदि इन कार्ड्स का किसी आपराधिक गतिविधि में उपयोग होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह एक बड़ा प्रश्न है। इतनी बड़ी मात्रा में पड़े रिकॉर्ड की जानकारी जिम्मेदार विभाग को न होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। मांग की जा रही है कि प्रशासनिक तंत्र तुरंत इन रिकॉर्ड्स को सुरक्षित स्थान पर ले जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।
इस संबंध में सूचना मिलने पर मामलातदार बी. वी. संचाणिया ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया और बाद में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये चुनाव कार्ड साल 1996-97 के हैं। शुरुआत में ये दो प्रतियों में बनाए जाते थे, एक प्रति मतदाता को दी जाती थी और दूसरी प्रति कार्यालय में रिकॉर्ड (O/C) के रूप में रखी जाती थी। कार्यालय में जमा हुई चुनाव कार्ड की इन प्रतियों को एक निश्चित समय के बाद नष्ट करना होता है, लेकिन उस समय ऐसा नहीं किया गया।
अब सभी चुनाव कार्डों को इकट्ठा करके कार्यालय में सुरक्षित रख लिया गया है और अनुमति लेकर उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा। इसके अलावा, पुरानी फाइलों और पुराने 7/12 के कागजों को भी इकट्ठा कर उचित स्थान पर रखा जाएगा। जो रिकॉर्ड जर्जर हो चुका है और अनुपयोगी है, उसे भी अनुमति मांगकर नष्ट किया जाएगा। यह कार्यालय फिलहाल राज्य सरकार के अधीन है। पुराने चुनाव कार्ड और आधार कार्ड पैक करके हमारे कब्जे में ले लिए गए हैं।
इस बारे में पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजू ओडेदरा ने पोरबंदर की पुरानी कोर्ट जैसी ऐतिहासिक विरासतों की दुर्दशा के लिए सरकारी तंत्र और नेताओं की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। राजू ओडेदरा के अनुसार, मार्ग एवं भवन विभाग और सरकारी प्रशासन इन ऐतिहासिक इमारतों के रखरखाव में विफल रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि इन पुरानी इमारतों का पुरातात्विक दृष्टिकोण से नवीनीकरण किया गया होता, तो पोरबंदर विश्व स्तर पर एक बड़ा पर्यटन केंद्र बन सकता था। इन स्थानों पर गांधीजी के विचारों या पर्यटन से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए, ताकि विदेशी छात्र भी पोरबंदर की ओर आकर्षित हों। यदि सही ढंग से योजना बनाई गई होती, तो स्थानीय स्तर पर कुशल गाइड तैयार होते और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होते।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत के रखरखाव के अभाव में यहां अक्सर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है और खिड़की-दरवाजों जैसी कीमती चीजों की चोरी भी हुई है। अब जब नागरिकों के व्यक्तिगत और महत्वपूर्ण दस्तावेज इस तरह लावारिस मिले हैं, तो उनके दुरुपयोग का डर सता रहा है। स्थानीय लोगों में यह भी चर्चा है कि चुनाव कार्ड फेंकने वाले जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कोई कार्रवाई होगी या नहीं, या फिर इस गंभीर मामले को भी दबा दिया जाएगा।

