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बेटी जीवित है, 2 महीने पहले कन्यादान किया था, लेकिन अब पिता ने फोटो पर फूल-माला चढ़ाकर उसे मरा हुआ घोषित कर दिया
राजस्थान के उदयपुर में एक पिता ने प्रेम विवाह करने वाली अपनी बेटी के साथ न केवल सारे रिश्ते तोड़ लिए, बल्कि उसे मृत मानकर शोक पत्रिका भी छपवा दी और 'नवमी की धूप' भी दे दी। शोक पत्रिका के माध्यम से, पिता ने समाज के लोगों को अपने घर बुलाया और सार्वजनिक रूप से अपनी बेटी को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद, पिता ने पूरे परिवार के साथ मिलकर नवमी की धूप दी और घोषणा की कि अब उसका परिवार से कोई लेना-देना नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरी घटना उदयपुर जिले की ‘माल की टूस’ ग्राम पंचायत की है। पुष्कर लोहार ने 2 महीने पहले ही अपनी बेटी कोमल लोहार की शादी अपने ही समुदाय के एक युवक के साथ पूरे रीति-रिवाजों के साथ की थी। उस समय, पुष्कर लोहार ने शादी में अपनी क्षमता से अधिक खर्च किया था और अपनी बेटी की हर इच्छा पूरी करने की कोशिश की थी। लेकिन महज दो महीने बाद, कोमल ने प्यार के लिए दूसरे पुरुष के साथ शादी करके अपने पिता और ससुराल वालों को धोखा दिया। उसने दोनों परिवारों के साथ सारे रिश्ते तोड़ लिए और उस व्यक्ति के साथ रहने लगी।
जब कोमल के पिता को इस बात का पता चला, तो वे बहुत दुखी हुए। अपनी बेटी के साथ सारे रिश्ते खत्म करने का फैसला लेते हुए उन्होंने एक शोक पत्रिका छपवाई। पुष्कर लोहार ने शोक पत्रिका में घोषणा की कि उनकी बेटी कोमल लोहार का निधन हो गया है। इसके बाद उन्होंने 'नवमी की धूप' का समय निर्धारित कर समाज के सभी लोगों को अपने घर आमंत्रित किया, और सबके सामने कोमल की तस्वीर पर फूलों का हार चढ़ाया और उसे मृत घोषित करते हुए धूप दी।
इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी के साथ संबंध पूरी तरह से खत्म करने की घोषणा की। पुष्कर लोहार ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को बहुत प्यार से पाला था और सभी रीति-रिवाजों के साथ उसकी शादी की थी, लेकिन शादी के महज दो महीने बाद उसने दूसरे समुदाय के पुरुष के साथ शादी करने का घृणित कार्य किया है। उसके इस कृत्य से वे शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं, इसलिए अपनी बेटी कोमल लोहार के साथ सभी रिश्तों को खत्म कर रहे हैं और भविष्य में उससे कोई लेना-देना नहीं है।
आपको बता दें कि मेवाड़ में एक परंपरा है कि किसी स्त्री या युवती के निधन के बाद मायके में उसके नाम पर धूप चढ़ाई जाती है। यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और इसी परंपरा के आधार पर, उदयपुर के पुष्कर लोहार ने अपनी बेटी की शोक पत्रिका छपवाई और समाज के तमाम लोगों को अपने घर बुलाया। जब लोग उनके घर पहुंचे, तो उन्होंने बेटी के साथ सभी सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते खत्म करने का ऐलान कर दिया।

