- Hindi News
- राष्ट्रीय
- देश का सबसे महंगा लखनऊ-कानुपर एक्सप्रेसवे, 63 किमी लंबा, 4200 करोड़ रु. खर्च, 20 दिन में ही धंसा, क्य...
देश का सबसे महंगा लखनऊ-कानुपर एक्सप्रेसवे, 63 किमी लंबा, 4200 करोड़ रु. खर्च, 20 दिन में ही धंसा, क्या हो सकती है वजह
लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज 20 दिन में ही धंस गया। 63 किमी लंबे इस एक्सप्रेसवे को बनाने में 4200 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। 13 जुलाई को इसके उद्घाटन के समय केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा किया था कि उत्तर प्रदेश के नेशनल हाईवे अमेरिका की तरह होंगे। अब यह सड़क एक महीना भी नहीं चला और 80 से ज्यादा जगहों पर धंस गया। इसको लेकर सरकार की काफी किरकरी होने लगी। तमाम जगह ये खबरें चलने लगी। इसके बाद सरकार को एक्शन लेना पड़ा है। अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। एक्सप्रेसवे पर सामने आई निर्माण संबंधी खामियों के चलते फिलहाल टोल वसूली रोक दी गई है। मरम्मत कार्य पूरा होने तक यात्रियों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को हटाकर मुख्यालय भेज दिया गया है, जबकि पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया को चार्जशीट जारी की गई है। निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मिंग घोषित करते हुए भविष्य के एनएचएआई टेंडरों से बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी डिबारमेंट नोटिस जारी किया गया है।
63 किलोमीटर लंबा है लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे
13 जुलाई को शुरू हुए 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण पर करीब 4200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं। उद्घाटन के बाद बीते करीब 20 दिनों में पांच स्थानों पर सड़क और शोल्डर में क्षति की घटनाएं सामने आईं। उन्नाव के कोरारी क्षेत्र के आसपास सड़क किनारे बना शोल्डर भी बारिश के दौरान धंस गया तथा पानी निकासी की नाली क्षतिग्रस्त हो गई। लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों के कारण परियोजना पर सवाल उठे और इसके बाद एनएचएआई ने जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई शुरू की।
सरकार ने अब तक ये कार्रवाई की है…
एनएचएआई ने बताया कि निर्माण एजेंसी के परियोजना प्रबंधक विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र अभियंता के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार तथा रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को पहले ही परियोजना से हटा दिया गया है। तीनों को दो वर्ष तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई तथा एनएचआईडीसीएल की परियोजनाओं में भाग लेने से प्रतिबंधित किया गया है। निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक को अपने खर्च पर लगभग तीन करोड़ रुपये की लागत से प्रभावित हिस्सों की मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं। एजेंसी की गारंटी जब्त करने, जिम्मेदार अधिकारियों पर तीन वर्ष तक प्रतिबंध लगाने तथा उसकी रेटिंग घटाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
सबसे महंगे एक्सप्रेसवे में शामिल है यह प्रोजेक्ट
यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे महंगे एक्सप्रेसवे में शामिल है। 63 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट पर प्रति किलोमीटर लगभग 75 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। तुलना करें तो 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रति किलोमीटर लगभग 61 करोड़ रुपये की लागत आई थी। टोल भी अपेक्षाकृत अधिक रखा गया था। चार पहिया वाहन के लिए एक तरफ का टोल 275 रुपये तथा दोनों तरफ के सफर के लिए 415 रुपये निर्धारित था।
आईआईटी के खड़गपुर के प्रोफेसर के नेतृत्व में हो रही है जांच
एनएचएआई ने एक्सप्रेसवे की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। सड़क की गुणवत्ता का परीक्षण लेजर प्रोफिलोमीटर से किया जा रहा है। साथ ही आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी के नेतृत्व में पेवमेंट विशेषज्ञों की टीम तकनीकी जांच करेगी। टीम सड़क की क्षति के वास्तविक कारणों का अध्ययन कर सुधारात्मक उपाय सुझाएगी। रिपोर्ट एक सप्ताह में मिलने की उम्मीद है।
बड़ा सवाल: आखिर एक्सप्रेसवे पर बार-बार समस्या क्यों आई?
- विशेषज्ञों की मानें तो सड़क की नींव तैयार करते समय मिट्टी की परतों को निर्धारित मोटाई और क्रम में समुचित तरीके से कॉम्पैक्ट नहीं किया गया। उनके
- अनुसार यदि मोटी परतें एक साथ डाल दी जाएं और पर्याप्त रोलिंग न हो, तो बारिश के बाद धंसने की आशंका बढ़ जाती है।
- मिट्टी कटाव का भी ध्यान नहीं रखा गया, सड़क की कटान को रोकने के लिए जो उपाय किये जाने थे, वह पर्याप्त नहीं रहे।
- लापरवाही भी बड़ी वजह हो सकती है। सड़क को बनाने के लिए जो नियमावली होने चाहिए थे, उसको अनदेखा किया गया।

