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क्या युवाओं की मानसिक सेहत को बिगाड़ रहा है फेसबुक-इंस्टाग्राम, 24 घंटे ऑनलाइन रहने वाले बच्चों के लिए यह कितना खतरनाक?
न्यू मैक्सिको की कोर्ट ने मेटा पर बच्चों को उचित सुरक्षा नहीं दिए जाने पर लगाया भारी-भरकम जुर्माना
नई दिल्ली। फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत तमाम सोशल मीडिया क्या युवाओं की मानसिक सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं? क्या छोटे बच्चों से लेकर बड़े तक इसकी चपेट में आ चुके हैं? क्या इसके असर से बच्चों के स्वभाव पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। ऐसे न जानें कितने सवाल हैं, जिनके जवाब जानना जरूरी है। क्योंकि यह समस्या किसी एक घर से जुड़ी हुई नहीं है बल्कि देश-दुनिया के तकरीबन हर घर इस समस्या से जूझ रही है।
बता दें कि फेसबुक और इंस्टा की पैरेंट कंपनी मेटा पर अमेरिका में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मामले कोर्ट ने भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको की अदालत ने कंपनी पर कुल 942 मिलियन डॉलर (करीब 9,030 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया है। अदालत का मानना है कि मेटा के प्लेटफॉर्म युवाओं की मानसिक सेहत पर नकारात्मक असर डालते हैं और कंपनी बच्चों को सुरक्षित माहौल देने में विफल रही।
अदालत के आदेश के अनुसार, इस रकम में से 420 मिलियन डॉलर (करीब 3,993 करोड़ रुपये) युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के इलाज और सहायता सेवाओं पर खर्च किए जाएंगे। शेष राशि अगले पांच वर्षों तक जागरूकता अभियान, रोकथाम कार्यक्रम, स्क्रीनिंग और अन्य सहायता सेवाओं में इस्तेमाल होगी। यह मामला दो चरणों में चला। पहले चरण में मार्च 2026 में कोर्ट ने मेटा पर 375 मिलियन डॉलर (करीब 3,571 करोड़ रुपये) का सिविल जुर्माना लगाया था। कोर्ट ने माना कि कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म की सुरक्षा को लेकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया और बच्चों से जुड़े गंभीर खतरों की अनदेखी की। दूसरे चरण में अदालत ने अतिरिक्त 567 मिलियन डॉलर (करीब 5,390 करोड़ रुपये) का भुगतान करने का आदेश दिया। इस तरह कुल जुर्माना 942 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।
इस तरह फेसबुक-इंस्टाग्राम आपको चपेट में ले रहा है
न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेस ने 2023 में यह मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि फेसबुक और इंस्टाग्राम का डिजाइन ऐसा है, जो बच्चों और किशोरों को अधिक समय तक स्क्रीन पर बनाए रखता है। जांच के दौरान यह भी कहा गया कि प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम लगातार नए कंटेंट, नोटिफिकेशन और लाइक्स के जरिए यूजर्स की स्क्रीन टाइम बढ़ाने का काम करते हैं। इससे सोशल मीडिया की लत, चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
बच्चों को खासकर निशाना बनाया जा रहा है
यह आरोप भी लगाया गया कि कंपनी को यह जानकारी थी कि उसके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बच्चों को निशाना बनाने और यौन शोषण जैसे अपराधों के लिए किया जा रहा है, लेकिन सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं थे। अदालत ने माना कि मेटा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकी।
अदालत ने सिर्फ जुर्माना नहीं लगाया, बदलाव भी जरूरी बताए
अदालत ने मेटा को कई सुरक्षा सुधार लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। इनमें नाबालिगों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करने, स्कूल के समय और देर रात नोटिफिकेशन कम करने, बच्चों की सुरक्षा संबंधी फीचर स्पष्ट रूप से दिखाने और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी मजबूत करने जैसे कदम शामिल हैं। हालांकि मेटा ने फैसले से असहमति जताई है और कहा है कि वह इसके खिलाफ अपील करेगी। कंपनी का कहना है कि वह पहले से बच्चों की सुरक्षा के लिए कई तकनीकी उपाय लागू कर चुकी है और सभी गलत गतिविधियों को पूरी तरह रोकना किसी एक कंपनी के लिए आसान नहीं है।
अमेरिका के 46 फीसदी बच्चे हमेशा ऑनलाइन रहते हैं
सोशल मीडिया के मानसिक स्वास्थ्य पर असर को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई शोध सामने आए हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के लगभग 46% किशोरों ने माना कि वे लगभग हमेशा ऑनलाइन रहते हैं। वहीं यूएस सर्जन जनरल ने 2023 की एडवाइजरी में चेतावनी दी थी कि बच्चों और किशोरों में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग अवसाद, चिंता और अकेलेपन की भावना बढ़ा सकता है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार मिलने वाले लाइक्स, नोटिफिकेशन और नया कंटेंट मस्तिष्क में डोपामिन रिलीज करते हैं, जिससे बार-बार ऐप खोलने की आदत मजबूत होती है।
बच्चों की सुरक्षा-स्वास्थ्य को लेकर और कड़े नियम आ सकते हैं
यह फैसला दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका के 40 से अधिक राज्यों में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ इसी तरह के मामले पहले से चल रहे हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह फैसला बरकरार रहता है, तो भविष्य में सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर और कड़े नियम लागू किए जा सकते हैं।
सोशल मीडिया युवाओं की मानसिक सेहत पर ऐसे असर डाल रहा
- डिप्रेशन और एंग्जायटी का खतरा: जो किशोर रोजाना 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं, उनमें अवसाद और चिंता के लक्षण दिखने की आशंका लगभग दोगुनी पाई गई है।
- नींद प्रभावित: देर रात तक मोबाइल चलाने और लगातार नोटिफिकेशन आने से नींद पूरी नहीं हो पाती है। इससे पढ़ाई, याददाश्त और एकाग्रता पर असर पड़ता है।
- लाइक्स और फॉलोअर्स का दबाव: दूसरों से तुलना, कम लाइक्स मिलने या ऑनलाइन स्वीकार्यता की चाह आत्मविश्वास घटा सकती है और तनाव बढ़ा सकती है।
- लत लगने का खतरा: एल्गोरिदम लगातार नया कंटेंट दिखाते हैं, जिससे बार-बार ऐप खोलने की आदत बन जाती है और स्क्रीन टाइम बढ़ता जाता है।
- आपत्तिजनक कंटेंट: ऑनलाइन बदसलूकी, ट्रोलिंग या हानिकारक सामग्री का सामना करने से मानसिक तनाव और अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है।
लेकिन… सोशल मीडिया पूरी तरह नुकसानदायक नहीं है। सही और सीमित उपयोग से सीखने, जानकारी पाने और दोस्तों-परिवार से जुड़े रहने जैसे फायदे भी मिलते हैं।

