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हैदराबाद: थाली में ज़हर! जीरा-लौंग भी नकली, 247 क्विंटल मिलावटी मसाले जब्त, तीन गिरफ्तार
क्या आपके रसोईघर में इस्तेमाल होने वाले मसाले पूरी तरह सुरक्षित हैं? क्या आपके रोज़ाना के भोजन में इस्तेमाल होने वाले जीरा, अजवाइन, लौंग, सौंफ और सरसों पूरी तरह शुद्ध हैं? हैदराबाद में खाद्य मिलावट को लेकर हुए एक बड़े खुलासे ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है। पुलिस और फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें रोज़मर्रा के खाद्य पदार्थों में खतरनाक रसायन और मिलावटी पदार्थ मिलाकर उन्हें बाज़ार में बिक्री के लिए तैयार किया जा रहा था।
हैदराबाद पुलिस की H-FAST यानी हैदराबाद फूड एडल्टरेशन सर्विलांस टीम और GHMC फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 13 मसाला उत्पादन और प्रोसेसिंग यूनिट पर छापे मारे थे। इस कार्रवाई के दौरान 25.3 टन मिलावटी मसाले जब्त किए गए थे। तीन FIR दर्ज की गई हैं और तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच के दौरान अधिकारियों द्वारा एकत्र की गई जानकारी सभी को चौंका देने वाली थी। अधिकारियों के अनुसार, लोगों के रसोईघर तक पहुंचने वाले मसालों में कपड़ों के रंग, औद्योगिक रसायन, कृत्रिम खाद्य रंग, टैल्कम पाउडर और चावल की भूसी का तेल जैसे पदार्थ मिलाए जा रहे थे। यह मसालों को चमकदार और भारी दिखाने के लिए किया जा रहा था, ताकि मुनाफा अधिकतम हो।
जांच में सामने आया है कि जीरा, अजवाइन, लौंग, शाही जीरा, सौंफ और सरसों के बीज जैसे रोज़मर्रा के मसालों में भी इसी तरह की मिलावट की जा रही थी। अधिकारियों ने बताया कि हल्के और रिजेक्ट किए गए सरसों के स्टॉक में रसायन मिलाकर उसे बाज़ार में फिर से बेचने की योजना थी। वहीं, लौंग और शाही जीरे को उच्च गुणवत्ता वाला दिखाने के लिए कृत्रिम रंगों से कोट किया जा रहा था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह एक दिन की कार्रवाई नहीं थी। H-FAST ने पिछले 140 दिनों में लगातार अभियान चलाया। इस अवधि के दौरान कुल 659 छापे मारे गए थे। इस कार्रवाई के दौरान 202 FIR दर्ज की गई थीं, और 247 टन से अधिक मिलावटी और असुरक्षित खाद्य उत्पाद जब्त किए गए थे। जब्त की गई वस्तुओं की सूची बेहद चिंताजनक है। कार्रवाई के दौरान 27 टन से अधिक सड़ी हुई अदरक और लहसुन की पेस्ट जब्त की गई थी; अधिकारियों के अनुसार इन उत्पादों में टाइटेनियम डाइऑक्साइड और एसिटिक एसिड का उपयोग किया गया था। इसी तरह, 12 टन से अधिक खराब चिकन और मटन जब्त किया गया था। इसके अलावा, अधिकारियों ने लगभग 60 टन चिकन कचरा जब्त किया था जिसे होटलों को सप्लाई करने के लिए संग्रहित किया जा रहा था।
इस कार्रवाई के दौरान 25.8 टन फल भी मिले थे। जिन्हें रसायनों का उपयोग करके पकाया गया था। इसके अलावा 9.2 टन मिलावटी अचार और 3.8 टन मिलावटी चाय की पत्तियां जब्त की गई थीं। जांच में पता चला था कि यूरिया, डिटर्जेंट और पाम तेल का उपयोग करके सिंथेटिक पनीर बनाया जा रहा था। इसके साथ ही मिलावटी दही, घी और क्रीम भी जब्त की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, ये खाद्य उत्पाद बाज़ार में बिक्री के लिए तैयार किए जा रहे थे। छापों के दौरान जांच की गई कई फैक्ट्रियों की स्थिति भयावह पाई गई थी; अधिकारियों ने बताया कि मक्खियों, तिलचट्टों और गंदी नालियों के बीच खाद्य पदार्थ बनाए जा रहे थे। ऐसी अस्वच्छ परिस्थितियों में तैयार की गई सामग्री सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए सीधा खतरा बन सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अधिकारियों का कहना है कि, लंबे समय तक ऐसे मिलावटी भोजन का सेवन गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। उनके अनुसार कैंसर, लीवर और किडनी को नुकसान, पेट की गंभीर बीमारियां, एलर्जी, त्वचा रोग और तंत्रिका तंत्र पर लंबे समय तक असर पड़ता है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल भोजन में मिलावट का खुलासा नहीं है; बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि अधिक मुनाफा कमाने के लिए लोगों के स्वास्थ्य के साथ किस हद तक खिलवाड़ किया जा रहा है। यही कारण है कि, H-FAST और GHMC लगातार निगरानी और छापेमारी कर रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे केवल लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही खाद्य सामग्री खरीदें। साथ ही यदि, किसी खाद्य उत्पाद को लेकर कोई संदेह हो, तो तुरंत इसकी जानकारी H-FAST या पुलिस को दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके और मिलावटी खाद्य उत्पादों को आम जनता तक पहुंचने से रोका जा सके।

