11 दिनों से जल रहा है खजोद डंपिंग साइट, लोगों का दम घुट रहा, जहरीले धुएं से बच्चों-बुजुर्गों का स्वास्थ्य बिगड़ा, जिम्मेवार कौन?

लोगों का घरों से बाहर निकलना हुआ मुश्किल, बच्चे-बुजुर्ग को पहनना पड़ रहा मास्क

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सूरत। सूरत के कुछ इलाके इन दिनों प्रदूषण और जहरीले धुएं की मार झेल रहे हैं। बड़े तो इस धुएं से परेशान हैं ही, बच्चे और बुजुर्गों की सेहत चिंताजनक बनी हुई है। लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। लोग बच्चों को बाहर खेलने भेजने से परहेज कर कर रहे हैं। अगर निकल भी रहे हैं तो मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बात हो रही है खजोद डंपिंग साइट के आसपास रहने वाले लोगों की। यहां 11 दिनों से कचरे के ढेर में आग लगी हुई है। इसको बुझाने की सारी कोशिश फिलहाल नाकाम होती नजर आ रही हैं। इस कचरे में लगी आग अब लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट बन गई है। आसपास की कई सोसायटी के लोग धुएं और दुर्गंध से इतने परेशान हो चुके हैं कि उन्होंने साफ चेतावनी दे दी है कि पहले इस समस्या का समाधान किया जाए, उसके बाद ही वोट मांगे जाएं।

खजोद के आसपास रहने वाले लोगों की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि लोगों को अपने ही घरों में मास्क पहनकर रहना पड़ रहा है। आगम हाइट्स सोसायटी के निवासी ने बताया कि उन्हें सांस लेने में काफी दिक्कत हो रही है। पिछले 10 दिनों से लगातार धुआं फैल रहा है, जिससे खिड़कियां खोलना तो दूर, बाहर निकलना भी जोखिम भरा हो गया है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के कारण रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह प्रभावित हो गई है।

चुनाव के बीच लोग में भारी नाराजगी

चुनाव के माहौल के बीच स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आगम हाइट्स के निवासियों ने एकजुट होकर निर्णय लिया है कि जब तक आग और धुएं की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता, वे चुनाव का बहिष्कार करेंगे। उनका कहना है कि अब तक कोई भी कॉर्पोरेटर उनकी समस्या सुनने तक नहीं आया है। यदि जनप्रतिनिधियों को उनकी परेशानियों की चिंता नहीं है, तो वे भी वोट देने के लिए बाध्य नहीं हैं। इस एक सोसायटी में ही करीब 550 फ्लैट हैं और लगभग 2000 मतदाता हैं, जिससे चुनाव पर असर पड़ने की पूरी संभावना है।

लोगों की मांग- पूरे मामले की तत्काल जांच हो

स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि इस डम्पिंग साइट पर हर 15-20 दिनों में आग लगती है, जिससे संदेह होता है कि कहीं यह जानबूझकर तो नहीं किया जा रहा। कचरे के निपटान के लिए करोड़ों रुपये के ठेके दिए जाते हैं, फिर भी कचरा जलाने की नौबत क्यों आती है? लोगों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की तत्काल जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

लोग बोल रहे हैं- क्या स्मार्ट सिटी की यही पहचान है

स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग इसे मिनी लॉकडाउन जैसा बता रहे हैं। सर्फ्लावर 1-A सोसायटी के प्रेसीडेंट तजिंदरभाई ने कहा कि बच्चे नीचे खेल नहीं पा रहे हैं और बुजुर्गों को घबराहट की समस्या हो रही है। बाहर निकलते समय लोगों को नाक पर कपड़ा बांधना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही स्मार्ट सिटी की पहचान है? लगातार धुएं और दुर्गंध के कारण लोगों का स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है।

धुएं की वजह से बीमारियों का खतरा बढ़ गया है

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह समस्या अब केवल असुविधा नहीं रही, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य आपात स्थिति बन चुकी है। बच्चों को सांस लेने में कठिनाई हो रही है और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। घरों की खिड़कियां बंद रखनी पड़ रही हैं, जिससे लोग घुटन महसूस कर रहे हैं। बाहर निकलने पर भी बदबू इतनी ज्यादा होती है कि लोगों को नाक ढंकनी पड़ती है।

स्थानीय लोग बोले- समाधान नहीं निकला तो करेंगे आंदोलन

लोगों ने यह भी कहा कि स्वच्छता के नाम पर अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन यदि प्रशासन खुद ही व्यवस्था बनाए रखने में असफल रहता है, तो आम नागरिकों से क्या उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं। यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो वे शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करेंगे और कानूनी कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

खजोद के आसपास रहने वाले करीब 3000 लोग इससे प्रभावित हैं

खजोद और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले करीब 3000 से अधिक परिवार इस समस्या से प्रभावित हैं। सभी का एक ही कहना है कि अब उनकी सहनशक्ति खत्म हो चुकी है। वे चाहते हैं कि युद्ध स्तर पर आग को बुझाया जाए और कचरे के निपटान के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं। अन्यथा, आने वाले दिनों में यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बन सकता है और चुनाव पर भी इसका सीधा असर देखने को मिलेगा।

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