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- साहब, मैं जिंदा हूं...!’ पति ने ही खोली पत्नी की पोल, वो विधवा पेंशन ले रही थी
साहब, मैं जिंदा हूं...!’ पति ने ही खोली पत्नी की पोल, वो विधवा पेंशन ले रही थी
मध्य प्रदेश के सिंगरौली से एक चौंकाने वाली कहानी सामने आई है जो सिस्टम की पोल खोलती है। कागज़ों में एक आदमी को मरा हुआ बताया गया है, लेकिन असल में वही आदमी हाथ में तख्ती लेकर सरकारी दफ़्तरों के चक्कर काट रहा है। ज़िंदा पति खुद को ज़िंदा साबित करने के लिए मजबूर है, जबकि उसकी पत्नी सालों से विधवा बनकर पेंशन ले रही है।
यह मामला सिंगरौली ज़िले के जनपद पंचायत बैढ़न के करसोसा गांव का है। यहां के रहने वाले चंद्रावली पटेल सरकारी दफ़्तरों में तख्ती लेकर घूम रहे हैं, जिस पर लिखा है, ‘साहब, मैं ज़िंदा हूँ।’ उनका आरोप है कि ज़िंदा होने के बावजूद उनकी पत्नी अजोरिया पटेल ने उन्हें कागज़ों में मरा हुआ दिखाकर पियर जीरे गांव में रह रही हैं और 2014 से विधवा पेंशन ले रही हैं।
चंद्रावली पटेल ने इस गंभीर धोखाधड़ी की शिकायत कलेक्टर ऑफ़िस, SDM ऑफ़िस और पुलिस स्टेशन में की थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। मजबूर होकर अब वह सबके सामने प्लेकार्ड लेकर सिस्टम से इंसाफ मांग रही है। इसकी अजीब बात यहीं खत्म नहीं होती। जिस पत्नी पर आरोप है कि उसने अपने पति को जिंदा होते हुए भी मरा हुआ बताकर पेंशन ली है। चंद्रवल्ली कोर्ट के आदेश पर अपनी पत्नी को हर महीने 5,000 रुपये का मेंटेनेंस भी दे रहा है।
क्या है पूरा मामला?
2014 में पत्नी ने चंद्रवल्ली के खिलाफ हैरेसमेंट का केस किया था, जिसके बाद उसे जेल जाना पड़ा था। फिर 2018 में कोर्ट के आदेश पर मेंटेनेंस तय हुआ, जो वह आज तक दे रहा है। यह मामला सामने आने के बाद सिंगरौली जिला पंचायत के CEO जगदीश कुमार गोम ने बैढ़न जनपद पंचायत के CEO से जांच रिपोर्ट मांगी है। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यह साफ हो जाएगा कि इस फर्जीवाड़े में कौन-कौन से अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे, और गलत फैक्ट्स के आधार पर फायदा लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि एक ऐसे सिस्टम की है जहां सरकारी डॉक्यूमेंट्स लोगों से ज्यादा पावरफुल हो जाते हैं। सवाल सिर्फ़ झूठी पेंशन का नहीं है, बल्कि उस सिस्टम की ज़िम्मेदारी का भी है जिसने सालों तक एक ज़िंदा आदमी को कागज़ों पर मरा हुआ मान लिया। अब देखना यह है कि जांच के बाद अपराधियों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबा रहेगा।

