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डूमस आर्ट प्रोजेक्ट के लिए विशेष रूप से तैयार 70 लाख रुपये की टेस्ला ‘कला कार’ बनी आकर्षण का केंद्र
सूरत। डूमस आर्ट प्रोजेक्ट के 11वें संस्करण की शुरुआत भव्य तरीके से हो चुकी है। इस बार की थीम है ‘द फ्यूचर इज नाउ’। इसमें सूरत की 70 लाख रुपये की टेस्ला कार खास आकर्षण का केंद्र है। टेस्ला के साथ विशेष सहयोग से खास टेस्ला ‘कला कार’ का निर्माण किया गया है। इस तरह टेस्ला ‘कला कार’ के अनावरण के साथ उत्सव का शुभारंभ किया। शहर में ब्रांड की इस तरह से पहली सार्वजनिक प्रस्तुति के रूप में पेश यह सहयोग तकनीक और कला के दुर्लभ संगम को दर्शाता है। कलाकार मितल सोजित्रा ने बताया कि वे कई वर्षों से वीआर सूरत से जुड़ी हुई हैं और हर साल डूमस आर्ट प्रोजेक्ट के लिए किसी न किसी अलग थीम पर काम किया जाता है।
महाराष्ट्र से मंगाई गई है टेस्ला कार
इस वर्ष विशेष रूप से महाराष्ट्र से टेस्ला कार मंगवाई गई है। मितल सोजित्रा ने बताया कि इस कार को पेंट करने के लिए हमारे पास केवल चार दिन थे। लगभग पांच कलाकारों ने चार दिनों तक दिन-रात एक कर कार पर तकनीक और कला का समन्वय किया है। टेस्ला कार पर एक्रेलिक ऑयल पेंटिंग की गई है। बड़े पैमाने की सार्वजनिक कलाकृतियों और समुदाय-आधारित कलात्मक प्रैक्टिस के लिए प्रसिद्ध कलाकार मितल सोजित्रा द्वारा टेस्ला कला कार को जीवंत बनाया गया है।
गजरात के अलग-अलग कॉलेजों से पहुंचे हैं कलाकार छात्र
इस वर्ष डूमस आर्ट प्रोजेक्ट में सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट, मुंबई; महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा; वीर नर्मद दक्षिण गुजरात यूनिवर्सिटी और अनंत नेशनल यूनिवर्सिटी, अहमदाबाद के छात्रों द्वारा 160 से अधिक इंस्टॉलेशन, शिल्प, चित्र और फोटोग्राफ प्रस्तुत किए गए हैं। शहरभर के कलाकारों ने वीआर सूरत में बेसमेंट की दीवारों को आर्ट गैलरी में परिवर्तित करते हुए कला प्रोजेक्ट प्रदर्शित किए हैं। अब आगामी तीन सप्ताह तक यह स्थान कलात्मक प्रोग्रामिंग के एक केंद्र में परिवर्तित रहेगा। यहां इंस्टॉलेशन, फाइन आर्ट, फोटोग्राफी प्रदर्शनी, संगीत, थिएटर, वर्कशॉप, युवा कलाकारों के बीच प्रतियोगिता और एक हस्तकला बाजार का आनंद लिया जा सकेगा।
यह परियोजना आज व्यापक रूप ले चुकी है
डूमस आर्ट प्रोजेक्ट की क्यूरेटर सुमी गुप्ता ने बताया कि डूमस आर्ट प्रोजेक्ट का 11वां संस्करण सूरत का एकमात्र सार्वजनिक कला मंच है, जहां कला को सुलभ बनाने को मान्यता मिली है। शहर की एक पहल के रूप में शुरू हुई यह परियोजना आज व्यापक रूप ले चुकी है, जहां छात्र और स्थापित कलाकार, दर्शक और समुदाय रोजमर्रा के जीवन के हिस्से के रूप में कला से जुड़ते हैं।

