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रामानंद सागर की 'रामायण' में निवेश करने वाली थी डिज्नी, ललित मोदी बोले- 'अंग्रेज भगवान राम की कहानी ही नहीं समझ पाए'
1980 के दशक को याद कीजिए, जब टेलीविजन अपने शुरुआती दौर में था। उस समय भारत में आज की तरह निजी OTT प्लेटफॉर्म या स्ट्रीमिंग चैनल नहीं थे। लोग मनोरंजन के लिए मुख्य रूप से दूरदर्शन पर निर्भर रहते थे। इसी दौर में रामानंद सागर की 'रामायण' और बीआर चोपड़ा की 'महाभारत' ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। ये दोनों धार्मिक धारावाहिक उस समय बेहद लोकप्रिय हुए थे और आज भी लोगों के बीच इनकी लोकप्रियता बरकरार है।
हाल ही में एक इंटरव्यू में ललित मोदी ने रामानंद सागर की 'रामायण' से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि रामानंद सागर ने अपने प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक मदद मांगी थी। उस समय ललित मोदी की डिज्नी के साथ साझेदारी थी, इसलिए उन्होंने कंपनी के सामने इस धारावाहिक में निवेश करने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, ललित मोदी के मुताबिक, डिज्नी के वरिष्ठ अधिकारी रामानंद सागर के व्यक्तित्व और उनके पहनावे से प्रभावित नहीं हुए और उन्होंने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया।
एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में ललित मोदी ने बताया कि उन्होंने डिज्नी के साथ मिलकर भारतीय टेलीविजन पर उसकी सामग्री लाने की कोशिश की थी। उनका उद्देश्य मार्केटिंग, वितरण और प्रोडक्शन को एक साथ जोड़कर देश में एक मजबूत व्यवस्था तैयार करना था, ताकि विदेशी कार्यक्रमों को भारतीय दर्शकों तक आसानी से पहुंचाया जा सके।
ललित मोदी ने बताया कि रामानंद सागर और बीआर चोपड़ा, दोनों ने उनसे संपर्क किया था और अपने-अपने प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग मांगी थी। वह इन प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए तैयार भी थे। उनके पास डिज्नी के जरिए कार्यक्रमों की मार्केटिंग, प्रोडक्शन और दुनियाभर में प्रसारण के अधिकारों के वितरण का एक मजबूत नेटवर्क था।
उन्होंने कहा, 'रामानंद सागर और बीआर चोपड़ा, दोनों मेरे पास आए और उन्होंने अपने प्रोजेक्ट के लिए फंडिंग मांगी। मैं इसके लिए तैयार था। मेरे पास डिज्नी के जरिए मार्केटिंग, प्रोडक्शन और दुनिया भर में सिंडिकेशन की एकीकृत व्यवस्था थी। लेकिन वॉल्ट डिज्नी कंपनी में मेरा एक पार्टनर था। मैंने उससे कहा कि हमें प्रोडक्शन के कारोबार में उतरना चाहिए और रामानंद सागर के साथ मिलकर इस धारावाहिक का निर्माण करना चाहिए। उसने कहा कि हमें अपने कार्यक्रम बेचने होंगे और यह हितों के टकराव का मामला होगा। इसके बावजूद मैं अपनी बात पर अड़ा रहा।'
ललित मोदी ने बताया कि उन्होंने अपने पार्टनर को इस प्रोजेक्ट के लिए मनाने की पूरी कोशिश की, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। आखिरकार, डिज्नी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
ललित मोदी के मुताबिक, उन्होंने डिज्नी के वरिष्ठ अधिकारियों को समझाने की कोशिश की कि रामानंद सागर की एक करोड़ रुपये की मांग पूरी कर देनी चाहिए, क्योंकि इसके बदले कंपनी को धारावाहिक के अधिकार मिल सकते थे। बाद में यह शो भारत के सबसे सफल टेलीविजन कार्यक्रमों में शामिल हुआ।
काफी समझाने के बाद डिज्नी के अधिकारी इस प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए तैयार हुए और बैठक के लिए भारत आए। उस मुलाकात को याद करते हुए ललित मोदी ने बताया कि रामानंद सागर शॉर्ट्स पहनकर बैठक में पहुंचे थे। जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके पहनावे को लेकर कोई समस्या हुई थी, तो उन्होंने कहा कि उस समय डिज्नी में ड्रेस को लेकर काफी सख्त नियम थे।
इस बैठक के बारे में बताते हुए ललित मोदी ने कहा कि रामानंद सागर को अंग्रेजी भाषा समझने में भी कुछ परेशानी हो रही थी। उन्होंने कहा, 'उन्हें अंग्रेजी में भी कुछ दिक्कत थी। उन्होंने डिज्नी के अधिकारियों की बातें सुनीं, लेकिन उन्हें पूरी तरह समझ नहीं पाए। इस वजह से वह उन पर अपनी छाप नहीं छोड़ सके। उस समय डिज्नी के अधिकारी बेहद पेशेवर और आधुनिक प्रस्तुतियों के आदी थे। वे किसी प्रोजेक्ट की प्रस्तुति देखकर फैसला लेना चाहते थे। मैंने डिज्नी के चेयरमैन को बैठक से बाहर जाने के लिए तैयार होते देखा। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इस प्रोजेक्ट से क्या हासिल होगा। उनकी बात भी समझी जा सकती थी, क्योंकि उन्हें भारतीय टेलीविजन के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उस समय भारतीय टीवी पर पौराणिक कहानियां दिखाने का ऐसा चलन नहीं था। उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह धारावाहिक सफल होगा या नहीं। मैं भी उन्हें समझाने में कुछ खास नहीं कर पाया।'

