सूरत: गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर सबसे बड़ा अभियान शुरू…कपड़ा कारोबारियों ने खून से मोदी को लिखा पत्र

साधु-संत भी जुड़े इस अभियान से, बोले- गाय भारतीय संस्कृति, कृषि और सामाजिक जीवन की पहचान

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सूरत। सूरत में गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने की मांग को लेकर अभियान तेज हो गया है। खास बात यह है कि अब इसमें केवल संस्था नहीं बल्कि सूरत के कपड़ा व्यापारी इससे जुड़ रहे हैं। टेक्सटाइल मार्केट से जुड़े 10 व्यापारियों ने अपने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा देने और देश को गौहत्या से मुक्त करने की मांग की। व्यापारियों ने सीरिंज के जरिए अपना खून निकालकर बड़े कार्ड पेपर पर यह पत्र तैयार किया।

व्यापारियों का कहना है कि गाय केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि और सामाजिक जीवन की पहचान है। इसी भावना के साथ ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ चलाया जा रहा है, जिसे अब शहर में व्यापक जनसमर्थन मिलने लगा है। सूरत में कई ऐसे कपड़ा कारोबारी हैं जो सुबह-सुबह उठकर पहले दो घंटे गायों की सेवा करते हैं। अपने अपने बच्चे के जैसा दुलार करते हैं। गौशाला में जाकर गायों के लिए भोजन तैयार करत हैं और साफ-सफाई करते हैं। सेवा-भाव के इस काम में केवल एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों व्यापारी जुड़े हुए हैं और सालभर गायों की सेवा करते हैं। अपने व्यस्त कामकाज से कुछ वक्त गायों की सेवा के लिए जरूर निकालते हैं।

केंद्र में ‘गौ संवर्धन मंत्रालय’ बनाने की मांग

व्यापारियों ने अपने

पत्र में केंद्र सरकार से एक अलग ‘गौ संवर्धन मंत्रालय’ गठित करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि देश में गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और सुरक्षा के लिए अलग मंत्रालय बनाया जाना चाहिए ताकि गौहत्या पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और गौशालाओं के संचालन को व्यवस्थित किया जा सके। 

केंद्र सरकार को गौसंरक्षण के लिए विशेष कानून बनाना चाहिए

अभियान से जुड़े व्यापारियों का मानना है कि यदि देश सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की दिशा में आगे बढ़ रहा है तो गाय को ‘राष्ट्रमाता’ का सम्मान मिलना चाहिए। व्यापारियों ने यह भी कहा कि गौवंश को कानूनी रूप से सर्वोच्च संरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार को विशेष कानून बनाना चाहिए।

5 लाख लोगों के हस्ताक्षर जुटाने का दावा

गौ सम्मान अभियान से जुड़े लोगों का दावा है कि अब तक करीब पांच लाख लोगों के हस्ताक्षर इस मुहिम के समर्थन में जुटाए जा चुके हैं। इन हस्ताक्षरों के साथ तैयार ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंचाने की तैयारी की गई है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि सूरत की यह पहल केवल स्थानीय अभियान नहीं, बल्कि देशभर के गौभक्तों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करती है। उनका दावा है कि बड़ी संख्या में आम लोग भी इस मांग से सहमत हैं और गाय को राष्ट्रीय सम्मान दिए जाने के पक्ष में हैं।

बैलगाड़ियों और बुलडोजर के साथ निकली रैली

अठवागेट स्थित वनिता विश्राम ग्राउंड से जिला कलेक्टर कार्यालय तक विशाल रैली निकाली गई। रैली में 8 से 10 बैलगाड़ियां शामिल की गईं, जिन्हें गौभक्ति का प्रतीक बताया गया। इसके साथ ही बुलडोजर भी रैली का हिस्सा बना, जिसे आयोजकों ने गौहत्या करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के प्रतीक के रूप मंस प्रस्तुत किया। रैली में बड़ी संख्या में गौभक्त, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और साधु-संत शामिल हुए। भगवा वस्त्रधारी संतों की मौजूदगी से रैली का माहौल धार्मिक और उत्साहपूर्ण दिखाई दिया। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए रैली में गौरक्षा और गौ सम्मान के नारे लगाए गए।

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संतों ने कहा- यह अब संकल्प का विषय

रैली में शामिल संतों और महंतों ने कहा कि गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करना अब केवल मांग नहीं बल्कि गौभक्तों का संकल्प बन चुका है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है और सरकार को इसे संवैधानिक पहचान देनी चाहिए। वहीं, व्यापारी ललित शर्मा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को जन्म देना नहीं, बल्कि गाय को सम्मान दिलाना है। उन्होंने कहा कि गाय भारतीय समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी रही है, इसलिए उसे राष्ट्र की धरोहर घोषित किया जाना चाहिए।

 सोशल मीडिया पर भी अभियान को मिल रहा समर्थन

सूरत का यह अभियान अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। रक्त से लिखे गए पत्रों और बुलडोजर-बैलगाड़ियों वाली रैली के वीडियो और तस्वीरें विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जा रही हैं। अभियान से जुड़े लोग इसे जनआंदोलन का रूप देने की बात कह रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित करना है ताकि गौवंश संरक्षण को लेकर ठोस राष्ट्रीय नीति बनाई जा सके।

देश के अन्य हिस्सों में भी चल चुके हैं ऐसे अभियान

देश के कई राज्यों में समय-समय पर गाय को ‘राष्ट्रमाता’ या ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की मांग उठती रही है। उत्तराखंड में वर्ष 2018 में विधानसभा में गाय को ‘राष्ट्रमाता’ घोषित करने से जुड़ा प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2024 में गाय को ‘राज्यमाता’ घोषित करने का आदेश जारी किया था। हाल के महीनों में झारखंड समेत कई राज्यों में ‘गो सम्मान अभियान’ के तहत ज्ञापन और हस्ताक्षर अभियान भी चलाए गए हैं।

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