टेलीग्राम पायरेटेड कंटेंट का बड़ा प्लेटफॉर्म...रिलीज होते ही फिल्में, कुछ घंटों में ही वेब सीरीज उपलब्ध हो जाते हैं; ये कैसे बंद होंगे?

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नई दिल्ली। फिल्मों और वेब सीरीज की ऑनलाइन पायरेसी पर केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। दरअसल, सरकार को लंबे समय से टेलीग्राम पर नए रिलीज होने वाले फिल्मों, OTT शो और दूसरे कॉपीराइटेड ऑडियो-विजुअल कंटेंट के पायरेटेड वर्जन बड़े पैमाने पर शेयर किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं। अब सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह केवल शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित न रहे, बल्कि अपने सिस्टम को इस तरह मजबूत बनाए कि पायरेटेड कंटेंट की पहचान कर उसे स्वत: हटाया जा सके। मंत्रालय ने कंपनी से 15 दिनों के भीतर उठाए गए कदमों की विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) भी मांगी है।

सरकार ने शनिवार को टेलीग्राम को जारी नोटिस में कहा कि प्लेटफॉर्म पर फिल्मों, OTT कंटेंट और अन्य कॉपीराइटेड ऑडियो-विजुअल सामग्री की अवैध शेयरिंग को रोकने के लिए मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह पायरेटेड कंटेंट की पहचान, रिपोर्टिंग, ब्लॉकिंग और हटाने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि बार-बार नियम तोड़ने वाले चैनल, ग्रुप, बॉट, अकाउंट, एडमिनिस्ट्रेटर और उनसे जुड़े नेटवर्क के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। 

सरकार टेलीग्राम से पायरेसी मामले में क्या चाहती है?

सूत्रों के मुताबिक सरकार ने टेलीग्राम से साफ कहा है कि कार्रवाई के लिए केवल शिकायतों का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है। यदि प्लेटफॉर्म पर लगातार पायरेटेड सामग्री उपलब्ध रहती है तो यह सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत अपेक्षित 'ड्यू डिलिजेंस' यानी जरूरी सावधानी के दायित्व को पूरा नहीं करता। सरकार चाहती है कि कंपनी ऐसी तकनीकी व्यवस्था विकसित करे, जिससे कॉपीराइट उल्लंघन करने वाले कंटेंट को तेजी से चिन्हित कर हटाया जा सके और दोबारा अपलोड होने से भी रोका जा सके। 

निर्माताओं, वितरकों और OTT कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा था

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब फिल्म निर्माता, OTT प्लेटफॉर्म और प्रसारण कंपनियां लगातार डिजिटल पायरेसी से होने वाले आर्थिक नुकसान को लेकर चिंता जता रही हैं। नई रिलीज फिल्में और वेब सीरीज कई बार रिलीज के कुछ घंटों के भीतर ही टेलीग्राम के सार्वजनिक चैनलों और ग्रुप्स में उपलब्ध हो जाती हैं। इससे कंटेंट निर्माताओं, निर्माताओं, वितरकों और OTT कंपनियों को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ता है। इसी वजह से सरकार अब केवल अलग-अलग चैनल हटाने के बजाय पूरे प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। 

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सरकार ने क्या कदम उठाए- 3000 से अधिक टेलीग्राम चैनलों पर कार्रवाई

सरकार ने यह भी याद दिलाया है कि इससे पहले पायरेटेड कंटेंट प्रसारित करने वाले 3000 से अधिक टेलीग्राम चैनलों पर कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद यदि नियमों का लगातार उल्लंघन होता है तो आगे भी ऐसे चैनलों, ग्रुप्स और उनसे जुड़े अकाउंट्स पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही सख्त बना रही 

दरअसल, सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को सख्त बनाने का प्रयास कर रही है। टेलीग्राम को यह नोटिस तीन दिनों के भीतर दूसरी बार मिला है। इससे पहले 2 जुलाई को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी को नोटिस भेजकर उसके यूजरनेम फीचर और यूजर्स की प्राइवेसी से जुड़े कई सवालों पर जवाब मांगा था। लगातार दो मंत्रालयों की ओर से भेजे गए नोटिस यह संकेत देते हैं कि सरकार अब बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर अधिक सख्त रुख अपना रही है। 

नीट एग्जाम के दौरान भी टेलीग्राम पर सरकार ने दिखाई थी सख्ती

इससे पहले जून में भी टेलीग्राम सरकार के निशाने पर आया था। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर पेपर लीक मामले के बाद सरकार ने 16 जून से 22 जून तक टेलीग्राम पर बैन लगाया था। इसके अलावा 21 जून को आयोजित NEET 2026 की दोबारा परीक्षा को देखते हुए सरकार ने टेलीग्राम को 30 जून तक अपना 'मैसेज-एडिटिंग' फीचर बंद रखने का भी निर्देश दिया था। अब पायरेटेड फिल्मों और OTT कंटेंट के प्रसार को लेकर जारी ताजा नोटिस के साथ टेलीग्राम पर सरकारी निगरानी और सख्त हो गई है।

आइए जानते हैं कि सरकार पायरेटेड कंटेंट पर सख्ती क्यों कर रही है?

  • फिल्म और OTT इंडस्ट्री को करोड़ों रुपये का नुकसान: नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज होने के कुछ घंटों के भीतर पायरेटेड रूप में टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाती हैं, जिससे बॉक्स ऑफिस और OTT व्यूअरशिप दोनों प्रभावित होते हैं।
  • कॉपीराइट कानून का उल्लंघन: बिना अनुमति फिल्मों, वेब सीरीज और दूसरे ऑडियो-विजुअल कंटेंट को शेयर करना भारतीय कॉपीराइट कानून का उल्लंघन है। सरकार ऐसे मामलों में डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी भी तय करना चाहती है।
  • आईटी नियमों का पालन सुनिश्चित करना: सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म केवल शिकायत मिलने का इंतजार न करें, बल्कि खुद भी अवैध कंटेंट की पहचान कर उसे हटाने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करें।
  • बार-बार बनने वाले पायरेसी नेटवर्क पर रोक: कई चैनल और ग्रुप बंद होने के बाद नए नाम से फिर सक्रिय हो जाते हैं। इसलिए सरकार पूरे नेटवर्क, एडमिन, बॉट और संबंधित अकाउंट्स पर कार्रवाई चाहती है।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही बढ़ाना: सरकार चाहती है कि बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध अवैध कंटेंट के प्रति अधिक जिम्मेदार बनें और नियमों के अनुरूप सक्रिय निगरानी रखें।

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