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गांधीनगर में पीएम आवास में रहने वाले परिवार का बिजली बिल 4.97 लाख रुपये आया
राज्य में मीटर बिल को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। कई जगहों पर लोगों को बेहद भारी-भरकम बिजली बिल थमा दिए जाते हैं, जिससे लोग परेशानी में पड़ जाते हैं। ऐसी ही एक घटना गांधीनगर से सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, गांधीनगर में उत्तर गुजरात बिजली कंपनी लिमिटेड (UGVCL) ने 3 जुलाई को न्यू वावोल क्षेत्र में स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गुडा आवास में रहने वाले एक सामान्य लाभार्थी को अचानक ₹4,97,420.38 का भारी-भरकम बिजली बिल भेज दिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। महीने के अंत में हाथ में आया यह बिल देखकर परिवार के होश उड़ गए।
पीड़ित लाभार्थी रणजीत ठाकुर ने बताया कि उनके घर में अन्य मध्यमवर्गीय परिवारों की तरह ही बिजली का उपयोग होता है। हर महीने सामान्य बिल आता था, लेकिन इस बार हाथ में आया बिल देखकर परिवार के होश उड़ गए। बिजली कंपनी द्वारा भेजे गए इस आसमानी बिल की राशि देखकर परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट गया है। घर की आर्थिक स्थिति सामान्य होने पर इतनी बड़ी रकम कहाँ से भरें, यही सवाल उन्हें परेशान कर रहा है।
इस मामले में स्थानीय निवासियों में भी भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। उनका मानना है कि यह कोई तकनीकी खराबी या मीटर रीडिंग में हुई गंभीर गलती हो सकती है। किसी सामान्य घरेलू मीटर में इतना अधिक बिजली उपभोग संभव ही नहीं है। आवास योजना के तहत रहने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सरकार सुविधाएँ उपलब्ध कराती है, लेकिन बिजली कंपनी की इस तरह की लापरवाही उन्हें और अधिक मुश्किल में डाल रही है। स्थानीय लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब लोगों को इस तरह परेशान करना उचित नहीं है। बिजली कंपनी ने ग्राहकों की स्थिति समझने के बजाय सीधे इतना बड़ा बिल भेज दिया, जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
पीड़ित लाभार्थी ने इस संबंध में तत्काल प्रभाव से UGVCL के कार्यालय में लिखित आवेदन देकर बिल की दोबारा जांच करने की मांग की है। परिवार की मांग है कि गलत तरीके से भेजे गए इस बिल को तुरंत रद्द कर उचित संशोधन किया जाए।
इस बारे में पीड़ित रणजीतभाई ने कहा कि पहले वे निजी नौकरी करते थे, लेकिन स्वास्थ्य खराब रहने के कारण फिलहाल नौकरी नहीं कर रहे हैं। बिल के संबंध में बिजली कंपनी को आवेदन देने पर कंपनी ने बिल में संशोधन कर दिया है। अब उनका बिल ₹4,824 आया है, जबकि पहले यह लगभग पाँच लाख रुपये था। कंपनी का कहना है कि यह तकनीकी गलती के कारण हुआ था। राज्य में मीटर बिल को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। कई जगहों पर लोगों को बेहद भारी-भरकम बिजली बिल थमा दिए जाते हैं, जिससे लोग परेशानी में पड़ जाते हैं। ऐसी ही एक घटना गांधीनगर से सामने आई है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, गांधीनगर में उत्तर गुजरात बिजली कंपनी लिमिटेड (UGVCL) ने 3 जुलाई को न्यू वावोल क्षेत्र में स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गुडा आवास में रहने वाले एक सामान्य लाभार्थी को अचानक ₹4,97,420.38 का भारी-भरकम बिजली बिल भेज दिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। महीने के अंत में हाथ में आया यह बिल देखकर परिवार के होश उड़ गए।
पीड़ित लाभार्थी रणजीत ठाकुर ने बताया कि उनके घर में अन्य मध्यमवर्गीय परिवारों की तरह ही बिजली का उपयोग होता है। हर महीने सामान्य बिल आता था, लेकिन इस बार हाथ में आया बिल देखकर परिवार के होश उड़ गए। बिजली कंपनी द्वारा भेजे गए इस आसमानी बिल की राशि देखकर परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट गया है। घर की आर्थिक स्थिति सामान्य होने पर इतनी बड़ी रकम कहाँ से भरें, यही सवाल उन्हें परेशान कर रहा है।
इस मामले में स्थानीय निवासियों में भी भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। उनका मानना है कि यह कोई तकनीकी खराबी या मीटर रीडिंग में हुई गंभीर गलती हो सकती है। किसी सामान्य घरेलू मीटर में इतना अधिक बिजली उपभोग संभव ही नहीं है। आवास योजना के तहत रहने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए सरकार सुविधाएँ उपलब्ध कराती है, लेकिन बिजली कंपनी की इस तरह की लापरवाही उन्हें और अधिक मुश्किल में डाल रही है। स्थानीय लोगों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब लोगों को इस तरह परेशान करना उचित नहीं है। बिजली कंपनी ने ग्राहकों की स्थिति समझने के बजाय सीधे इतना बड़ा बिल भेज दिया, जिससे अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
पीड़ित लाभार्थी ने इस संबंध में तत्काल प्रभाव से UGVCL के कार्यालय में लिखित आवेदन देकर बिल की दोबारा जांच करने की मांग की है। परिवार की मांग है कि गलत तरीके से भेजे गए इस बिल को तुरंत रद्द कर उचित संशोधन किया जाए।
इस बारे में पीड़ित रणजीतभाई ने कहा कि पहले वे निजी नौकरी करते थे, लेकिन स्वास्थ्य खराब रहने के कारण फिलहाल नौकरी नहीं कर रहे हैं। बिल के संबंध में बिजली कंपनी को आवेदन देने पर कंपनी ने बिल में संशोधन कर दिया है। अब उनका बिल ₹4,824 आया है, जबकि पहले यह लगभग पाँच लाख रुपये था। कंपनी का कहना है कि यह तकनीकी गलती के कारण हुआ था।

