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ISRO के सैटेलाइट ने दिखाई मानसून की नई तस्वीर, कई राज्यों में भारी बारिश के संकेत
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अत्याधुनिक मौसम उपग्रह INSAT-3DS ने अंतरिक्ष से मानसून की ताजा तस्वीरें भेजी हैं। इन तस्वीरों में भारत के पश्चिमी और मध्य हिस्सों के ऊपर घने वर्षा वाले बादलों का विशाल समूह साफ दिखाई दे रहा है। सैटेलाइट से मिली यह जानकारी इस बात का संकेत दे रही है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और आने वाले दिनों में कई राज्यों में तेज से लेकर बहुत भारी बारिश देखने को मिल सकती है।
सैटेलाइट इमेज में खास तौर पर गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के ऊपर बड़े पैमाने पर बादलों का घना जमावड़ा दिखाई दिया है। इसके अलावा आसपास के कई इलाकों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ती नजर आ रही हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से लगातार मिल रही नमी तथा सक्रिय मौसमी सिस्टम की वजह से मानसून को नई ताकत मिली है। यही कारण है कि देश के कई हिस्सों में बारिश का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने भी अगले कुछ दिनों के लिए कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान जताया है। विभाग के अनुसार गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत उत्तर और पश्चिम भारत के कई क्षेत्रों में तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ मौसम बिगड़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव, स्थानीय बाढ़ और यातायात प्रभावित होने जैसी स्थितियां भी पैदा हो सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने और जरूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जून महीने में देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई थी, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई पर असर पड़ा। हालांकि जुलाई की शुरुआत में मानसून के दोबारा सक्रिय होने से किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अच्छी बारिश से खेतों में नमी बढ़ेगी, जलाशयों का जलस्तर सुधरेगा और खेती-किसानी के काम में तेजी आएगी।
ISRO का INSAT-3DS उपग्रह मौसम की निगरानी, बादलों की गतिविधियों, वर्षा, तापमान और वातावरण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां लगातार जुटाता है। यही डेटा मौसम विभाग को सटीक पूर्वानुमान जारी करने में मदद करता है। अंतरिक्ष से प्राप्त इन ताजा तस्वीरों ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मानसून का सिस्टम मजबूत हो रहा है और बारिश वाले बादलों का फैलाव लगातार बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई का पहला पखवाड़ा मानसून के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। यदि मौजूदा स्थिति इसी तरह बनी रहती है, तो जून में हुई बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। इससे न केवल कृषि क्षेत्र को फायदा होगा, बल्कि कई जलाशयों और बांधों में भी जलस्तर बढ़ने की संभावना है

