राजा रघुवंशी केस: पति को खाई में फेंकने की आरोपी सोनम को मिली जमानत, जानिए किस कानून के तहत मिली राहत

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पिछले एक हफ्ते से सबकी नजर पुणे के केतन अग्रवाल हत्या मामले और आरोपी सिया पर थी। हर कोई सिया और उसके रहस्य की कहानी में खोया हुआ था। इसी दौरान, चुपचाप मेघालय से एक ऐसी खबर आई, जिस पर किसी का ध्यान ही नहीं गया। यह खबर इंदौर की सोनम के बारे में थी, जिसकी कहानी की नकल पुणे की सिया ने की थी। सिया फिलहाल पुणे पुलिस की हिरासत में है, जबकि सोनम जमानत पर रिहा हो चुकी है।

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हत्या जैसे गंभीर अपराध में 11 महीने के भीतर आरोपी हत्यारे को जमानत मिल जाना बहुत ही दुर्लभ होता है। लेकिन यहां लोग इस बात पर विश्वास ही नहीं कर पा रहे हैं कि सोनम ने जो किया, उसके बावजूद भी उसे इतनी आसानी से और इतनी जल्दी जमानत मिल सकती है। हैरानी की बात तो यह है कि अदालत भी सोनम को निर्दोष नहीं मानती। फिर भी अदालत ने सोनम को जमानत पर क्यों रिहा किया? जब आप इसका जवाब जानेंगे तो हैरान रह जाएंगे।

शायद यह देश का पहला मामला है, जहां कानून की गलत धारा और मेघालय पुलिस की एक छोटी-सी गलती के कारण सोनम जेल से बाहर आ गई। दरअसल, मेघालय पुलिस ने हत्या के मामले में गिरफ्तारी के बाद सोनम पर नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) की जो धारा लगाई थी, वह कानून की किताबों में तो है ही नहीं, बल्कि किसी भी अदालत या पुलिस थाने के रिकॉर्ड में भी मौजूद नहीं है।

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इसका मतलब यह हुआ कि राजा रघुवंशी हत्या मामले में मेघालय पुलिस ने सोनम पर जो धारा लगाई, वह अस्तित्व में ही नहीं है। अब जब यह धारा अस्तित्व में ही नहीं है, तो अदालत को कैसे पता चलेगा कि पुलिस ने सोनम को किस अपराध में गिरफ्तार किया था? और जब पुलिस खुद ही नहीं जानती, तो वह सोनम को कैसे बताएगी कि उसे किस अपराध में गिरफ्तार किया गया है? ये शब्द मेघालय हाईकोर्ट के हैं, जिसने सोनम को जमानत दी थी। अगर आपको अभी भी पूरी कहानी समझ में नहीं आ रही है, तो आइए इसे आसान शब्दों में समझते हैं।

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पिछले साल मई महीने में राजा रघुवंशी की हत्या के बाद मेघालय पुलिस ने सोनम सहित 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें 3 सुपारी किलर थे और एक सोनम का प्रेमी था। इसके बाद मेघालय पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें सोनम को अपने ही पति की हत्या का मुख्य आरोपी बनाया गया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। सुनवाई शुरू होते ही सोनम ने शिलांग की निचली अदालत में जमानत के लिए आवेदन किया। यहीं से पूरा मामला बदल गया।

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दरअसल, 1 जुलाई 2024 से ब्रिटिश काल से चले आ रहे CrPC और IPC में बड़े बदलाव किए गए। सिर्फ उनके नाम ही नहीं बदले गए, बल्कि कई धाराएं भी हटाई गईं या उन्हें मिलाकर नई धाराएं बनाई गईं। भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू कर दी गई। इस BNS के तहत देश में होने वाले सभी अपराधों को कुल 358 धाराओं में शामिल किया गया।

BNS के तहत देश में होने वाले हर प्रकार के अपराध के लिए कुल 358 धाराएं ही हैं। अब यह साफ है कि आजादी के बाद से चली आ रही IPC की धाराओं की जगह BNS और उसकी नई धाराओं ने ले ली है। ऐसे में सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि पुलिस और कानून लागू करने वाली एजेंसियों को भी इन्हें समझने और याद रखने में दिक्कत हो रही है। उदाहरण के तौर पर पहले IPC की धारा 300 का मतलब हत्या और धारा 302 का मतलब हत्या की सजा होता था। BNS में धारा 300 की जगह धारा 101 आ गई है। अब 101 का मतलब हत्या है। जबकि BNS में 302 की जगह नई धारा 103 बनाई गई है। धारा 103 हत्या की सजा का प्रावधान बताती है।

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सोनम के मामले में गलती यह हुई कि मेघालय पुलिस ने BNS की धारा 103 की जगह धारा 403 लिख दी, जिसे हत्या की धारा बताया गया। जबकि BNS तो धारा 358 पर ही समाप्त हो जाती है, इसलिए यह साफ है कि कानून की किताब में धारा 403 का कोई अस्तित्व ही नहीं है। शिलांग की निचली अदालत ने इसी एक गलती को पकड़ लिया। अदालत ने कहा कि अगर धारा 403 अस्तित्व में ही नहीं है, तो वह कैसे जान सकती है कि सोनम को किस अपराध में गिरफ्तार किया गया था? इसका मतलब यह भी हुआ कि पुलिस ने सोनम को उसके अपराध की जानकारी भी नहीं दी होगी। इसलिए निचली अदालत ने इसी साल 27 अप्रैल को सोनम को जमानत दे दी।

स्वाभाविक रूप से, सोनम को जमानत मिलना सभी के लिए हैरानी की बात थी। मेघालय पुलिस भी चौंक गई। इसके बाद मेघालय पुलिस ने सोनम को जमानत देने के निचली अदालत के फैसले को मेघालय हाईकोर्ट में चुनौती दी। मेघालय हाईकोर्ट में लंबी बहस चली। उम्मीद की जा रही थी कि हाईकोर्ट निचली अदालत का फैसला पलट देगा और सोनम की जमानत रद्द कर देगा। लेकिन मेघालय हाईकोर्ट ने भी सभी को चौंका दिया।

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मेघालय हाईकोर्ट ने भी सोनम के मामले में BNS की उसी धारा 403 वाली गलती को पकड़ लिया, जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि BNS की धारा 403, जो अस्तित्व में ही नहीं है, वह यह स्पष्ट नहीं करती कि सोनम के खिलाफ आरोप क्या हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि गलत धारा लगाए जाने से ऐसा प्रतीत होता है कि शायद सोनम खुद भी नहीं जानती होगी, या फिर पुलिस ने भी उसे यह नहीं बताया होगा कि उसे किस अपराध के तहत गिरफ्तार किया गया है।

इसलिए निचली अदालत का फैसला सही है और सोनम जमानत पाने की हकदार है। 29 जून को मेघालय हाईकोर्ट ने इसी आधार पर सोनम की जमानत रद्द करने की मेघालय पुलिस की याचिका खारिज कर दी। अब सोचिए कि एक छोटी-सी कानूनी गलती ने सोनम को वह आजादी दे दी, जो शायद उसे वर्षों तक नहीं मिल पाती। जमानत पर रिहा होने के बाद सोनम शिलांग में रह रही है। सोनम को जमानत मिलने के बाद राजा रघुवंशी के माता-पिता भी हैरान हैं।

हालांकि, मेघालय पुलिस ने घोषणा की है कि वह अब देश की सर्वोच्च अदालत, सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी। मेघालय पुलिस ने यह भी कहा है कि उनसे धारा लिखने में गलती हुई थी और बाद में उन्होंने अदालत के सामने इस गलती को स्वीकार भी कर लिया था। लेकिन मेघालय पुलिस का मानना है कि केवल इस एक गलती के कारण सोनम को जमानत मिल जाना उचित नहीं है।

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