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अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में हर रोज हो रहे चौंकाने वाले खुलासे, आमजन भी सुनकर हैरान, अब मिला ‘रामराज्य कोष’ वाला संदूक
राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले नए खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे खेल की कड़ी एसआईटी सुलझाने में लगी हुई है। लोग भी अब जानने को इच्छुक हैं कि चढ़ावा चोरी के पीछे किन-किन लोगों का हाथ है। इस बीच जेल में बंद मुख्य आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला से जुड़े एक नए खुलासे ने जांच को नया मोड़ दिया है। पुलिस ने अयोध्या स्थित उसके योग केंद्र से एक संदूक बरामद किया है, जिस पर लाल रंग से 'रामराज्य कोष' लिखा हुआ था। संदूक पर पेटीएम का QR कोड भी चिपका मिला। इस कार्रवाई का वीडियो सामने आने के बाद हंगामा मच गया है। बताया जा रहा है कि इसी परिसर से पहले दान गबन से जुड़े करीब पांच लाख रुपये भी बरामद किए गए थे।
मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) को अब 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। वहीं, एसआईटी ने फैजाबाद जेल पहुंचकर मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों से पूछताछ की। इनमें सबसे लंबी पूछताछ अविनाश शुक्ला से हुई। करीब दो घंटे चली पूछताछ में उससे 5 जून को बरामद 20 लाख रुपये नकद और आभूषणों के संबंध में विस्तार से सवाल किए गए।
अविनाश शुक्ला प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला है। पुलिस इससे पहले उसके पैतृक घर पर भी छापेमारी कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि वह राम मंदिर के नाम पर इस्तेमाल होने वाले दान बक्से में ही कथित गबन की रकम रखता था। पुलिस ने 5 जून की शाम करीब 7:30 बजे अयोध्या में उसके किराए के मकान पर छापा मारकर 20 लाख रुपये नकद बरामद किए थे। इसी कार्रवाई में कुछ आभूषण भी मिले थे।
अविनाश शुक्ला डेढ़ साल पहले ही अयोध्या आया था
जानकारी के अनुसार, अविनाश करीब डेढ़ साल पहले अयोध्या आया था। वह अपने बड़े भाई अभिषेक शुक्ला के साथ श्याम साधनालय में रहता था। बताया जाता है कि अभिषेक ने ही उसकी राम मंदिर ट्रस्ट में नौकरी लगवाने में मदद की थी। जांच एजेंसियों का कहना है कि अविनाश मंदिर के निमित्त दान में इस्तेमाल होने वाले बक्से में कथित गबन की रकम छिपाकर रखता था। 5 जून को बरामद किए गए 20 लाख रुपये से अधिक की नकदी इसी तरह के एक दान बक्से से मिलने की बात सामने आई थी।
जांच के दायरे में अब मंदिर में तैनात 400 निजी सुरक्षाकर्मी भी
जांच का दायरा अब राम मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था तक भी पहुंच गया है। मंदिर में तैनात करीब 400 निजी सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी, रोस्टर, सीसीटीवी फुटेज और एंट्री-एग्जिट रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा जिस निजी सुरक्षा कंपनी के पास था, वह बिहार के एक पूर्व सांसद से जुड़ी बताई जा रही है। ट्रस्ट इस सुरक्षा व्यवस्था पर हर महीने लगभग एक करोड़ रुपये खर्च करता था, यानी सालाना करीब 12 करोड़ रुपये निजी सुरक्षा पर खर्च किए जा रहे थे।
पूरे मामले की रिपोर्ट अब आरएसएस प्रमुख भागवत तक पहुंची
उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को भी पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी गई है। यह रिपोर्ट पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार ने तैयार की है। बताया गया है कि संघ प्रमुख के निर्देश पर उन्होंने अयोध्या में तीन दिन तक रहकर मंदिर की व्यवस्थाओं, ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावा गबन प्रकरण का अध्ययन किया। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठक में इस रिपोर्ट के आधार पर महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
अविनाश शांत रहता था, कभी उसके व्यवहार से किसी को शक नहीं हुआ
योग केंद्र में कार्यरत शिवसुंदर लाल ने बताया कि अभिषेक शुक्ला पिछले लगभग दस वर्षों से संस्थान से जुड़ा हुआ था और गुरुजी के समय से सेवा कार्य करता था। करीब डेढ़ साल पहले उसका भाई अविनाश भी वहीं रहने आ गया था। उन्होंने कहा कि जब पता चला कि अविनाश की नौकरी राम मंदिर में लग गई है तो सभी लोग खुश थे। वह रोज समय पर ड्यूटी के लिए जाता था और शाम को लौट आता था। उसका व्यवहार सामान्य और शांत था, इसलिए किसी को उस पर कभी संदेह नहीं हुआ।
शिवसुंदर लाल ने बताया कि 5 जून को पुलिस जब योग केंद्र पहुंची और तलाशी के दौरान वहां से पैसों से भरे बैग बरामद होने की बात सामने आई तो सभी लोग हैरान रह गए। घटना सार्वजनिक होने के बाद संस्थान ने अगले ही दिन उसके परिवार से साफ कह दिया कि वे वहां से दूसरी जगह रहने की व्यवस्था कर लें। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी है, उसे कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए और संस्थान जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।
अविनाश और उसके भाई ने गांव में बनाया नया पक्का मकान
प्रतापगढ़ जिले के महेशगंज थाना क्षेत्र के बाबूपुर नारियावा गांव के रहने वाले अविनाश शुक्ला के परिवार के बारे में भी नई जानकारी सामने आई है। उसके पिता राम सजीवन शुक्ला किसान हैं। गांव वालों के अनुसार परिवार का पुराना मकान कच्चा है, जहां माता-पिता रहते हैं। हालांकि कुछ महीने पहले अविनाश और उसके भाई अभिषेक ने गांव में नया पक्का मकान बनवाया था। दोनों भाई गांव आने पर उसी नए मकान में ठहरते थे।
चंपत राय से तीन घंटे तक पूछताछ, आरएमओ का भी तबादला
इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी पुलिस लगभग तीन घंटे तक पूछताछ कर चुकी है। उनसे पूछा गया कि चढ़ावा गबन की जानकारी उन्हें पहली बार कब मिली और उसके बाद उन्होंने क्या कदम उठाए। वहीं, कोर्ट ने गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी है। जांच के दौरान एक और प्रशासनिक कार्रवाई भी हुई है। राम मंदिर में पिछले 17 वर्षों से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (RMO) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। एसआईटी उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। मंदिर परिसर में लगे करीब 1600 सीसीटीवी कैमरों और चढ़ावे की गिनती वाले काउंटिंग रूम की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी।

