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नागपुर: 'टोल वसूलने के बावजूद खराब सड़क देना 'सेवा में कमी' है...' NHAI को फटकार; कार मालिक को मिलेगा मुआवज़ा
महाराष्ट्र के नागपुर स्थित उपभोक्ता आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि टोल वसूलने के बावजूद खराब गुणवत्ता वाली सड़क उपलब्ध कराना 'सेवा में कमी' माना जाएगा। आयोग ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को निर्देश दिया है कि सड़क पर गड्ढों के कारण वाहन चालक को हुए नुकसान का मुआवज़ा दिया जाए।
नागपुर उपभोक्ता आयोग ने इस महीने की शुरुआत में जारी एक आदेश में कहा था कि टोल वसूलने के साथ सुरक्षित और चलने योग्य सड़क उपलब्ध कराना टोल वसूलने वाली कंपनी या प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। टोल वसूलने के बाद खराब सड़क उपलब्ध कराना सेवा में कमी है। आयोग ने NHAI की छिंदवाड़ा परियोजना कार्यान्वयन इकाई को शिकायतकर्ता को वाहन मरम्मत और टोल रिफंड के लिए ₹1,030 का भुगतान करने का आदेश दिया।
इसके अलावा, उपभोक्ता आयोग ने शिकायतकर्ता को हुई मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए ₹10,000 तथा मुकदमे के खर्च के लिए ₹5,000 देने का भी आदेश दिया। शिकायतकर्ता के अनुसार, वह 2 अक्टूबर, 2020 को नागपुर से मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जा रहा था और उसने निर्धारित टोल शुल्क का भुगतान किया था। यात्रा के दौरान उसकी कार एक गहरे और तेज गड्ढे से टकरा गई, जिससे स्टील व्हील रिम पूरी तरह मुड़ गई और टायर फट गया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे स्पेयर टायर के सहारे यात्रा पूरी करनी पड़ी और कार की मरम्मत कराने के लिए एक अतिरिक्त दिन रुकना पड़ा। उसने यह भी आरोप लगाया कि वापसी के दौरान टोल प्लाज़ा के कर्मचारियों ने शिकायत पुस्तिका देने से इनकार कर दिया और कहा कि संबंधित अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं। शिकायतकर्ता ने शुरुआत में NHAI को केवल वाहन मरम्मत के खर्च का मुआवज़ा मांगते हुए नोटिस भेजा था, लेकिन उसका आरोप था कि अधिकारियों ने लोगों की शिकायतों को नज़रअंदाज़ करने की अपनी आदत के चलते उसकी शिकायत पर भी ध्यान नहीं दिया।
इसके बाद उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया और NHAI पर सेवा में कमी का आरोप लगाते हुए मुआवज़े की मांग की। जवाब में NHAI की छिंदवाड़ा इकाई ने सड़क पर गड्ढे होने की बात स्वीकार की, लेकिन कहा कि भारी बारिश और अधिक यातायात के दबाव के कारण गड्ढे बने थे। प्राधिकरण ने यह भी बताया कि उस समय मरम्मत का कार्य चल रहा था। हालांकि, NHAI ने यह दलील भी दी कि शिकायतकर्ता ने वाहन के नियमित रखरखाव का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया है, इसलिए शिकायत खारिज कर दी जानी चाहिए।
उपभोक्ता आयोग ने NHAI की इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उपभोक्ता के लिए वाहन के नियमित रखरखाव का रिकॉर्ड प्रस्तुत करना कानूनी रूप से आवश्यक नहीं है। गड्ढों के कारण वाहन को नुकसान हुआ, यही पर्याप्त है। आयोग ने NHAI की छिंदवाड़ा परियोजना इकाई को सड़क के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया और NHAI तथा उसके नागपुर कार्यालय के खिलाफ शिकायत को खारिज कर दिया।
उपभोक्ता आयोग ने कहा कि टोल वसूली और सड़क के रखरखाव की प्राथमिक जिम्मेदारी NHAI की छिंदवाड़ा इकाई की है; इसलिए मुआवज़ा देने की जिम्मेदारी भी उसी की है। वसूले गए टोल के बदले सुरक्षित और अच्छी तरह से रखरखाव की गई सड़क उपलब्ध कराना संबंधित प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहन को हुआ नुकसान सेवा में कमी है। आयोग ने NHAI को 45 दिनों के भीतर मुआवज़े की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

