‘अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बनाम सीएम योगी आदित्यनाथ बन गई है लड़ाई, शंकराचार्य बोले- जिंदा हिंदू लखनऊ चलें’

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वाराणसी। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। माघ मेला में स्नान करने को लेकर हुए विवाद के बाद से मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब यह विवाद मुख्यमंत्री बनाम स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद हो गया है। काशी में लखनऊ रवाना होने से पहले उन्होंने कहा कि बहुत दुर्भाग्य की बात है कि धर्म युद्ध के लिए निकलना पड़ रहा है। अपने ही देश में, अपने ही वोट से चुनी सरकार के सामने, अपनी ही गोमाता को बचाने के लिए हम लोगों को आंदोलन करना पड़ रहा है। शंकराचार्य ने इस आंदोलन को ‘गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध सभा’ का नाम दिया। बता दें कि वह 11 मार्च को लखनऊ पहुंचेंगे। यहां हजारों संतों की मौजूदगी में सभा करेंगे। इसमें सरकार से गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग करेंगे। यात्रा में 20 से अधिक गाड़ियां हैं। 500 से अधिक श्रद्धालु साथ हैं।

इस दौरान लोगों को पोस्टर बांटे गए। इनमें लिखा है- जिंदा हिंदू लखनऊ चलें। इससे पहले, शंकराचार्य सुबह 8.30 बजे मठ से निकलकर गौशाला पहुंचे। गाय की पूजा की। फिर पालकी पर सवार हुए।  वहीं, मठ से 300 मीटर दूर स्थित चिंतामणि गणेश मंदिर पहुंचे। यहां 11 बटुकों ने उनका स्वागत किया। फिर पूजा-अर्चना कर संकट मोचन मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ किया और अपने संकल्प को दोहराया। इसके बाद शंखनाद और जयकारों के बीच अपनी वैनिटी वैन से लखनऊ के लिए रवाना हुए। शंकराचार्य काशी से जौनपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर होते हुए 5 दिन बाद लखनऊ पहुंचेंगे।

बता दें कि शंकराचार्य ने 30 जनवरी को योगी सरकार को 40 दिन का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने तब कहा था कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित करें। वरना आंदोलन करेंगे। 

जो हिम्मती लोग हैं, वे गाय के पक्ष में बोलेंगे

इधर, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के लखनऊ में स्वागत वाले बयान पर शंकराचार्य ने कहा कि जिसके मन में जो है, यही मौका है, बोल दे। जो गाय के पक्ष में है, वो बोल रहा है। अपनी अभिव्यक्तियों से वे बता रहे हैं कि हम किधर हैं। जो हिम्मती लोग हैं, वो बोलेंगे कि मैं गाय के पक्ष में हूं। जो अंदर से मक्कार है, कालनेमि है, वो कुछ नहीं बोलेंगे। उल्लेखनीय है कि लखनऊ रवाना होने से पहले उन्होंने कहा था कि 11 मार्च को लखनऊ में हम सभी साधु संतों के सामने अपना फैसला सुनाएंगे। उन लोगों का चेहरा भी सामने लाएंगे, जो लोग हमारे इस अभियान में साथ हैं। रास्ते में हमें जहां रोका जाएगा, हम कानून का पूरा साथ देंगे। उम्मीद है कि ये धर्म की यात्रा है, इसमें कोई बाधा नहीं आएगी।

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