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क्या ईरान-अमेरिका जंग की वजह से भारत में रसोई गैस की किल्लत होने वाली है?
नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत पर भी दिखने लगा है। गैस किल्लत की आशंका के बीच सरकार ने कंपनियों को एलपीजी का उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच लंबा चला तो देश में रसोई गैस की किल्लत हो सकती है। हालांकि गैस को लेकर फिलहाल स्थिति सामान्य है। इधर, केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। यह अब 1883 रुपए का मिलेगा। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई है। बता दें कि इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू सिलेंडर के दामों में 50 रुपए का इजाफा किया था। देखा जाए तो सरकार ने गैस के दामों में बढ़ोतरी ऐसे वक्त की है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते देश में गैस किल्लत की आशंका जताई गई है। दरअसल पूरा मिडिल ईस्ट इस समय जंग से प्रभावित है।
सरकार ने 5 मार्च को ही देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव से गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने यह आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि अब रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन का इस्तेमाल सिर्फ रसोई गैस बनाने के लिए करेंगी।
भारत के लिए इस समय क्या है बड़ी चुनौती
बता दें कि भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग शुरू होने बाद से यह रूट अब सुरक्षित नहीं रह गया है। जंग को देखत हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है। उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर स्ट्राइक की थी। इसके जवाब में ईरान ने यूएई, कतर, कुवैत और सऊदी जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और पोर्ट्स को निशाना बनाया है। इस हमले के बाद भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने अपने एलएनजी प्लांट का प्रोडक्शन रोक दिया है। इससे भारत में गैस की सप्लाई घट गई है।

