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युद्ध का असर गुजरात पर दिखने लगा, मोरबी में लोगों की रोज़गार पर संकट
हाल में ईरान और इज़राइल के बीच जो युद्ध जैसी स्थिति बनी है, उसके कारण सऊदी में मिसाइल हमला हुआ है और सऊदी से मोरबी में जो प्रोपेन गैस की सप्लाई होती है, उसकी सबसे बड़ी रिफाइनरी पर मिसाइल हमला कर ब्लास्ट किया गया है। ईरान-इज़राइल युद्ध की आग गुजरात के मोरबी तक पहुंच गई है। मोरबी के सिरेमिक उद्योग में प्रोपेन गैस की आपूर्ति बुधवार से पूरी तरह बंद हो गई है, जिसके कारण अगले 24-48 घंटों में अधिकांश कारखाने बंद हो जाएंगे और लाखों लोगों की रोज़गार पर संकट खड़ा हो गया है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, मोरबी में लगभग 600 सिरेमिक इकाइयां कार्यरत हैं। इन सभी इकाइयों में प्रोपेन गैस और नेचरल गैस का उपयोग ईंधन के रूप में होता है। ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण प्रोपेन गैस सप्लाई करने वाली एजेंसियों ने 2 दिन पहले ऑर्डर लेना बंद कर दिया था और आज से कांडला पोर्ट से प्रोपेन गैस के टैंकर भरना भी बंद हो गया है।
मोरबी के सिरेमिक उद्योग से जुड़े अन्य छोटे-बड़े उद्योगों को भी अपना उत्पादन और यूनिट बंद करने की नौबत आ जाएगी। यदि यह स्थिति लंबे समय तक जारी रहती है, तो मोरबी की अर्थव्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
प्रोपेन गैस तथा नेचरल गैस की कमी की स्थिति के बीच मंगलवार को मोरबी सिरेमिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के पदाधिकारी और उपयोगकर्ता बड़ी संख्या में गुजरात गैस कॉर्पोरेशन GSPC के कार्यालय पहुंचे थे और उनसे भी गैस की उपलब्धता के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की थी। इसके बाद गुजरात के अधिकारियों ने उनके साथ बैठक की थी।
गुजरात गैस के पास फिलहाल कितना स्टॉक है, इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। केवल उद्योगकारों को फिलहाल पर्याप्त स्टॉक होने का कहकर आश्वासन दिया गया था। ऐसे में मोरबी के इन उद्योगों पर आने वाले दिनों में गैस की कमी की नई समस्या मंडरा रही है। तब उद्योगों को वास्तव में गैस उपलब्ध होगी या नहीं, यह आने वाला समय ही बताएगा।
मोरबी सिरेमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष हरेश बोपलिया ने विवरण देते हुए कहा कि कारखानदारों के पास फिलहाल 24-48 घंटे चल सके इतना प्रोपेन गैस का स्टॉक उपलब्ध है। यह स्टॉक खत्म होने के बाद प्रोपेन गैस के अभाव में अधिकांश कारखानों को मजबूरी में बंद करना पड़ेगा।
हरेश बोपलिया के अनुसार, मोरबी का सिरेमिक उद्योग लगभग 3 लाख श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है। इन कारखानों के बंद होने से लाखों लोगों की रोज़गार पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो जाएगा। इसके अलावा, कारखानदारों को भी बड़े आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा। लोगों को लोन की किस्तें भरने में भी कठिनाई हो सकती है।
इस बारे में मोरबी सिरेमिक एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोजभाई एरवाडिया ने बताया कि ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे युद्ध की स्थिति के कारण हुए मिसाइल हमलों की वजह से प्रोपेन गैस की सप्लाई कम हो सकती है और उद्योगकारों को समय पर प्रोपेन गैस न मिले ऐसी स्थिति बनने की संभावनाएं फिलहाल दिखाई दे रही हैं। हालांकि गैस सप्लाई करने वाली कंपनी या गैस सप्लाई करने वाले सप्लायर द्वारा प्रोपेन गैस की सप्लाई के बारे में किसी भी प्रकार की स्पष्टता नहीं की जा रही है।
लेकिन यदि गैस की सप्लाई बाधित होती है तो मोरबी के सिरेमिक उद्योगकारों को अपने कारखाने बंद करने पड़ सकते हैं, ऐसी स्थिति बन सकती है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि मोरबी में प्रतिदिन लगभग साढ़े पांच हजार टन प्रोपेन गैस सिरेमिक उत्पादन के लिए उपयोग की जाती है। लेकिन यदि प्रोपेन गैस की चेन बाधित होती है तो मोरबी के सिरेमिक उद्योगकारों की चिंता बढ़ना निश्चित है।

