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खंडवा: ‘ईद पर बकरी की जान जाते देख सहन नहीं हुआ...’, बिलाल से ‘विशाल’ बने युवक की कहानी
ईद के दौरान मूक प्राणियों की बलि से एक मुस्लिम युवक इतना दुखी हो गया कि उसने इस्लाम का त्याग करके सनातन धर्म अपनाने का निर्णय लिया। खंडवा के महादेवगढ़ मंदिर में बिलाल नाम के युवक ने औपचारिक रूप से सनातन धर्म अपनाकर ‘विशाल’ नाम धारण किया। यहां उसने विधिवत मुंडन कराया और महादेव की पूजा-अर्चना करने के बाद हवन-यज्ञ भी कराया। उसने अपने मस्तक पर पवित्र रामचरितमानस रखकर उसे नियमित रूप से पढ़ने की प्रतिज्ञा ली।
यह घटना मध्य प्रदेश के हरदा जिले के खिरकिया निवासी बिलाल की है। बचपन से ही उसने सनातन धर्म के अनुयायी राजेश सारंग के लिए न केवल काम किया, बल्कि परिवार के एक सदस्य की तरह हिंदू रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों से भी काफी प्रभावित रहा।
बकरीद के दौरान, जब मूक प्राणियों की बड़े पैमाने पर बलि दी जा रही थी, तब उसका मन बहुत दुखी हो गया। उस दिन वह अत्यंत व्यथित हुआ और उसने इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। यहां ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना ने उसे प्रभावित किया, जिसमें सभी प्राणियों के प्रति करुणा का भाव है। उसने राजेश सारंग से आग्रह किया कि उसे खंडवा के महादेवगढ़ मंदिर ले जाया जाए, क्योंकि उसने सुना था कि यहां ‘घरवापसी’ होती है।
युवक ने कहा कि पहले मेरा नाम बिलाल था, और अब विशाल हो गया है। मुझे सनातन धर्म से बहुत प्रेम है; मुझे यहां आना ही था। मैं शुरू से ही इसे अपनाता आ रहा हूं। बकरीद के दिन मैं यह सहन नहीं कर सका। मासूम प्राणियों की बलि देखकर मैंने अपने पिता से कहा कि मुझे वहां से दूर ले चलो, इसलिए वे मुझे आज यहां लेकर आए। मैं खिरकिया का निवासी हूं और मुझे शुरू से ही सनातन धर्म के प्रति गहरा लगाव था।
खंडवा के महादेवगढ़ मंदिर में अतीत में ऐसी कई ‘घरवापसी’ हो चुकी हैं; यहां कई मुस्लिम युवक-युवतियां सनातन धर्म अपना चुके हैं। इसी क्रम में, बिलाल ने कल ‘विशाल’ के रूप में ‘घरवापसी’ की। पहले उसका मुंडन कराया गया और उपनयन संस्कार संपन्न किया गया, इसके बाद पवित्र जल से शुद्धिकरण किया गया। महादेवगढ़ मंदिर के संरक्षक अशोक पालीवाल ने बताया कि विशाल का गंगाजल, गाय का दूध, पंचामृत, गौमूत्र, गोबर, पवित्र तुलसी की मिट्टी, फलों, धातुओं, पंचगव्य और शंख से 10 विधियों द्वारा स्नान कराकर शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद उसने विधिवत हवन किया और भगवान महादेव की पूजा-अर्चना की। तत्पश्चात महादेवगढ़ मंदिर की ओर से विशाल को रामचरितमानस की एक प्रति भेंट की गई; पवित्र ग्रंथ को अपने मस्तक पर रखकर उसने नियमित रूप से उसका पाठ करने की प्रतिज्ञा ली।
इस अवसर पर बोलते हुए पालीवाल ने कहा कि पुरुषोत्तम मास के इस पवित्र महीने में इस युवक ने एक नई आध्यात्मिक यात्रा शुरू की है। महादेवगढ़ परिवार की ओर से विशाल को ‘पवित्र रामचरितमानस’ भेंट की गई, जिसे सनातन परंपरा का सर्वोच्च ग्रंथ माना जाता है। विशाल ने इस पवित्र ग्रंथ को अत्यंत श्रद्धा के साथ स्वीकार किया और उसे अपने मस्तक से लगाया, तथा संकल्प लिया कि अब वह नियमित रूप से रामचरितमानस का पाठ करेगा और सनातन धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ेगा।

