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2027 तक सात राज्यों में विधानसभा चुनाव, भाजपा की नजर Gen-Z पर, युवाओं को नजरअंदाज करके अब चुनाव जीतना संभव नहीं
नई दिल्ली। 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2029 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने Gen-Z यानी नई पीढ़ी के युवाओं से सीधे संवाद के लिए एक विशेष टीम गठित की है। इसमें भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन, राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े के अलावा गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और छत्तीसगढ़ के मंत्री ओपी चौधरी को शामिल किया गया है। पार्टी का फोकस युवाओं की सोच, उनकी समस्याओं और भविष्य को लेकर उनकी उम्मीदों को समझने पर रहेगा।
दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में नितिन नबीन की अध्यक्षता में पार्टी की नई 65 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में संगठन को मजबूत करने, आगामी चुनावों की तैयारियों और युवाओं के साथ पार्टी का संवाद बढ़ाने सहित कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
भाजपा की नजर 14 से 25 साल तक के युवाओं पर
भाजपा के प्रस्तावित ‘युवा संवाद’ अभियान का उद्देश्य 14 से 25 साल के युवाओं को बातचीत और चर्चा के जरिए जोड़ना है। इसके तहत पार्टी युवा पीढ़ी के विचारों, समस्याओं और अपेक्षाओं को समझने की कोशिश करेगी। युवाओं को भाजपा नेताओं से सीधे सवाल पूछने और अपनी बात रखने का अवसर भी दिया जाएगा। कार्यक्रमों की तारीख, स्थान और विस्तृत प्रारूप बाद में जारी किया जाएगा।
पार्टी की रणनीति केवल चुनावी भाषणों तक सीमित रखने के बजाय युवाओं के साथ नियमित संवाद स्थापित करने की है। इसमें सोशल मीडिया और प्रत्यक्ष संपर्क दोनों को अहम माध्यम माना जा रहा है। Gen-Z सोशल मीडिया पर सक्रिय है, इसलिए राजनीतिक दलों के लिए इस वर्ग तक पहुंच बनाने का डिजिटल माध्यम भी महत्वपूर्ण हो गया है।
कांग्रेस पर निशाना जारी, वंदे मातरम् को लेकर घेरने की तैयारी
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम की पहली बैठक में वंदे मातरम् को लेकर भी प्रस्ताव पारित किया गया। भाजपा ने कांग्रेस कार्यसमिति के उस फैसले की आलोचना की, जिसमें कांग्रेस के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल पहले दो अंतरे गाने की व्यवस्था पर कायम रहने का निर्णय लिया गया है। कांग्रेस ने 19 अगस्त को 1937 के अपने फैसले को दोहराया था।
भाजपा ने कहा कि वह वंदे मातरम के इतिहास और उसके महत्व को देशभर में पहुंचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाएगी। पार्टी विशेष रूप से युवाओं के बीच इस अभियान को आगे बढ़ाएगी, ताकि नई पीढ़ी राष्ट्रगीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके महत्व को समझ सके। बैठक से पहले भाजपा की नई टीम ने वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों का गायन भी किया।
2027 के चुनावों में Gen-Z क्यों महत्वपूर्ण?
युवाओं पर भाजपा का बढ़ता फोकस सिर्फ संगठनात्मक पहल नहीं है। 2027 में उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर और गोवा में विधानसभा चुनाव होने हैं। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक इन सात राज्यों में 18 से 29 वर्ष की उम्र के मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 22% है। यानी लगभग हर पांच में से एक मतदाता युवा वर्ग से है। इन सात राज्यों में कुल 940 विधानसभा सीटें हैं। पिछले विधानसभा चुनावों में 257 सीटों यानी करीब 27% सीटों पर जीत का अंतर 5% या उससे कम रहा था। उत्तर प्रदेश में 403 में से 131, गुजरात में 182 में से 27, पंजाब में 117 में से 24, उत्तराखंड में 70 में से 15 और हिमाचल प्रदेश में 68 में से 14 सीटों पर मुकाबला 5% या उससे कम के अंतर से तय हुआ था। ऐसे में युवा मतदाताओं के रुझान में छोटा बदलाव भी करीबी मुकाबले वाली सीटों पर असर डाल सकता है।
अब युवा मतदाताओं को नजरअंदाज करना मुमकिन नहीं
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि Gen-Z का 5% वोट किसी एक पार्टी के पक्ष में जाने से सीधे सत्ता बदल जाएगी। मतदान प्रतिशत, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवार, जातीय-सामाजिक समीकरण, गठबंधन और क्षेत्रीय परिस्थितियां भी चुनावी नतीजों में बड़ी भूमिका निभाती हैं। फिर भी बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं के कारण राजनीतिक दल इस वर्ग को नजरअंदाज नहीं करना चाहते।
2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारी भी कर रही भाजपा
भाजपा की रणनीति में सिर्फ मौजूदा मतदाता ही नहीं, बल्कि भविष्य के मतदाता भी शामिल हैं। 14 से 17 साल की उम्र के किशोर अभी मतदान नहीं कर सकते, लेकिन 2029 के लोकसभा चुनाव तक इनमें से बड़ी संख्या पहली बार वोट देने की उम्र में पहुंच जाएगी। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए इस आयु वर्ग के साथ संवाद भविष्य की राजनीतिक पसंद को प्रभावित करने का माध्यम माना जा रहा है। दरअसल, Gen-Z की परिभाषा आम तौर पर 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी के लिए इस्तेमाल होती है। 2026 में इस पीढ़ी की उम्र लगभग 14 से 29 वर्ष के बीच है। भारत में यह आबादी करीब 37 करोड़ होने का अनुमान है, जिससे यह देश की सबसे बड़ी युवा पीढ़ियों में शामिल है।
यूनिवर्सिटी पर विशेष नजर, क्योंकि सबसे ज्यादा युवा यहीं पर
भाजपा के संगठनात्मक अभियान के समानांतर केंद्र सरकार भी युवाओं तक सीधा पहुंचने की योजना पर काम कर रही है। इसके तहत केंद्रीय मंत्री अलग-अलग विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों से बातचीत करेंगे और शिक्षा, रोजगार, स्किल्स तथा युवाओं से जुड़े अन्य मुद्दों पर उनके सवाल सुनेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मंत्रियों और सांसदों से युवाओं के साथ संपर्क बढ़ाने तथा सोशल मीडिया पर सक्रियता मजबूत करने पर जोर दिया है।
युवाओं का मुद्दा अब चुनावी रणनीति के केंद्र में
युवा आबादी का आकार और सोशल मीडिया पर उसकी सक्रियता राजनीतिक दलों के लिए इसे महत्वपूर्ण वोटर समूह बना रही है। शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाएं, कौशल विकास और भविष्य की संभावनाएं ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर युवा वर्ग लगातार अपनी राय सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर रख रहा है। यही वजह है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा ने Gen-Z को संगठनात्मक और चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की शुरुआत की है। अब देखना यह होगा कि सीधे संवाद की यह रणनीति युवाओं की अपेक्षाओं को राजनीतिक समर्थन में बदल पाती है या नहीं।

