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'या राजनीति छोड़ूंगा या 100 सीटें लाऊंगा'; कसम पूरी कर केरल के 'किंग' बने वीडी सतीशन, जानें वकील से सीएम बनने का सफर
तिरुवनंतपुरम। केरल की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। कांग्रेस आलाकमान ने तमाम कयासों और 10 दिनों तक चले मन्थन के बाद वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी है। वे केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। वीडी सतीशन का मुख्यमंत्री चुना जाना न केवल कांग्रेस के लिए एक बड़ा बदलाव है, बल्कि यह एक ऐसे नेता की जीत है जिसने अपनी राजनीति को दांव पर लगा दिया था।
100 सीटों की कसम और ऐतिहासिक जीत
2026 के विधानसभा चुनाव सतीशन के लिए महज एक चुनाव नहीं, बल्कि उनकी साख की परीक्षा थी। चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने एक साहसी और जोखिम भरी घोषणा की थी। 'अगर कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF को 140 में से 100 से कम सीटें मिलीं, तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा।' परिणाम आए तो सतीशन का यह मास्टरस्ट्रोक साबित हुआ। यूडीएफ ने 102 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया और सतीशन ने खुद अपने गढ़ 'परवूर' से लगातार छठी बार 20,600 मतों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। इसी जीत ने उनके लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी का रास्ता साफ कर दिया।
कितने पढ़े-लिखे हैं वीडी सतीशन?
वीडी. सतीशन जिनका पूरा नाम वदस्सेरी दामोदरन सतीशन का जन्म 31 मई 1964 को केरल के कोच्चि स्थित नेट्टूर में एक नायर परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम के. दामोदरा मेनन और मां का नाम वी. विलासिनी अम्मा है। सतीशन पढ़ने में बहुत अच्छे थे। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पनांगड हाईस्कूल से हुई, जो कि क्षेत्र का नामी स्कूल है। इसके बाद उन्होंने सैक्रेड हार्ट कॉलेज, थेवारा से स्नातक की पढ़ाई की। सतीशन ने राजगिरी कॉलेज ऑफ सोशल साइंसेज, कोच्चि से मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री हासिल की।
राजनीति में आने से पहले उन्होंने कानून की गहरी पढ़ाई की। उन्होंने केरल लॉ एकेडमी लॉ कॉलेज से एलएलबी की और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, तिरुवनंतपुरम से मास्टर ऑफ लॉ (एलएलएम) की डिग्री भी हासिल की। वीडी सतीशन को जानने वाले उन्हें एक किताबी कीड़ा (बुकवर्म) नेता मानते हैं, जिनकी अध्ययन में बहुत गहरी रुचि है।
छात्र राजनीति से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक
सतीशन का राजनीतिक सफर केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) से शुरू हुआ। वे महात्मा गांधी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष और एनएसयूआई के राष्ट्रीय सचिव रहे। चुनावी राजनीति में उनकी शुरुआत 1996 में हार के साथ हुई थी, लेकिन 2001 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे परवूर सीट से लगातार 6 बार विधायक चुने गए हैं। उन्होंने पन्नियन रवींद्रन जैसे वामपंथी दिग्गजों को धूल चटाई। 2021 में जब वे विपक्ष के नेता बने, तो उन्होंने पिनरई विजयन की सरकार को सदन में अपने तर्कों और आक्रामकता से कई बार बैकफुट पर धकेला।
बागी तेवर और साफ-सुथरी छवि
सतीशन को पार्टी के भीतर एक 'बागी' और 'ईमानदार' आवाज के रूप में जाना जाता है। उन्होंने हमेशा 'हरित राजनीति' का समर्थन किया और जातिगत समीकरणों के आगे झुकने के बजाय योग्यता के आधार पर टिकट बांटने की वकालत की। उनके पास भले ही पूर्व में कोई मंत्री पद नहीं रहा, लेकिन बतौर विपक्ष के नेता उनके शानदार प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि वे राज्य चलाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

