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हैदराबाद: कौन हैं IPS बी. सुमति? जब आधी रात को आम महिला बनकर बस स्टॉप पर पहुंचीं; 3 घंटे तक चला ऑपरेशन
हैदराबाद की सड़कें आधी रात के बाद शांत हो चुकी थीं। रात के 12:30 बजे थे। दिलसुखनगर का बस स्टॉप लगभग सुनसान था, और सड़क पर दूर-दूर तक गुजरते वाहनों की हल्की-हल्की आवाजें सुनाई दे रही थीं। बस स्टॉप की पीली रोशनी के नीचे एक महिला अकेली खड़ी थी। साधारण सलवार-सूट, हाथ में मोबाइल फोन और चेहरे पर बिल्कुल सामान्य भाव। देखने वालों को लग रहा था कि शायद कोई महिला देर रात बस का इंतजार कर रही है। लेकिन उस रात हैदराबाद की सड़कों पर जो कुछ हो रहा था, वह किसी सिनेमाई थ्रिलर से कम नहीं था। उस अकेली महिला के आसपास कई लोग थे। कुछ दूर खड़े लोग लगातार नजर रख रहे थे। कोई धीरे-धीरे उसके करीब आ रहा था, तो कुछ बातचीत शुरू करने की कोशिश कर रहे थे।
और फिर अंधेरे में छिपी टीम सक्रिय हो जाती। कुछ लोगों को मौके पर ही रोक लिया जाता, कुछ को अलग ले जाकर पूछताछ की जाती। क्योंकि वह महिला कोई सामान्य यात्री नहीं थी; वह मल्काजगिरी की नई नियुक्त पुलिस कमिश्नर IPS बी. सुमति थीं।
बी. सुमति ने 1 मई को मल्काजगिरी की पुलिस कमिश्नर का कार्यभार संभाला था। इसके बाद उन्होंने फैसला किया कि महिलाओं की सुरक्षा की वास्तविक स्थिति एयर-कंडीशंड ऑफिस में बैठकर नहीं समझी जा सकती। इसके लिए सड़कों पर उतरना होगा, उन्हीं सड़कों पर जहां हर रात हजारों महिलाएं सफर करती हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने उस रात एक सीक्रेट अंडरकवर ऑपरेशन की योजना बनाई।
करीब रात 12:30 बजे बी. सुमति वेश बदलकर दिलसुखनगर बस स्टॉप पर पहुंचीं। सादे कपड़ों में पुलिस टीमें आसपास के इलाके में तैनात थीं। वहां मौजूद किसी भी व्यक्ति को जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस महिला को वे देख रहे हैं, वह शहर की पुलिस कमिश्नर हैं।
सुमति बस स्टॉप पर अकेली खड़ी थीं। कुछ मिनट बीते... और फिर लोगों की नजरें उन पर टिकने लगीं। एक युवक उनके पास आया और बातचीत शुरू करने की कोशिश करने लगा, जबकि दूसरा काफी देर तक उन्हें घूरता रहा। कुछ लोग आसपास मंडराने लगे। अगले तीन घंटों में लगभग 40 लोग उनके पास आए।
कई युवक नशे में लग रहे थे। कुछ पर गांजा लेने का संदेह था। महिलाओं के प्रति कुछ लोगों का व्यवहार असामान्य और संदिग्ध लगा। जैसे ही किसी ने शिष्टाचार की सीमा पार करने की कोशिश की, पास में सादे कपड़ों में तैनात पुलिस टीम तुरंत सक्रिय हो गई। कई लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि कई अन्य को मौके पर ही काउंसलिंग दी गई।
इस ऑपरेशन का उद्देश्य यह समझना था कि जब कोई महिला देर रात अकेली होती है, तो उसे किस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। बी. सुमति ने व्यक्तिगत रूप से महसूस किया कि रात के समय महिलाओं को सिर्फ अपराध का ही नहीं, बल्कि लगातार घूरती नजरों, पीछा किए जाने और अनचाही बातचीत का भी सामना करना पड़ता है। कई बार माहौल इतना प्रतिकूल हो जाता है कि महिला खुद को असुरक्षित महसूस करने लगती है।
IPS बी. सुमति कौन हैं?
बी. सुमति तेलंगाना पुलिस बल की सबसे तेज अधिकारियों में गिनी जाती हैं। मल्काजगिरी की पुलिस कमिश्नर बनने से पहले उन्होंने स्पेशल इंटेलिजेंस ब्रांच (SIB) की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके करियर की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में माओवादी गतिविधियों से जुड़े कई संवेदनशील मामलों को संभालना शामिल है। उन्होंने लंबे समय तक चलाए गए अभियानों में भी अहम भूमिका निभाई थी, जिनमें कई माओवादियों को मुख्यधारा में वापस लाने में मदद की गई थी। अपनी सख्त प्रशासनिक शैली और व्यावहारिक फील्डवर्क के लिए मशहूर IPS बी. सुमति का यह नया अंदाज चर्चा का मुख्य विषय बन गया है।
जैसे ही इस गुप्त ऑपरेशन की खबर सामने आई, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जोरदार चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे महिला सुरक्षा से जुड़ा रियलिटी चेक बताया, जबकि अन्य लोगों ने कहा कि सिस्टम की असली स्थिति तभी सामने आती है जब अधिकारी खुद मैदान में उतरते हैं। लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि अगर एक वरिष्ठ महिला IPS अधिकारी को भी देर रात ऐसे अनुभवों का सामना करना पड़ सकता है, तो आम महिलाओं की स्थिति क्या होगी?
दिलसुखनगर की उस रात ने यह भी दिखा दिया कि महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ CCTV कैमरों, पुलिस पेट्रोलिंग या दावों से तय नहीं होती। असली सुरक्षा वह एहसास है, जब कोई महिला रात के अंधेरे में भी बस स्टॉप पर बिना किसी डर के खड़ी रह सके।

