- Hindi News
- राष्ट्रीय
- जिनकी शिकायत पर 8 लोग हुए गिरफ्तार उनको मिली राम मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारी, कौन हैं पूर्व IFS कृष्...
जिनकी शिकायत पर 8 लोग हुए गिरफ्तार उनको मिली राम मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारी, कौन हैं पूर्व IFS कृष्ण मोहन?
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया। इसके साथ ही ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन राय को अंतरिम तौर पर मंदिर प्रबंधन और ट्रस्ट के महासचिव की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। यह फैसला हाल ही में सामने आए राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बाद लिया गया है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर विचार किया गया। बैठक में दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। चंपत राय पिछले कई वर्षों से ट्रस्ट के दैनिक प्रशासन और मंदिर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। हाल के दिनों में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद उन पर लगातार सवाल उठ रहे थे, जिसके बाद उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया था।
कृष्ण मोहन राय को मिली नई जिम्मेदारी
ट्रस्ट ने अंतरिम व्यवस्था के तहत कृष्ण मोहन राय को महासचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है। अब वे मंदिर के प्रशासनिक कार्यों, ट्रस्ट के दैनिक संचालन और विभिन्न व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगे। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यह जिम्मेदारी अंतरिम व्यवस्था के तहत दी गई है, जबकि आगे स्थायी नियुक्ति पर बाद में निर्णय लिया जाएगा।
कौन हैं कृष्ण मोहन राय?
कृष्ण मोहन राय लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। उन्हें ट्रस्ट में कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सदस्य बनाया गया था। ट्रस्ट के भीतर उनकी पहचान एक शांत और संगठनात्मक अनुभव रखने वाले सदस्य के रूप में मानी जाती है। अब उन्हें ऐसे समय में बड़ी जिम्मेदारी मिली है, जब ट्रस्ट पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधारों को लेकर चर्चा में है।
क्यों अहम है यह फैसला?
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। इसी वजह से ट्रस्ट की बैठक तय समय से पहले बुलाई गई। बैठक में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने, निर्णय प्रक्रिया में सुधार और श्रद्धालुओं के भरोसे को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
आगे क्या होगा?
ट्रस्ट फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तहत अपना काम जारी रखेगा। आने वाले समय में महासचिव के स्थायी पद, प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर प्रबंधन को और बेहतर बनाने के लिए भी नए कदम उठाए जाने की संभावना है।

