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अब हर साल DGCA द्वारा सभी पायलटों का डोप टेस्ट किया जाएगा; तैयारियां शुरू
नागरिक उड्डयन मंत्रालय पायलटों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। मंत्रालय साल में एक बार सभी पायलटों का अनिवार्य डोप टेस्ट कराने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विमान उड़ाने वाले पायलट किसी भी नशे या प्रतिबंधित पदार्थ के प्रभाव में ड्यूटी पर न हों।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA इस प्रस्ताव को लेकर संबंधित हितधारकों से सलाह ले रहा है। अधिकारियों के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि, वार्षिक आधार पर सभी पायलटों का 100 प्रतिशत डोप टेस्ट कराना कितना व्यावहारिक है।
इसके साथ, एयरलाइन संचालन पर प्रस्तावित प्रणाली के प्रभाव का भी आकलन किया जा रहा है। अधिकारियों का ध्यान यह सुनिश्चित करने पर है कि, डोप टेस्ट प्रक्रिया के कार्यान्वयन के बावजूद उड़ानों के संचालन में कोई परेशानी न आए। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो पायलटों के नियमित परीक्षण के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
4 अगस्त को फुकेत से दिल्ली आते समय एयर इंडिया की फ्लाइट AI2379 अचानक लगभग 300 फीट नीचे आ जाने की घटना के बाद, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने विमान की सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इस घटना में 24 लोग घायल हुए हैं। इस मामले की जांच चल रही है, तब पायलटों को ड्यूटी से हटा दिया गया है और तकनीकी खामियों के साथ-साथ क्रू सदस्य के भी मेडिकल टेस्ट की जांच की जा रही है।
इस घटना के बाद किए गए पुष्टिकारी चिकित्सा परीक्षण में पता चला था कि, विमान के कैप्टन मारिजुआना (गांजा) के लिए पॉजिटिव पाए गए थे। इसके अलावा फ्लाइट के अचानक ऊंचाई से नीचे आने से पहले हाइड्रोलिक सिस्टम और फ्लाइट कंट्रोल से संबंधित कई तकनीकी चेतावनियां भी रिकॉर्ड की गई थीं। DGCA अब इन सभी पहलुओं की जांच कर रहा है।
इस घटना ने विमान उड़ाने वाले पायलट के नियमित और रैंडम ड्रग टेस्टिंग पर भी सवाल खड़े किए हैं। इसके बाद, DGCA कमर्शियल एयरलाइंस में साइकोएक्टिव और मादक पदार्थों के परीक्षण के नियमों को और सख्त बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है।
नए नियमों के तहत पायलट और अन्य फ्लाइट क्रू सदस्यों के रैंडम टेस्टिंग का दायरा बढ़ाया जा सकता है। DGCA यह भी देख रहा है कि, ड्रग टेस्टिंग को और प्रभावी और नियमित कैसे बनाया जा सकता है, ताकि कोई भी क्रू सदस्य किसी भी प्रकार के नशे के प्रभाव में विमान संचालित न कर सके।
यानी एयर इंडिया की घटना के बाद DGCA अब केवल इस मामले की जांच तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पूरे विमानन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है। उद्देश्य स्पष्ट है, पायलटों की फिटनेस, ड्रग टेस्टिंग और तकनीकी सुरक्षा से संबंधित नियमों में किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

