जंग के बीच भारत का 'प्लान-B' तैयार; पीएम मोदी बोले- संकट गहरा है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं

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मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में जारी भीषण संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को आश्वस्त किया है कि भारत किसी भी संभावित ऊर्जा या आर्थिक संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इजरायल-ईरान संघर्ष के 24वें दिन में प्रवेश करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के कारण वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच पीएम मोदी ने संसद में सरकार की रणनीति साझा की।
प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि पश्चिम एशिया के हालात बेहद चिंताजनक हैं, लेकिन उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए 'प्लान-बी' का खाका पेश किया।

पश्चिम एशिया का संकट और भारत की चुनौतियां

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी कच्चा तेल और गैस की जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है। उन्होंने मौजूदा चुनौतियों को रेखांकित करते हुए बताया की होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है, जिससे कच्चे तेल और फर्टिलाइजर के आयात पर असर पड़ सकता है। भारत अपनी 60 फीसदी एलपीजी इन्हीं देशों से आयात करता है। पीएम ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमले स्वीकार्य नहीं हैं और सरकार भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।
सरकार का 'प्लान-बी': कैसे सुरक्षित रहेगा भारत?

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तेल और गैस के संभावित संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने सरकार की उन रणनीतियों का जिक्र किया जो बैकअप के तौर पर काम कर रही हैं:

1. आयात का विविधीकरण (Diversification): पहले भारत केवल 27 देशों से ऊर्जा आयात करता था, लेकिन अब यह दायरा बढ़ाकर 41 देशों तक पहुंचा दिया गया है। इससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है।

2. विशाल तेल भंडार: पीएम ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि भारत के पास वर्तमान में 53 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का भंडार (Strategic Petroleum Reserve) है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है।

3. स्वदेशी विकल्पों पर जोर: पिछले एक दशक में एथेनॉल उत्पादन में तेजी आई है, जिससे पेट्रोल की शुद्ध आयात मात्रा कम हुई है। साथ ही देश में एलपीजी का उत्पादन भी लगातार बढ़ाया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा एनर्जी किसी भी इकोनॉमी की रीढ़ होती है। हमने अपनी रिफाइनरी क्षमता बढ़ाई है और वैकल्पिक ईंधन के विकल्पों पर कदम आगे बढ़ाए हैं, जो भारत के भविष्य को सुरक्षित करेंगे

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किसानों को बड़ी राहत: खाद की कमी नहीं होने देगी सरकार

युद्ध के कारण केवल तेल ही नहीं, बल्कि खाद (फर्टिलाइजर) के आयात पर भी संकट के बादल हैं। इस पर किसानों को भरोसा दिलाते हुए पीएम ने कहा बुवाई के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है। पीएम ने याद दिलाया कि कोरोना काल में जब वैश्विक स्तर पर खाद की बोरी

3,000 रुपये तक पहुंच गई थी, तब भी सरकार ने भारतीय किसानों को इसे 300 रुपये में ही उपलब्ध कराया था। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों से अपील की है कि वे खाद की कालाबाजारी करने वालों पर पैनी नजर रखें और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।

प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही था कि भारत 'सतर्क मोड' में है। सरकार न केवल कूटनीतिक स्तर पर शांति के प्रयास कर रही है, बल्कि घरेलू स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला को अटूट रखने के लिए वैकल्पिक मार्गों और स्रोतों पर काम कर रही है

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