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टेक्सटाइल उद्योग पर युद्ध का असर: 400 से अधिक मिलें हफ्ते में दो दिन रह सकते हैं बंद; मजदूरों पर बड़ा संकट- रुकें या घर लौटें
सूरत। ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रही जंग ने उद्योगों को मुश्किल में डाल दिया है। इस युद्ध के कारण उद्योग-धंधे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सूरत का विश्व प्रसिद्ध टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर भी इसका असर अब दिखने लगा है। वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण टेक्सटाइल सेक्टर में उपयोग होने वाली वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के चलते कच्चे माल की सप्लाई चेन बाधित हो गई है। इसके कारण स्थानीय उत्पादन लागत बढ़ गई है। इससे मिल मालिकों को मिलें बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और उद्योग जगत में चिंता का माहौल है।
कोयला और यार्न के दाम बढ़ने से हो रही है दिक्कत
बता दें कि पिछले कई दिनों से यार्न के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। वहीं प्रोसेसिंग में अहम कोयले की कीमतों में भी भारी उछाल आया है। मिल संचालकों के पास फिलहाल केवल 10 से 20 दिन चलने लायक ही कोयले का स्टॉक बचा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में हालात और खराब हो सकते हैं। ऊर्जा का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। इस कठिन परिस्थिति में खर्च को नियंत्रित करने और संसाधनों को बचाने के लिए एसोसिएशन ने सप्ताह में दो दिन मिल बंद रखने का निर्णय लिया है।
सूरत की 400 से अधिक मिलें संकट का कर रहे सामना
सूरत में लगभग 400 से अधिक कपड़ा मिलें हैं, जो हजारों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतू वखारिया के अनुसार, ग्रे कपड़े के बढ़ते दामों के कारण बाजार की पार्टियां फिलहाल मिलों में प्रोसेसिंग के लिए माल नहीं भेज रही हैं। ऐसे में मिलों को चालू रखना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसलिए अगले सप्ताह से हफ्ते में दो दिन मिलें बंद रखने पर बात चल रही है। हालांकि अभी इस पर अंतिम फैसला होना बाकी है। 23 मार्च को इस पर कोई ठोस निर्णय आ सकता है।
मजदूरों की आजीविका बड़ी चिंता का कारण
सूरत की टेक्सटाइल मिलों से सीधे तौर पर लगभग ढाई लाख मजदूर जुड़े हुए हैं। मिलों के बंद रहने के फैसले से इन मजदूरों की आय और रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा। एक तरफ काम कम हो रहा है, तो दूसरी ओर मजदूरों का पलायन भी जारी है। हर दिन हजारों की संख्या में मजदूर सूरत छोड़कर अपने गांवों की ओर जा रहे हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो आने वाले सीजन में उद्योग को श्रमिकों की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है, जो सूरत की अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक होगा।
महंगाई और सिलेंडर की कमी से मजदूर परेशान
उल्लेखनीय है कि मजदूर केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। वर्तमान में उन्हें घरेलू गैस सिलेंडर प्राप्त करने में काफी कठिनाई हो रही है। जो मजदूर किराए के कमरों में रहते हैं, वहां मकान मालिक सुरक्षा कारणों से गैस या इंडक्शन के उपयोग की अनुमति नहीं दे रहे हैं। इस वजह से उनके लिए भोजन बनाना भी मुश्किल हो गया है। बढ़ती महंगाई और सुविधाओं की कमी के कारण मजदूर वर्ग दोहरी मार झेल रहा है।
मिलों में भोजनालय से श्रमिकों को मिली थोड़ी राहत
मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने सराहनीय कदम उठाए हैं। जीतू वखारिया ने बताया कि मजदूरों को सूरत में बनाए रखने के लिए कई मिलों में भोजनालय शुरू किए गए हैं, जहां उनके रहने और खाने की व्यवस्था की जा रही है। इस आपातकालीन स्थिति में कामगारों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए उद्योगपति सहयोग कर रहे हैं।
बाजार में अनिश्चितता कब तक रहेगी, यह कहना मुश्किल
मिल मालिकों के अनुसार, जब तक कच्चे माल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में तेजी आने की संभावना कम है। इसी अनिश्चितता के चलते अधिकांश इकाइयों को काम के घंटे कम करने या साप्ताहिक छुट्टियां बढ़ाने का निर्णय लेना पड़ा है।
आगे क्या बन रही है संभावना
टेक्सटाइल उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाला समय और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक अस्थिरता लंबे समय तक जारी रही, तो उद्योग को भारी नुकसान हो सकता है। फिलहाल हफ्ते में दो दिन मिल बंद रखने का निर्णय एक सोच-समझकर उठाया गया कदम है, जो भविष्य के बड़े संकट को टालने की कोशिश है।

