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भावेश रबारी कौन है, जिसके फार्महाउस ‘रामाधणी’ पर लगातार दूसरे दिन बुलडोजर चला?
पाटन जिले के चाणसमा तालुका के झीलिया गांव में सरकारी तंत्र द्वारा लगातार दूसरे दिन भी अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है। ‘स्टेट ऑफ रामाधणी’ संपत्ति पर किए गए अवैध कब्जों को JCB मशीन द्वारा ध्वस्त किया जा रहा है, जिसमें शेड और फ्लोरिंग के निर्माण शामिल हैं।
हाल ही में पाटन जिले के चाणसमा तालुका में स्थित झीलिया गांव में दो कुख्यात गिरोह के बीच गैंगवार की घटना ने आसपास के क्षेत्र में भारी चर्चा और तनाव पैदा किया है। इस घटना ने मस्तानी गैंग और वामैया गैंग के बीच की पुरानी दुश्मनी को एक बार फिर सामने ला दिया है। दोनों समूहों के बीच यह झगड़ा मुख्य रूप से पैसों के लेन-देन को लेकर भड़का था। झीलिया के रामाधणी फार्महाउस पर पुलिस पर हमले के बाद पुलिस ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए वामैया गैंग के लगभग 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया था और सार्वजनिक रूप से उनका जुलूस निकाला था।
एक रिपोर्ट के अनुसार, वामैया गैंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के बाद अब मस्तानी गैंग के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। जिला पुलिस की टीम मस्तानी गैंग के सरगना के रूप में पहचाने जाने वाले भावेश रबारी उर्फ भावेश झीलिया के फार्महाउस पर पहुंची है। भावेश रबारी के रामाधणी फार्म में पुलिस की टीम JCB के साथ पहुंची है, और पुलिस द्वारा अवैध निर्माण हटाया जा रहा है। मस्तानी गैंग के मुख्य अड्डे पर बुलडोजर चलाया जा रहा है।
झीलिया गांव के फार्महाउस और पुलिस वैन पर हुए हमले के मामले में पुलिस ने बताया कि भावेश रबारी ने गौचर जमीन पर अवैध रूप से फार्महाउस बनाया था। मस्तानी गैंग के मुख्य सूत्रधार भावेश रबारी के फार्महाउस पर प्रशासन का बुलडोजर चलाया गया है। चाणसमा प्रशासनिक विभाग द्वारा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा रही है। कड़े पुलिस बंदोबस्त के बीच कब्जा हटाने की कार्रवाई की गई है।
भावेश रबारी कौन है?
मस्तानी गैंग के सरगना के रूप में पहचाने जाने वाले भावेश रबारी झीलिया गांव का निवासी है। वह रामाधणी फार्महाउस का मालिक है और उसकी गैंग को स्थानीय लोग ‘मस्तानी गैंग’ और ‘चोटी गैंग’ के नाम से जानते हैं। अहमदाबाद में भी इस गैंग का आतंक देखा गया है, जहां यह अवैध सूदखोरी, वसूली और हिंसक उगाही के लिए कुख्यात है।
भावेश रबारी पर अपने साथियों के साथ तलवार, चाकू और लोहे के पाइप जैसे हथियारों का इस्तेमाल कर ‘पठानी उगाही’ करने के आरोप हैं। उसके खिलाफ अब तक 13 से अधिक गंभीर अपराध दर्ज हैं, जिनमें सूदखोरी, हमला और हत्या के प्रयास जैसे आरोप शामिल हैं।
हाल ही में अहमदाबाद की सरखेज पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, जब उसने जेल से जमानत पर छूटने के बाद 25 दिसंबर 2025 को जमीन दलाल मनोज राठौड़ पर जानलेवा हमला किया था। यह हमला पुरानी दुश्मनी और ब्याज विवाद के कारण हुआ था। उसने अपने साथियों के साथ जमीन दलाल के ऑफिस में घुसकर तलवार और पाइप से हमला किया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार पाटन जिले में भी उसके खिलाफ लगभग 10 गंभीर मामले दर्ज हैं।
मस्तानी गैंग और वामैया गैंग के बीच विवाद की जड़ पुरानी दुश्मनी और आर्थिक मनमुटाव है। वामैया गांव और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले इस समूह के साथ मस्तानी गैंग के सदस्यों के बीच पैसों के लेन-देन और स्थानीय विवाद लंबे समय से चल रहे हैं।
15 मार्च 2026 की रात यह विवाद उग्र हो गया। वामैया समूह के 15 से 20 लोग लगभग 6 गाड़ियों में झीलिया रोड पर स्थित भावेश रबारी के रामाधणी फार्महाउस पर हमला करने पहुंचे थे। उन्होंने लाठियों, धारिया, तलवार और पत्थरों से फार्म के गेट और संपत्ति में तोड़फोड़ की। मौके पर पहुंची पुलिस की 112 वैन पर भी पत्थरबाजी कर तोड़फोड़ की गई, जिससे पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।
इस हमले के बाद भावेश के भाई ने शिकायत दर्ज कराई और वामैया समूह के आरोपियों के नाम बताए। यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चाणसमा के PI सहित अन्य अधिकारियों की लापरवाही के कारण 13 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया। आरोपियों को गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला गया और उन्हें सख्त सबक सिखाया गया। इस घटना ने पाटन में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए। इस घटना के बाद अब जिस व्यक्ति के फार्महाउस पर हमला हुआ था, उसके खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। पुलिस ने भावेश झीलिया के फार्महाउस पर अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया है।
मस्तानी गैंग के सरगना भावेश रबारी के बारे में बात करें तो वह बिल्कुल ‘डॉन’ जैसी लग्जरी लाइफस्टाइल जीता है। पाटन जिले और रबारी समाज में भावेश रबारी और उसका भाई भार्गव झीलिया का बड़ा नाम है। दोनों भाइयों को ‘रामपीर’ के प्रति गहरी आस्था है। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो के अनुसार, दोनों भाइयों के पास महंगी गाड़ियां और बाइक हैं, जिनमें टोयोटा फॉर्च्यूनर, डिफेंडर, महिंद्रा स्कॉर्पियो आदि शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनके हर वाहन पर सरकारी मान्य नंबर प्लेट की जगह ‘स्टेट ऑफ रामाधणी’ लिखा हुआ प्लेट देखा जाता है। इतना ही नहीं, दोनों भाइयों को घोड़ों का भी काफी शौक है।
बताया जा रहा है कि भावेश रबारी और उसके भाई भार्गव झीलिया ने ब्याज के धंधे और अवैध गतिविधियों के जरिए करोड़ों का साम्राज्य खड़ा किया है। हालांकि, उनकी आधिकारिक संपत्ति का कोई स्पष्ट आंकड़ा अभी तक सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो के अनुसार, दोनों भाई अक्सर डायरों के कलाकारों के साथ नजर आते हैं। सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो के मुताबिक, गुजराती लोकगायक गमन सांथल दोनों भाइयों के खास मित्र प्रतीत होते हैं, क्योंकि गमन सांथल के कार्यक्रमों में भावेश रबारी और भार्गव रबारी हमेशा नजर आते हैं। इतना ही नहीं, कई बार गमन सांथल के झीलिया फार्महाउस पर आने के वीडियो भी सामने आए हैं।

