हिंदी पत्रकारिता की द्विशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सूरत में भव्य सेमिनार का आयोजन

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सूरत, 20 अगस्त 2026।हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में भारतीय स्टेट बैंक द्वारा संचालित नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (बैंक एवं बीमा), सूरत तथा वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के सहयोग से विश्वविद्यालय परिसर में ‘हिंदी पत्रकारिता : गौरवशाली यात्रा, वर्तमान चुनौतियाँ तथा भविष्य’ विषय पर विशेष संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। संगोष्ठी में सूरत के विभिन्न समाचार-पत्रों के संपादकों एवं वरिष्ठ पत्रकारों ने पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा, वर्तमान चुनौतियों और बदलते मीडिया परिदृश्य पर अपने विचार रखे। पत्रकारिता विभाग के लगभग 150 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए वरिष्ठ पत्रकारों के अनुभवों और विचारों से महत्वपूर्ण सीख प्राप्त की।

कार्यक्रम में एसबीआई प्रशासनिक कार्यालय, सूरत के उप महाप्रबंधक एवं नराकास अध्यक्ष राजेश कुमार, समिति के सदस्य सचिव एवं मुख्य प्रबंधक (राजभाषा)  संजीव पाण्डेय, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. किशोर सिंह चावड़ा, संदेश के मुख्य संपादक कृष्णकांत उनडकट, गुजरात गार्डियन के संपादक मनोज मिस्त्री, लोकतेज के संपादक कुलदीप सनाढ्य, धबकार के संपादक नरेश वारिया, गुजरातमित्र के संपादक धर्मेश कुकड़िया, एम.टी.बी. कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. भावेश जाधव तथा गृह मंत्रालय, भारत सरकार के सहायक निदेशक (राजभाषा)  प्रमोद संगोले सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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पत्रकारिता में विश्वसनीयता सर्वोपरि : कृष्णकांत उनडकट

संदेश के संपादक कृष्णकांत उनडकट ने कहा कि पत्रकारिता में विश्वसनीयता सबसे अनिवार्य तत्व है। उन्होंने कहा कि 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कोलकाता से प्रकाशित ‘उदंत मार्तंड’ भले ही लगभग 18 महीने ही प्रकाशित हो सका, लेकिन उसने हिंदी पत्रकारिता की ऐसी मजबूत नींव रखी, जिसकी परिणति आज हिंदी पत्रकारिता की द्विशताब्दी के रूप में हमारे सामने है। उन्होंने कहा कि अखबारी पत्रकारिता के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं, लेकिन उसकी साख आज भी कायम है। इस दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की पंक्तियों का उल्लेख कर श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरीं।

पत्रकारिता सामाजिक दायित्व है : मनोज मिस्त्री

गुजरात गार्डियन के संपादक मनोज मिस्त्री ने कहा कि पत्रकारों का दायित्व समाज में व्याप्त विसंगतियों, सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार और आमजन की समस्याओं को सामने लाना है। डिजिटल पत्रकारिता के दौर में अफवाहों का प्रसार एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से कहा कि वे पत्रकारिता के सिद्धांतों को समझें और इस क्षेत्र को केवल कमाई का माध्यम न मानें। पत्रकारिता मूलतः सामाजिक दायित्व और सिद्धांतों से जुड़ा क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय युवाओं का है और युवा पत्रकारों का कर्तव्य है कि वे तथ्यों और सच्चाई को निर्भीकता से सामने लाएँ।

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पत्रकार समाज का आईना : नरेश वारिया

धबकार के संपादक नरेश वारिया ने कहा कि पत्रकार समाज और देश का आईना होते हैं। पत्रकार में सरलता, सहजता और विश्वसनीयता के साथ सामाजिक कुरीतियों को दूर करने का जुनून होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पत्रकार को सत्य को उजागर करने में किसी प्रकार की हिचक नहीं होनी चाहिए और किसी दबाव में की गई पत्रकारिता वास्तविक पत्रकारिता नहीं हो सकती।

पत्रकारिता में संघर्ष और स्वच्छ छवि जरूरी : धर्मेश कुकड़िया

गुजरातमित्र के संपादक धर्मेश कुकड़िया ने अपने पत्रकारिता जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की और लगभग 30 वर्षों के अनुभव के बाद आज संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत, निरंतर अध्ययन और स्वच्छ छवि से ही पत्रकारिता में निखार आता है तथा समाज में सम्मान प्राप्त होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से पत्रकारिता विषय के अध्ययन के लिए प्रतिदिन पर्याप्त समय देने का आह्वान किया।

चुनौतियों के बावजूद हिंदी पत्रकारिता की अलख जलाए रखी : कुलदीप सनाढ्य

लोकतेज के संपादक कुलदीप सनाढ्य ने कहा कि दक्षिण गुजरात में हिंदी पत्रकारिता की अलख जगाने वाला ‘लोकतेज’ अब 30 वर्ष का हो चुका है। उन्होंने बताया कि जब सूरत और आसपास हिंदी भाषी पाठकों को उत्तर प्रदेश से कई दिन पुराने अखबार मँगाकर पढ़ने पड़ते थे, तब हिंदी दैनिक पत्रकारिता के क्षेत्र में एक नई पहल के रूप में लोकतेज सामने आया। साप्ताहिक से दैनिक बनने की यात्रा में अनेक चुनौतियाँ आईं, लेकिन सिद्धांतों से समझौता नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि 2000 से 2010 के दौरान टेलीविजन समाचारों का प्रभाव बढ़ा, लेकिन टीआरपी की दौड़ में विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे। वर्तमान समय में सोशल मीडिया और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसे नए माध्यम पत्रकारिता के सामने नई चुनौतियाँ और अवसर दोनों प्रस्तुत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग लाभकारी है, लेकिन बिना समझे इसका इस्तेमाल विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से बिना किसी प्रलोभन या दबाव के पत्रकारिता करने का आह्वान करते हुए इसे राष्ट्रधर्म बताया।

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वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान

हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष के अवसर पर सूरत में पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान देने वाले वरिष्ठ पत्रकारों एवं मीडिया प्रतिनिधियों को स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मानित पत्रकारों में डॉ. गौतम पटेल (डीडी न्यूज़), अनूप मिश्रा (एएनआई), चंद्रकांत सोलंकी (गुजरात गार्डियन),  नीलम कंथारिया (धबकार), वीरेंद्र प्रताप दुबे (लोकतेज),  रुत्वा त्रिवेदी (सूरतीज डिजिटल), वीरांग भट्ट (Khabarchhe), विकास पाटिल (प्रचंड न्यूज़),  दिनेश त्रिवेदी (राजस्थान पत्रिका) तथा  शिल्पेश राणा (संदेश) शामिल रहे।

कार्यक्रम के माध्यम से हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की गौरवशाली यात्रा को स्मरण करते हुए नई पीढ़ी के पत्रकारों को पत्रकारिता के मूल्यों, विश्वसनीयता, निर्भीकता और सामाजिक सरोकारों के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

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