अपराधी पैसा देकर सजा से नहीं बच सकते, मुआवजा बढ़ाकर सजा घटना खतरनाक ट्रेंड: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों के हालिया ट्रेंड पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत का कहना है कि गंभीर अपराधों में मुआवजा बढ़ाना और सजा कम करने का चलन काफी खतरनाक है। दोषियों की सजा को मनमाने तरीके से कम नहीं किया जा सकता है। शीर्ष कोर्ट का कहना है कि यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है और इससे समाज में गलत संदेश जाएगा। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी मदुरै हाई कोर्ट के एक फैसले पर आया है। कोर्ट ने कहा कि इससे समाज में गलत संदेश जाता है कि आरोपी सिर्फ पैसा देकर अपनी जिम्मेदारी से बच सकते हैं। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि सजा का उद्देश्य अपराध के प्रति डर पैदा करना है, ताकि भविष्य में अपराध रोके जा सकें। सजा न तो अत्यधिक कठोर होनी चाहिए और न इतनी नरम कि उसका भय खत्म हो जाए।

यह है मामला: दरअसल एक व्यक्ति पर चाकू से हमला कर उसे गंभीर चोट पहुंचाने पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को तीन-तीन साल की सजा और 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। यह मामला जब मदुरै हाई कोर्ट में पहुंचा तो  उसने दो आरोपियों की सजा कम कर दी और मुआवजा 5-5 हजार से बढ़ाकर 50-50 हजार कर दी। इस मामले को शीर्ष कोर्ट ने गंभीरता से लिया और फैसले को रद्द कर दिया।

सजा का विकल्प नहीं हो सकता है मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पीड़ित को मुआवजा देना तो जरूरी है लेकिन यह सजा का विकल्प नहीं हो सकता। भारतीय न्याय प्रणाली बदले पर नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्स्थापन के सिद्धांत पर आधारित है। कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 395 में पीड़ित को मुआवजा देने का प्रावधान है, लेकिन यह सजा के अतिरिक्त है, ये सजा की जगह नहीं ले सकता। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सजा सुनाते समय अदालतों को इन बिंदुओं पर विचार करना चाहिए। सबसे पहले तो मामले के तथ्य और परिस्थितियां को सही से समझने की आवश्यकता है। फैसले से समाज पर क्या असर पड़ेगा, ये जरूर सोचना चाहिए। 

ट्रायल कोर्ट की तीन साल की सजा बहाल की

सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में हाई कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए ट्रायल कोर्ट की तीन साल की सजा बहाल कर दी। साथ ही निर्देश दिया कि आरोपी चार सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करें और शेष सजा काटें। ट्रायल कोर्ट को पहले से काटी गई अवधि का समायोजन करने के निर्देश भी दिए गए।

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