- Hindi News
- राष्ट्रीय
- क्या मां गंगा से मिलने के लिए परमिशन लेंगे?: माघ मेला विवाद पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कड़ा र...
क्या मां गंगा से मिलने के लिए परमिशन लेंगे?: माघ मेला विवाद पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का कड़ा रुख
प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर संगम तट पर हुए हंगामे के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पुलिस द्वारा रोके जाने और समर्थकों के साथ हुई धक्का-मुक्की से नाराज शंकराचार्य ने तीखे सवाल दागे हैं। उन्होंने कहा, "क्या किसी बच्चे को अपनी मां से मिलने के लिए अनुमति लेनी होगी?"
क्या है पूरा विवाद?
मौनी अमावस्या के मुख्य स्नान पर्व पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद करीब 200 अनुयायियों के साथ रथ और पालकी लेकर संगम नोज पहुंचे थे। अत्यधिक भीड़ का हवाला देते हुए पुलिस प्रशासन ने उन्हें रथ से उतरकर पैदल जाने को कहा। इसी बात को लेकर पुलिस और शंकराचार्य के समर्थकों के बीच तीखी झड़प हुई। विवाद इतना बढ़ा कि शंकराचार्य बिना स्नान किए ही वापस लौट गए और अब उन्होंने प्रशासन पर परंपराएं तोड़ने का आरोप लगाया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बरसे शंकराचार्य: 'यह पानीपत के युद्ध जैसी स्थिति थी'
सोमवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में शंकराचार्य ने प्रशासन के 'अनुमति' वाले तर्क पर कड़ा प्रहार किया। उनकी मुख्य बातें निम्नलिखित रहीं:
- परंपरा का अपमान: उन्होंने आरोप लगाया कि माघ मेले में अनादि काल से संतों के ससम्मान स्नान की परंपरा रही है, जिसे इस बार खंडित और अपमानित किया गया है।
- पुलिस बर्बरता के आरोप: स्वामी जी ने एक बटुक का खून से सना दुपट्टा दिखाते हुए दावा किया कि पुलिस ने बुजुर्ग संतों को जूतों से मारा और नेपाल से आए एक संत की चोटी पकड़कर पिटाई की।
- साजिश का दावा: उन्होंने इसे एक गहरी साजिश बताते हुए कहा कि प्रशासन उन्हें उनके समर्थकों से दूर करना चाहता था, जिससे '1762 के पानीपत युद्ध' जैसी भयावह स्थिति पैदा हो सकती थी।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि"हमें पालकी का शौक नहीं है, यह भीड़ प्रबंधन के लिए है ताकि भगदड़ न हो। हम गंगा स्नान के लिए परमिशन नहीं लेंगे। क्या अब सनातनियों को अपने ही देश में स्नान के लिए गिड़गिड़ाना होगा?"
प्रशासन का पक्ष: सुरक्षा कारणों का दिया हवाला
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने स्पष्ट किया कि संगम नोज पर उस समय लाखों की संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मौजूद थे। सुरक्षा के मद्देनजर उस समय वीवीआईपी स्नान की अनुमति नहीं थी, इसलिए शंकराचार्य से केवल पैदल जाने का अनुरोध किया गया था।
वहीं, बैरिकेड तोड़ने के आरोपों पर शंकराचार्य ने प्रशासन को चुनौती दी है कि वे CCTV फुटेज सार्वजनिक करें। उन्होंने मांग की है कि ऐसे 'भेदभावपूर्ण' मेला प्रशासन को तुरंत बदला जाना चाहिए।

संत समाज में बढ़ता रोष
इस घटना के बाद माघ मेले में आए अन्य साधु-संतों और श्रद्धालुओं के बीच काफी तनाव देखा जा रहा है। शंकराचार्य का बिना स्नान किए लौटना और संतों के साथ कथित मारपीट मेला प्रशासन के लिए गले की हड्डी बन गया है।

