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‘बापूजी’ वल्लभभाई सवानी: एक ऐसा इंसान जो पूरे समाज के लिए पिता समान बन गया
(उत्कर्ष पटेल)
जब कोई इंसान अपनी ज़िंदगी सिर्फ़ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए जीना शुरू कर देता है, तो वह नाम सिर्फ़ एक इंसान का नाम नहीं रह जाता, बल्कि एक संस्था बन जाता है। ऐसे ही एक प्रेरणास्रोत हैं वल्लभभाई सवानी, जिन्हें सौराष्ट्र पाटीदार समुदाय प्यार से “बापूजी” कहकर बुलाता है।
उन्होंने हीरे और रियल एस्टेट के बिज़नेस में सफलता पाकर जो दौलत कमाई, उसका इस्तेमाल सिर्फ़ अपने परिवार के लिए नहीं, बल्कि समाज के भविष्य के लिए किया; और यहीं से शुरू होती है इंसानियत की सेवा की एक अनोखी कहानी।

वल्लभभाई सवानी ने एक बार कहा था कि उन्हें उच्च शिक्षा पाने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्होंने अपनी इस कमी को अपनी कमज़ोरी नहीं, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणा बना लिया। उस दौर में जब सूरत में कुछ ही स्कूलों का दबदबा था और उनमें दाखिला मिलना बहुत मुश्किल था, उन्होंने P.P. सवानी स्कूल की शुरुआत की।
आज वह छोटा-सा बीज एक विशाल बरगद का पेड़ बन चुका है। P.P. सवानी ग्रुप ऑफ़ स्कूल्स के तहत आज 9 स्कूल चल रहे हैं। साल 2017 में एक यूनिवर्सिटी भी शुरू की गई, जिसमें आज 14 विभाग हैं। अब तक इन सभी संस्थानों में लगभग 10 लाख छात्र पढ़ाई कर चुके हैं। आज भी यहाँ 10 से 15 हज़ार छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। ये आँकड़े सिर्फ़ संख्याएँ नहीं हैं, बल्कि हज़ारों परिवारों के बदलते भविष्य की कहानी हैं।

बापूजी का नज़रिया सिर्फ़ स्कूल या यूनिवर्सिटी तक ही सीमित नहीं है। यहाँ छात्रों को ज़िंदगी के लिए तैयार किया जाता है। पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी पाने में मदद करने के लिए, साल 2003 में GPSC और UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया गया; जहाँ से कई छात्र ट्रेनिंग लेकर SP, कलेक्टर, मामलातदार या अफ़सर बन चुके हैं।
बापूजी यह अच्छी तरह समझते थे कि शिक्षा की तरह ही सेहत भी उतनी ही ज़रूरी है। उन्होंने एक अस्पताल भी शुरू किया, जिससे अब तक अनुमानित तौर पर 20 लाख से ज़्यादा मरीज़ों को फ़ायदा पहुँच चुका है। ये आँकड़े इस बात का सबूत हैं कि ये सेवाएँ कितनी असरदार और बेहतरीन हैं।

एक पिता समान व्यक्तित्व होने के नाते, शिक्षा, सेहत और रोज़गार मुहैया कराने के बाद, शादी-ब्याह का काम भी बाकी रह जाता है। बापूजी ने इस काम की शुरुआत भी सामूहिक विवाह (ग्रुप मैरिज) के ज़रिए की। और वह भी उन बेटियों की शादी करवाकर, जिनके माता-पिता इस दुनिया में नहीं थे। उनकी प्रेरणा से ही, उनके बेटे महेश सवानी ने अब तक 5000 से ज़्यादा बेटियों की शादी करवाई है। कुछ लोगों के लिए वल्लभभाई की छवि एक 'बाहुबली' की है।एक ऐसा व्यक्ति जो, अगर सिस्टम के भीतर रहकर काम नहीं कर पाता, तो सिस्टम के बाहर जाकर काम करता है। लेकिन उनके सभी समाज-सेवा के कार्यों को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि उन्होंने सिस्टम के बाहर रहकर जो भी काम किए हैं, उनका लाभ अंततः समाज तक ही पहुँचा है। उन्होंने केवल अपना घर ही नहीं भरा है।

वल्लभभाई कहते हैं कि अगर सपने बढ़ते नहीं हैं, तो इसका मतलब है कि उन्हें बोया नहीं गया, बल्कि दफ़ना दिया गया है। उन्होंने न केवल अपने बोए हुए सपनों को विशाल बरगद के पेड़ों में बदल दिया है, बल्कि उनके साथ-साथ, उन्होंने लाखों लोगों के सपनों से एक ऐसा सुंदर बगीचा भी तैयार किया है—जिसमें खिलने वाले फूल अनंत काल तक अपनी महक बिखेरते रहेंगे।
(लेखक एक प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और khabarchhe.com के संस्थापक हैं।)

