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क्या वाकई में अब एआई से नौकरियों पर खतरा नहीं, टेक लीडर्स अपनी ही बातों से पलटे, बोले- AI इंसानों की जगह नहीं ले सकता
ओपनएआई के सीईओ बोले- दुनिया में रोजगार को लेकर कोई बड़ा संकट नहीं आएगा, केवल काम करने का तरीका बदल जाएगा
नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर लंबे समय से यह आशंका जताई जा रही थी कि आने वाले वर्षों में यह तकनीक बड़ी संख्या में नौकरियां खत्म कर देगी। हालांकि ओपन एआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन का कहना है कि फिलहाल ऐसी कोई संभावना नहीं दिख रही है। उनका मानना है कि एआई काम करने के तरीके जरूर बदल रहा है, लेकिन रोजगार में इंसानी भूमिका को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है।
दरअसल, सिडनी में आयोजित कॉमनवेल्थ बैंक ऑफ अमेरिका (CBA) की एक कॉन्फ्रेंस में वर्चुअली शामिल हुए ऑल्टमैन ने कहा कि शुरुआती दौर में उन्हें डर था कि एआई सबसे पहले एंट्री-लेवल व्हाइट कॉलर नौकरियों को प्रभावित करेगा, लेकिन अब तक बड़े पैमाने पर ऐसा देखने को नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि इस मामले में गलत साबित होने पर उन्हें खुशी है।
सोशल और आर्थिक असर को लेकर हमारी भविष्यवाणी गलत रही
अपने इंटरव्यू में ऑल्टमैन ने कहा कि जब 2022 में OpenAI ने ChatGPT लॉन्च किया था, तब कंपनी ने तकनीकी प्रगति को लेकर कई अनुमान लगाए थे। उनके मुताबिक, तकनीकी भविष्यवाणियां काफी हद तक सही साबित हुईं, लेकिन एआई के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर उनकी सोच पूरी तरह सही नहीं निकली। ऑल्टमैन ने कहा, ‘मुझे लगा था कि अब तक एंट्री-लेवल व्हाइट कॉलर जॉब्स बड़े पैमाने पर खत्म हो चुकी होंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब मैं बेहतर तरीके से समझ पा रहा हूं कि ऐसा क्यों नहीं हुआ और मैं इसके लिए आभारी हूं।’
…लेकिन भविष्य में खतरा बरकरार रहेगा
उन्होंने माना कि उस समय एआई से रोजगार पर असर का खतरा उन्हें वास्तविक लगा था, इसलिए उस पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करना जरूरी था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में यह जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बता दें कि दुनिया की कई बड़ी कंपनियां पहले ही एआई आधारित ऑटोमेशन को अपनाने लगी हैं। दुनिया के दिग्गज बैंक और बड़ी कपंनियां यह घोषणा कर चुकी हैं कि कुछ भूमिकाओं में एआई का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। इसके बावजूद ऑल्टमैन का कहना है कि नौकरियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऐसा है, जिसमें इंसानी संवाद, भरोसा और व्यक्तिगत जुड़ाव जरूरी होता है। इसे एआई पूरी तरह रिप्लेस नहीं कर सकता।
उन्होंने अपना उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ समय तक वे ईमेल मैसेज का जवाब देने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहे थे। उस दौरान जवाब में ‘यह सैम का AI है’ लिखा होता था। बाद में उन्होंने महसूस किया कि लोग सीधे इंसान से संवाद को अधिक महत्व देते हैं, इसलिए वे खुद जवाब देने लगे। ऑल्टमैन
ने कहा कि लोगों के साथ बातचीत करना उनके काम और समय का बड़ा हिस्सा है और वे भविष्य में इसे एआई को पूरी तरह सौंपने की कल्पना भी नहीं कर सकते।
एआई रोजगार के स्वरूप को जरूर बदल देगा
ऑल्टमैन के मुताबिक एआई आने वाले समय में रोजगार के स्वरूप को जरूर बदलेगा, लेकिन इसका असर पारंपरिक आशंकाओं से अलग होगा। उन्होंने कहा कि सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही तरह से यह स्पष्ट है कि भविष्य की नौकरियां आज की कल्पना से काफी अलग होंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि दुनिया में ऐसा कोई बड़ा रोजगार संकट आएगा, जैसा कुछ टेक कंपनियां दावा करती रही हैं।
ओपन एआई आईपीओ लाने की तैयारी में
एक रिपोर्ट के अनुसार, ओपनएआई आने वाले हफ्तों में अमेरिका में आईपीओ लाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी 1 ट्रिलियन डॉलर तक की वैल्यूएशन का लक्ष्य रख सकती है और कम से कम 60 बिलियन डॉलर जुटाने की योजना बना सकती है। हालांकि कंपनी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
तो क्या दुनिया से गंभीर आर्थिक संकट टल गया है?
‘जॉब्स एपोकैलिप्स’ उस आशंका को कहा जाता है, जिसके तहत माना जा रहा था कि एआई और ऑटोमेशन के कारण दुनिया भर में बड़े पैमाने पर इंसानी नौकरियां खत्म हो जाएंगी और गंभीर आर्थिक संकट पैदा होगा। हालांकि अब कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि एआई नौकरियां पूरी तरह खत्म करने के बजाय काम करने के तरीकों और स्किल्स की जरूरत को बदल रहा है। नई तकनीक के साथ नई भूमिकाएं और नई तरह की नौकरियां भी सामने आ रही हैं।

