- Hindi News
- ग्लोबल वॉर का साइड इफेक्ट! ईरान-अमेरिका-इज़रायल संघर्ष के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 3.61
ग्लोबल वॉर का साइड इफेक्ट! ईरान-अमेरिका-इज़रायल संघर्ष के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 3.61 लाख करोड़ की कमी
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच भारत सरकार देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए एक्शन मोड में आ गई है। रविवार को तेलंगाना में एक विशाल रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अगले एक वर्ष तक सोना खरीदने और विदेश यात्रा से बचने की अपील की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संकट के कारण क्रूड ऑयल और उर्वरकों की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें किसी भी कीमत पर विदेशी मुद्रा (Forex) बचानी होगी। ईंधन और आयात कम करने के लिए फिर से ‘वर्क फ्रॉम होम’, वर्चुअल मीटिंग्स और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अपनाने की आवश्यकता है।
पेट्रोल-डीज़ल की खपत कम करने के लिए मेट्रो रेल का उपयोग, कारपूलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ने की अपील की गई है। पार्सल और माल ढुलाई के लिए रेलवे के उपयोग को बढ़ाने को कहा गया है।
खाद्य तेल का उपयोग कम करना, रासायनिक उर्वरकों का कम इस्तेमाल कर प्राकृतिक खेती अपनाना और अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पाद खरीदने का आह्वान किया गया है।
भारत, चीन के बाद सोने का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 में सोने का आयात 24% बढ़कर $71.98 बिलियन (₹6.77 लाख करोड़) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। तुलना में 2024-25 में यह आंकड़ा ₹5.45 लाख करोड़ था। चौंकाने वाली बात यह है कि कीमतें बढ़ने के कारण आयात का मूल्य बढ़ा है, लेकिन सोने की मात्रा (Quantity) 757 टन से घटकर 721.03 टन हो गई है।

भारत अपनी आवश्यकता का 85% सोना आयात करता है। ‘इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन’ की रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारतीय परिवारों के पास मौजूद लगभग 35,000 टन सोने में से थोड़ा भी रीसायकल किया जाए, तो प्रति टन लगभग ₹893 करोड़ की आयात बचत की जा सकती है।
ईरान-इज़रायल संघर्ष के कारण भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 1 मई तक घटकर $690.7 बिलियन रह गया है, जो पिछले फरवरी में $728.494 बिलियन के सर्वोच्च स्तर पर था। यानी 3.61 लाख करोड़ की कमी हुई है।
भारत अपनी आवश्यकता का 85% क्रूड ऑयल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकारी कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। परिणामस्वरूप, ये कंपनियां पेट्रोल-डीज़ल पर प्रतिदिन लगभग ₹1,600 से ₹1,700 करोड़ का नुकसान उठा रही हैं। पिछले 10 सप्ताह में कुल नुकसान ₹1 लाख करोड़ को पार कर चुका है।
सरकार ने जनता को राहत देने के लिए एक्साइज ड्यूटी में कटौती की है, जिससे सरकार को हर महीने ₹14,000 करोड़ के राजस्व का नुकसान हो रहा है। मार्च 2026 के अंत तक भारत ने क्रूड और पेट्रोलियम उत्पादों पर कुल $174.9 बिलियन (₹16.44 लाख करोड़) खर्च किए हैं, जो देश के कुल आयात का 22% हिस्सा है। यही कारण है कि पीएम मोदी ने देशवासियों से आर्थिक सहयोग देने की अपील की है।

