तिलकुंद चतुर्थी: भगवान गणेश की विशेष कृपा पाने के लिए करें यह व्रत, तिल का दान करना अत्यंत शुभ

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सूरत। माघ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का व्रत। इस तिथि का धार्मिक ग्रंथों में बहुत महत्व बताया गया है। इस तिथि को तिलकुंद चतुर्थी के साथ-साथ विनायकी और वरद चतुर्थी भी कहते हैं। चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश हैं। वहीं, गुरुवार का कारक ग्रह गुरु यानी बृहस्पति है। इसलिए कहा जाता है कि इस दिन भगवान गणेश के साथ ही गुरु ग्रह के लिए विशेष पूजा करनी चाहिए। इस दिन भी तिल का भोग लगाने, तिल का सेवन करने और तिल का दान करना बहुत शुभ फलदायी होता है। तिलकुंद चतुर्थी के दिन गुरुवार का भी संयोग बन रहा है तो ऐसे में गणेश जी के साथ-साथ भगवान विष्णु  की भी पूजा करें। ज्योतिष में गुरु ग्रह को ज्ञान, धर्म, भाग्य, संतान और सुख-समृद्धि का कारक माना जाता है। गुरु ग्रह धनु और मीन राशि का स्वामी है। जिन लोगों की कुंडली में गुरु की स्थिति कमजोर है, उन्हें चतुर्थी और गुरुवार के योग में गुरु ग्रह की पूजा करनी चाहिए। गुरु ग्रह की पूजा शिवलिंग रूप में की जाती है। इसलिए शिवलिंग पर केसर मिश्रित जल चढ़ाएं। पीले फूल, चंदन, बिल्व पत्र, गुलाब से श्रृंगार करें। गुरु ग्रह के मंत्र ऊं बृं बृहस्पतये नमः का जप करें। भोग में बेसन के लड्डू अर्पित करें।

तिल और पीली वस्तुओं का दान करें

सुबह उठकर पहले अच्छे से स्नान कर लें। भगवान गणेश को तिल के लड्डू का भोग लगाएं। तिलकुंद चतुर्थी पर पूजा-पाठ के साथ ही तिल और पीली वस्तुओं का दान करना चाहिए। इस दिन तिल से हवन करना शुभ माना जाता है। वहीं, शाम को भी भगवान गणेश की पूजा करें और तिल-गुड़ का भोग लगाएं। तिलकुंद चतुर्थी पर घर के मंदिर में भगवान गणेश का पंचामृत और जल से अभिषेक करें। हार-फूल और वस्त्रों से श्रृंगार करें। इसके बाद दूर्वा, फल, फूल, चावल, रोली, मौली अर्पित करें। तिल और तिल-गुड़ से बनी मिठाई, लड्डुओं का भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि गणेश पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर हो। 

अपनी जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें

पूजा करते समय ऊं श्रीगणेशाय नमः मंत्र का जप करें। धूप-दीप जलाएं और कर्पूर से आरती करें। पूजा करने के बाद भगवान से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें और फिर अन्य भक्तों को प्रसाद बांटें। शाम को भी इसी विधि से पूजा करनी चाहिए। चतुर्थी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। गुरु ग्रह की शांति के लिए ग्रंथों का दान कर सकते हैं। किसी मंदिर में पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, हार-फूल, प्रसाद, भगवान के वस्त्र, चंदन, घी, तेल और रूई आदि का दान करना भी शुभ माना जाता है।

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