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महाशिवरात्रि कल, शिवालय सजाए गए, जानिए भगवान शिव के लिए बेल पत्र, धतूरा, केसर, शहद क्यों महत्वपूर्ण है?
सूरत। भगवान शिव का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि कल है। देश के प्रमुख शिव मंदिरों में इस दौरान भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिरों में काफी भव्य तरीके से सजावट होती है। सूरत के शिवालयों में भी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस पर्व पर रात के चार प्रहर में शिव पूजा होती है। शिवरात्रि पूजा के मुहूर्त शाम 6.20 से शुरू हो रहे हैं। 15 फरवरी यानी महाशिवरात्रि के दिन सूर्योदय से पहले उठें। पानी में गंगाजल और काले तिल मिलाकर नहाएं। शिव पूजन करें और व्रत का संकल्प लें। व्रत-उपवास में अन्न नहीं खाएं। हालांकि पुराणों के अनुसार अगर आप पूरे मन से व्रत करते हैं तो पानी भी नहीं पीना चाहिए। इतना कठिन व्रत न कर सकें तो फल, दूध और पानी ले सकते हैं। सुबह-शाम नहाने के बाद शिव मंदिर दर्शन करने जाएं।
शिव पुराण में लिखा है कि फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष के चौदहवें दिन यानी चतुर्दशी तिथि पर पहली बार शिवलिंग प्रकट हुआ था। तब भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ने शिवलिंग की पूजा की। इसी दिन को शिवरात्रि कहा गया। वहीं, शिव विवाह अगहन महीने के कृष्ण पक्ष के दूसरे दिन हुआ था। ऐसा माना जाता है कि शिवलिंग के निचले हिस्से में पार्वती का भी स्थान होता है। महाशिवरात्रि पर महादेव की पूजा रात में होती है। खास बात यह है कि पार्वती के बिना शिव पूजन अधूरा रहता है।
भगवान भोले को ये चीजें अत्यंत प्रिय हैं
बता दें कि भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। तीन पत्तियों वाला बेलपत्र त्रिदेव और त्रिशक्ति का प्रतीक माना जाता है। महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर स्वच्छ और बिना कटे-फटे बेलपत्र चढ़ाने से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
यह भी जानना जरूरी है कि भगवान शिव को धतूरा इतना प्रिय क्यों है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय निकले विष को भगवान शिव ने ग्रहण किया था। धतूरा जो एक औषधीय और विषैला फल है, उन्हें अर्पित किया जाता है। महाशिवरात्रि पर धतूरा चढ़ाने से कष्टों और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
इसके अलावा केसर भी बहुत खास है। इसकी सुगंध को पवित्र और शुभ माना गया है। शिव पूजा में लाल केसर अर्पित करने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। शिवलिंग पर हल्का केसर तिलक करना शुभ फलदायी माना जाता है। वहीं शमी का पेड़ धार्मिक दृष्टि से महत्वूपर्ण है। महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर शमी पत्र और फूल चढ़ाने से रुके हुए कार्य पूरे होते हैं। शहद भी भगवान शिव को काफी पसंद है। शहद से अभिषेक करना या शिव जी को शहद अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है। इससे जीवन में मधुरता, प्रेम और पारिवारिक सुख-शांति बनी रहती है।

