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संकष्टी चतुर्थी व्रत आज: भगवान गणेश के साथ विष्णुजी की भी आराधना करें, जीवन के विघ्न दूर होंगे
आज फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इसके साथ ही गुरुवार का दिन भी है। आज संकष्टी चतुर्थी का व्रत भी है। इस तरह 5 फरवरी का दिन हिंदू पंचांग के अनुसार काफी अहम है। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान श्रीगणेश की विधिवत पूजा करने की परंपरा है। इस व्रत को पूरे विधि-विधान से करने से सुख-संपदा की प्राप्ति होती है और जीवन की परेशानियां दूर होती है, दुख दर्द से मुक्ति मिलती है। सबसे खास बात ये व्रत घर-परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। दिनभर निराहार रहकर व्रत पूरा किया जाता है। शाम को चंद्र उदय के बाद चंद्र को अर्घ्य दिया जाता है, इसके बाद व्रत करने वाले भक्त खाना खाते हैं। 5 फरवरी को गुरुवार और चतुर्थी का योग है तो भगवान गणेश, विष्णु जी, गुरु ग्रह के साथ ही चंद्रदेव की भी विशेष पूजा की जाती है।
जान लें पूजा के विधि-विधान
सबसे पहले चतुर्थी पर स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। इसके बाद पूजा की अच्छे तरीके से तैयारी करें। घर के मंदिर और उसके आसपास साफ-सफाई करें। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा करें। जल, दूध, पंचामृत और फिर जल से भगवान को स्नान कराएं। नए वस्त्रों से और फूल से गणेश जी का शृंगार करें। कुमकुम, चंदन, चावल, दूर्वा, अबीर, गुलाल आदि पूजन सामग्री अर्पित करें। मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। गणेश जी के मंत्र श्री गणेशाय नम: का जप करें।
दिनभर निराहर रहकर व्रत करें
चतुर्थी व्रत करने वाले दिनभर निराहार रह सकते हैं। अगर भूखे रहना मुश्किल हो तो एक समय फलाहार और फलों का सेवन सकते हैं। दूध और फलों का रस भी पी सकते हैं। शाम को चंद्र उदय के बाद चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। चंद्रदेव के मंत्र ऊं सों सोमाय नम: का जप करें। गणेश जी की पूजा करें। इस तरह ये व्रत पूरा होता है। इसके बाद व्रत करने वाले भक्त खाना खा सकते हैं।
विष्णु जी और महालक्ष्मी का अभिषेक करें
गुरुवार को गणेश पूजा के बाद विष्णु जी और महालक्ष्मी का अभिषेक करना चाहिए। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और भगवान को स्नान कराएं। दूध के बाद शुद्ध जल से अभिषेक करें। हार-फूल और नए वस्त्रों से भगवान का शृंगार करें। तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें। ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें।

